CSMCL ओवर टाइम घोटाला: कर्मचारियों के नाम पर निकाले करोड़ों, 12 के खिलाफ चालान पेश
Raipur. छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में हुए कथित मैनपावर ओवर टाइम भुगतान घोटाले ने अब बड़ा कानूनी मोड़ ले लिया है। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) ने इस मामले में 12 आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायालय में प्रथम अभियोग पत्र पेश कर दिया है। जांच एजेंसी का दावा है कि कर्मचारियों के नाम पर करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भुगतान निकालकर कमीशनखोरी और निजी लाभ का खेल खेला गया।
182 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी का दावा
EOW की जांच के मुताबिक वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच मेनपावर एजेंसियों को ओवर टाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिवस कार्य भुगतान और सर्विस चार्ज के नाम पर लगभग 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। आरोप है कि यह राशि वास्तविक कर्मचारियों तक पहुंचने के बजाय एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के बीच बंटती रही।
किन-किन पर कसा शिकंजा
प्रथम अभियोग पत्र जिन आरोपियों के खिलाफ पेश किया गया है, उनमें अनवर खान, नवीन मित्तल, नीलाभ सिंह तोमर, रिजवान निर्मिकर, अभिषेक सिंह, नीरज कुमार चौधरी, अवजय लोढ़िया, अजीत द्विवेदी, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, एस. उदय राव और संजीव जैन शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी की भूमिका अलग-अलग स्तर पर भुगतान प्रक्रिया और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी मिली है।
काम करने वालों को नहीं मिला ओवर टाइम
जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि जिन कर्मचारियों के नाम पर ओवर टाइम और बोनस का भुगतान दिखाया गया, उनमें से कई को इसकी जानकारी तक नहीं थी। CSMCL की दुकानों में कार्यरत कर्मचारियों के बयान, कार्यालयीन रिकॉर्ड और एजेंसियों के दस्तावेजों के मिलान में यह सामने आया कि वास्तविक भुगतान कर्मचारियों तक नहीं पहुंचा। यानी सिस्टम में एंट्री मजदूरों की, लेकिन फायदा किसी और का।
भुगतान का पूरा गणित समझिए
जांच एजेंसी ने भुगतान का जो ब्योरा अदालत में रखा है, उसके अनुसार -
- ओवर टाइम भुगतान : लगभग 101.20 करोड़ रुपए
- बोनस भुगतान : लगभग 12.21 करोड़ रुपए
- चार अतिरिक्त दिवस कार्य भुगतान : लगभग 54.46 करोड़ रुपए
- सर्विस चार्ज : लगभग 15.11 करोड़ रुपए
यानी कुल मिलाकर लगभग 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ सरकारी खजाने पर डाला गया।
नकदी ने खोली पूरी परत
मामले में 29 नवंबर 2023 को पकड़ी गई 28.80 लाख रुपए की नकदी को जांच एजेंसी ने अहम कड़ी माना है। जांच में दावा किया गया कि यह रकम इंडल इंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अन्य एजेंसियों से कथित कमीशन के रूप में नीलाभ सिंह तोमर तक पहुंचाई जानी थी। EOW का मानना है कि इसी रकम की ट्रेल ने पूरे भुगतान नेटवर्क और कथित कमीशन व्यवस्था का राज खोला।
अब भी खत्म नहीं हुई जांच
EOW-ACB ने साफ किया (EOW-ACB challan) है कि यह केवल पहला अभियोग पत्र है। मामले में अन्य लोगों की भूमिका, अवैध राशि के उपयोग, निवेश और वित्तीय लेन-देन की जांच अभी जारी है। एजेंसी का कहना है कि जैसे-जैसे नए दस्तावेज और साक्ष्य सामने आएंगे, आगे और कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी सिस्टम पर बड़ा सवाल
यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता भर नहीं, बल्कि सरकारी निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि आखिर चार साल तक करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भुगतान होता रहा और किसी स्तर पर अलार्म क्यों नहीं बजा? क्या विभागीय ऑडिट, वित्तीय परीक्षण और प्रशासनिक निगरानी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई थी? CSMCL का यह कथित ‘ओवर टाइम घोटाला’ अब छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े वित्तीय अनियमितता मामलों में गिना जा रहा है।
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