उच्च शिक्षा विभाग ने बदल दी अधिकारियों की पूरी व्यवस्था, जानें किसके पास है प्रभार
छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा विभाग में प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट पर विराम लग गया है। आयुक्त डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने नई व्यवस्था पर अपरी मुहर लगा दी है। अधिकारियों की पदस्थापना के बाद कामों का नए सिरे से बंटवारा किया गया है, जिसने विभाग के भीतर शक्तियों के समीकरण को पूरी तरह से री-सेट कर दिया है।
दो के पास विभाग की चाबी
इस नए आदेश में अगर किसी का कद सबसे ज्यादा बढ़कर उभरा है, तो वह हैं अपर संचालक, वित्त जॉन तिग्गा। विभाग ने उन्हें खजाने की चाबी सौंप दी है। तिग्गा अब विश्वविद्यालय एवं अशासकीय महाविद्यालयों के पेंशन, अनुदान, लेखा,ऑडिट और बजट एवं योजना संबंधी समस्त कार्यों की कमान संभालेंगे। सेवानिवृत्त प्राचार्यों के पेंशन निराकरण जैसे संवेदनशील मामले भी अब उनकी सीधी निगरानी में होंगे।
वहीं, अपर संचालक डॉ. किशोर कुमार तिवारी विभाग के दूसरे सबसे शक्तिशाली स्तंभ बनकर उभरे हैं। उन्हें अराजपत्रित स्थापना, समन्वय, अकादमिक शाखा और सबसे महत्वपूर्ण संसदीय कार्य (लोकसभा व विधानसभा) की जिम्मेदारी दी गई है। यानी सदन में सरकार का पक्ष रखने और विभाग के समन्वय का पूरा जिम्मा अब तिवारी के कंधों पर होगा।
डॉ. तपेश और डॉ. अरूण सिन्हा को अहम मोर्चे
प्रशासनिक सर्जरी में प्रभारी अपर संचालक डॉ. तपेश चन्द्र गुप्ता को राजपत्रित स्थापना की जिम्मेदारी दी गई है। कॉलेज प्राध्यापकों की नियुक्तियों, पदोन्नति और लोक सेवा आयोग से जुड़े तमाम पत्राचार अब उनकी टेबल से होकर गुजरेंगे। शासकीय महाविद्यालयों के आहरण एवं संवितरण अधिकार भी उन्हीं के पास सुरक्षित रखे गए हैं।
दूसरी ओर संयुक्त संचालक डॉ. अरूण कुमार सिन्हा को विभाग के थिंक टैंक के रूप में देखा जा रहा है। उन्हें राज्य गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय शिक्षा नीति संबंधी कार्यों का प्रभारी बनाया गया है। छत्तीसगढ़ में नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने का सारा दारोमदार अब डॉ. सिन्हा पर होगा।
लिंक ऑफिसर का मास्टरप्लान
आयुक्त डॉ. देवांगन ने इस आदेश में एक ऐसी व्यवस्था लागू की है, जिससे अब अधिकारी छुट्टी पर है कहकर फाइलें नहीं दबाई जा सकेंगी। आदेश के बिंदु क्रमांक 3 में लिंक ऑफिसर की एक चेन तैयार की गई है।
यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि विभाग का कामकाज बिना किसी बाधा के चलता रहे। इसके अलाावा कई अन्य महत्वपूर्ण पदों पर अधिकारियों की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया है।
आयुक्त की सख्त टिप्पणी
आदेश के अंत में आयुक्त ने सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिन शाखाओं में अपर संचालक पदस्थ हैं, उनकी फाइलें अनिवार्य रूप से संबंधित अपर संचालक के माध्यम से ही आयुक्त तक आएंगी।
जहां अपर संचालक नहीं हैं, केवल वहीं सीधे आयुक्त को नस्ती प्रस्तुत की जा सकेगी। यह कदम विभाग में चेन ऑफ कमांड को बहाल करने और अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
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