चुनाव में छिटके आदिवासियों को साधने छत्तीसगढ़ कांग्रेस का मेगा प्लान, एसटी काउंसिल बनाई
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में 2023 विधानसभा चुनाव में आदिवासी वोट बैंक में आई बड़ी सेंध के बाद कांग्रेस अब इस वर्ग को दोबारा अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस ने बड़ा आदिवासी प्लान तैयार किया है।
इसी कड़ी में पार्टी ने राज्य जनजातीय सलाहकार परिषद (State Tribal Advisory Council) का गठन किया है, वहीं सात जिलों में आदिवासी कांग्रेस के नए जिला अध्यक्षों की नियुक्ति भी की गई है। प्रदेश में आदिवासी आबादी करीब 30 से 32 प्रतिशत मानी जाती है और यही वर्ग सत्ता की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। छत्तीसगढ़ की 90 विधानसभा सीटों में से 29 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
छिटके आदिवासी तो चली गई सत्ता:
2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आदिवासी इलाकों में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 29 में से 25 एसटी सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसी मजबूत समर्थन के दम पर प्रदेश में भूपेश बघेल सरकार बनी। लेकिन 2023 के चुनाव में तस्वीर बदल गई। आदिवासी वोट बैंक का बड़ा हिस्सा बीजेपी की ओर शिफ्ट हो गया और कांग्रेस महज 11 एसटी सीटों तक सिमट गई।
बीजेपी ने 17 सीटें जीतकर बढ़त बना ली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आदिवासी क्षेत्रों में कांग्रेस की कमजोर पकड़ उसकी सत्ता जाने की बड़ी वजह बनी। अब कांग्रेस ने इसी वर्ग को फिर से साधने के लिए संगठनात्मक स्तर पर बड़ा अभियान शुरू किया है।
आदिवासी कांग्रेस की जनजातीय सलाहकार परिषद गठित:
ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ में राज्य जनजातीय सलाहकार परिषद का गठन किया है। परिषद में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज समेत 19 वरिष्ठ आदिवासी नेताओं को शामिल किया गया है। पार्टी का उद्देश्य आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर समन्वित रणनीति तैयार करना और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करना है।
ये है सलाहकार परिषद:
दीपक बैज के समेत परिषद में शामिल प्रमुख नेताओं में फूलो देवी नेताम, मोहन मरकाम, कवासी लखमा, प्रेमसाय सिंह टेकाम, अमरजीत भगत, अनिला भेड़िया, गंगा पोटाई, शंकर सोरी, गोवर्धन नेताम, ललजीत राठिया, लखेश्वर बघेल, विक्रम मंडावी, अंबिका मरकाम, सावित्री मंडावी, जनक राम ध्रुव, इंदरशाह मंडावी, विद्यावती सिदार और फूल सिंह राठिया शामिल हैं।
30 नेताओं को विशेष जिम्मेदारी:
कांग्रेस ने परिषद के साथ-साथ 30 नेताओं को विशेष आमंत्रित सदस्य भी बनाया है। इनमें पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, जिला कांग्रेस अध्यक्ष, राष्ट्रीय समन्वयक और जिला पंचायत स्तर के नेता शामिल हैं। खेलसाय सिंह, बोधराम कंवर, श्यामबाई ध्रुव, देवती कर्मा, देवेंद्र बहादुर सिंह, भानुप्रताप सिंह, तेजकुंवर नेताम, पुरुषोत्तम कंवर, कृष्ण कुमार ध्रुव, गुलाब कमरो, प्रीतम राम, रामदेव राम, श्यामल कंवर, मोहितराम केरकेट्टा, चंदन कश्यप और राजमन बेंजाम जैसे नेताओं को संगठन विस्तार की जिम्मेदारी दी गई है।
सात जिलों में नए जिला अध्यक्ष:
प्रदेश आदिवासी कांग्रेस ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए सात जिलों में नए जिला अध्यक्ष भी नियुक्त किए हैं। प्रदेश अध्यक्ष जनक ध्रुव द्वारा जारी आदेश में रायपुर शहर की जिम्मेदारी दीपेश कृपाल को सौंपी गई है। पार्टी का मानना है कि नए चेहरों को जिम्मेदारी देने से आदिवासी क्षेत्रों में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।
क्या है कांग्रेस की रणनीति:
छत्तीसगढ़ कांग्रेसअब आदिवासी राजनीति को केवल चुनावी मुद्दे तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि संगठनात्मक ढांचे के जरिए लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए रखने की तैयारी में है। पार्टी की कोशिश आदिवासी समाज से जुड़े स्थानीय मुद्दों, जल-जंगल-जमीन और आरक्षण जैसे विषयों पर फिर से भरोसा कायम करने की है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस आदिवासी वोट बैंक में अपनी पुरानी पकड़ दोबारा बना लेती है तो अगले विधानसभा चुनाव में सत्ता की लड़ाई फिर दिलचस्प हो सकती है।
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