छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला : आरोपी नारायण साहू के खिलाफ 5वां पूरक चालान पेश
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ कोयला घोटाला मामले में पांचवां पूरक चालान पेश।
- आरोपी नारायण साहू के खिलाफ रायपुर कोर्ट में कार्रवाई।
- सूर्यकांत तिवारी के निर्देश पर होती थी अवैध लेवी वसूली।
- आरोपी साहू ने अफसरों तक पहुंचाए 7.5 करोड़ रुपए।
- जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाला (Coal Levy Scam) मामले में राज्य की भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) की टीम ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने मामले के सक्रिय आरोपी नारायण साहू के खिलाफ विशेष न्यायालय रायपुर में 5वां पूरक चालान (Supplementary Charge Sheet) पेश कर दिया है। कोर्ट में पेश किए गए इस चालान में नारायण साहू के खिलाफ अवैध वसूली और सिंडिकेट के साथ मिलकर करोड़ों रुपए की हेराफेरी करने के पुख्ता सबूत शामिल किए गए हैं। आरोपी वर्तमान में रायपुर की केंद्रीय जेल में बंद है।
करोड़ों की अवैध वसूली और रजनीकांत को ट्रांसफर
जांच में यह बात सामने आई है कि नारायण साहू कोयला घोटाले के मुख्य सिंडिकेट का एक बेहद सक्रिय और महत्वपूर्ण सदस्य रहा है। वह मुख्य सरगना सूर्यकांत तिवारी के सीधे निर्देश पर काम करता था। नारायण साहू का मुख्य काम कोयला व्यापारियों और कोल परिवहनकर्ताओं (ट्रांसपोर्टर्स) से डरा-धमकाकर अवैध कोल लेवी वसूलना था। इस तरह जुटाई गई भारी-भरकम नकदी को वह रजनीकांत तिवारी के पास जमा कराता था।
अधिकारियों को बांटे 7.5 करोड़ कैश
ACB-EOW की जांच में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वह है अधिकारियों तक घूस की रकम पहुंचाना। चार्जशीट के मुताबिक, वसूली गई अवैध राशि में से लगभग 7.5 करोड़ रुपए की नगदी नारायण साहू ने ही प्रशासनिक अधिकारियों तक ट्रांसफर की थी। इस रकम को पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव सौम्या चौरसिया, आईएएस समीर विश्नोई और अन्य रसूखदार लोगों तक पहुंचाने, उनके परिवहन और पूरे व्यवस्थापन की जिम्मेदारी नारायण साहू ने ही संभाली थी।
इन गंभीर धाराओं के तहत दर्ज है केस
विशेष न्यायालय में पेश किए गए इस 5वें पूरक अभियोग पत्र में आरोपी नारायण साहू के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं:
IPC की धाराएं: 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 384 (जबरन वसूली), 467, 468 और 471 (दस्तावेजों की जालसाजी)।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधित 2018): धारा 7, 7ए और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अब तक की कार्रवाई: इस पूरे कोल लेवी घोटाले में जांच एजेंसी अब तक एक मूल (Main) चालान और 5 पूरक (Supplementary) चालान कोर्ट के सामने पेश कर चुकी है।
आगे की जांच जारी
ACB-EOW ने इस चालान के साथ पूर्व में पेश किए गए आरोपियों के खिलाफ कुछ अतिरिक्त और नए महत्वपूर्ण साक्ष्य भी कोर्ट को सौंपे हैं। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि कोयला घोटाले की परतें अभी और खोली जा रही हैं। इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य संभावित आरोपियों, नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ भी विवेचना (Investigation) लगातार जारी है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ का कोयला घोटाला प्रशासनिक भ्रष्टाचार का एक गंभीर उदाहरण है। नारायण साहू के खिलाफ पेश पांचवें पूरक चालान से साफ है कि सिंडिकेट ने सुनियोजित तरीके से करोड़ों की लेवी वसूली। अधिकारियों तक 7.5 करोड़ रुपये पहुंचाना जांच एजेंसियों के लिए इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने का एक मजबूत आधार बनेगा।
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