सरकार का 800 उद्योगपतियों को नोटिस, जमीन लेकर दो साल में नहीं लगाई इंडस्ट्री

Arun Tiwari | Jun 09, 2026, 16:16 IST
800 उद्योगपतियों पर CSIDС का डंडा
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्षेत्रों की जमीन लेने के बाद भी करीब 800 उद्योगपतियों ने अपने उद्योग शुरू नहीं किए हैं। इसे देखते हुए सीएसआईडीसी ने सभी को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

Raipur : छत्तीसगढ़ के औद्योगिक क्षेत्रों में लीज पर जमीन लेने के बावजूद उद्योग स्थापित नहीं करने वाले करीब 800 उद्यमियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) ने ऐसे उद्यमियों को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।



निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उनकी लीज निरस्त कर जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नियम के मुताबिक लीज पर जमीन लेने के बाद दो साल में वहां पर उद्योग लगाना अनिवार्य है। सरकार ने ऐसे ही उद्योगपतियों को नोटिस दिया जिन्होंने जमीन लेने के बाद अपनी इंडस्ट्री नहीं लगाई।



इंडस्ट्री नहीं तो जमीन नहीं

जानकारी के अनुसार राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, विशेषकर रायपुर, उरला, सिलतरा और अन्य औद्योगिक केंद्रों में कई कंपनियों ने वर्षों पहले उद्योग लगाने के लिए जमीन आवंटित कराई थी। लेकिन बड़ी संख्या में उद्योगपतियों ने जमीन लेने के बाद अब तक उत्पादन इकाइयां शुरू नहीं की हैं।



इससे औद्योगिक विकास की गति प्रभावित हो रही है और नई परियोजनाओं के लिए उपलब्ध भूमि का उपयोग नहीं हो पा रहा है। सीएसआईडीसी के मुताबिक उद्योग स्थापित नहीं करने वाले उद्यमियों को लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।



यदि वे उद्योग स्थापना की स्पष्ट कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं करते हैं तो नियमों के अनुसार लीज समाप्त कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्योगों को जमीन आवंटन के समय आमतौर पर दो वर्ष की अवधि में परियोजना शुरू करने का प्रावधान रहता है, लेकिन कई मामलों में लंबे समय बाद भी काम शुरू नहीं हुआ है।



250 उद्योगपतियों से जमीन वापसी की प्रक्रिया शुरु

अधिकारियों के मुताबिक अब तक करीब 250 उद्यमियों से जमीन वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरु कर दी गई है। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि औद्योगिक भूमि का उपयोग केवल वास्तविक निवेश और उत्पादन गतिविधियों के लिए हो।



जिन उद्योगपतियों ने जमीन लेकर उसे खाली छोड़ रखा है, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।



वर्ष 2024 से अब तक आठ लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी है और अनेक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। हालांकि इन निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं।



क्या कहते हैं एक्सपर्ट

विशेषज्ञों के अनुसार भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास, पर्यावरणीय मंजूरियां, इन्फ्रास्ट्रक्चर और कुशल श्रमिकों की कमी जैसी समस्याएं कई परियोजनाओं की प्रगति में बाधक बन रही हैं।



यही कारण है कि बड़े निवेश प्रस्तावों के बावजूद अनेक परियोजनाएं अभी तक प्रारंभिक चरण से आगे नहीं बढ़ पाई हैं। राज्य में प्रस्तावित प्रमुख निवेश परियोजनाओं में ऊर्जा, आईटी, डेटा सेंटर की योजनाएं शामिल हैं।



कुछ बड़े निवेश प्रस्तावों की घोषणा के बावजूद कई परियोजनाएं अब भी स्वीकृतियों और प्रक्रियागत अड़चनों में उलझी हुई हैं। दूसरी ओर 219 परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है और वे विभिन्न चरणों में क्रियान्वित की जा रही हैं।



निष्कर्ष

उद्योग विभाग का मानना है कि निष्क्रिय पड़े भूखंडों को वापस लेकर नए निवेशकों को उपलब्ध कराने से औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्य में निवेश का माहौल भी मजबूत होगा। सरकार अब ऐसी भूमि को लंबे समय तक अनुपयोगी छोड़ने की अनुमति नहीं देना चाहती, ताकि औद्योगिक क्षेत्रों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।



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