छत्तीसगढ़ मैनपावर घोटाला: 7 आरोपी गिरफ्तार, 3200 करोड़ के शराब घोटाले से जुड़ा है ये मामला
VINAY VERMA | May 04, 2026, 19:40 IST
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शराब घोटाले से जुड़े मैनपावर घोटाले में ACB-EOW ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह घोटाला CSMCL से जुड़ा है, जिसमें ओवरटाइम भुगतान के नाम पर 100 करोड़ रूपए से ज्यादा का भुगतान किया गया।
Raipur. छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मैनपावर घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो-इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ACB-EOW) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस समय हुई है, जब एजेंसी पहले से ही इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई है।
गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को ACB-EOW की विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें 11 मई तक कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस घोटाले की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा।
दरअसल, यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) से जुड़ा हुआ है, जहां मैनपावर और प्लेसमेंट एजेंसियों के जरिए ओवरटाइम भुगतान के नाम पर बड़ा घोटाला किया गया। ACB-EOW ने इस मामले में पहले ही FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
जांच में सामने आया है कि साल 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम भत्ते के नाम पर 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि का भुगतान किया गया। आरोप है कि यह भुगतान वास्तविक जरूरत के बिना और फर्जी तरीके से किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, इस पूरे घोटाले में CSMCL के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोप है कि अधिकारियों ने मैनपावर एजेंसियों के साथ मिलकर एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा, जिसके तहत ओवरटाइम के नाम पर अवैध भुगतान किया गया।
सूत्रों की मानें तो कई मामलों में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और काम के घंटों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं था, फिर भी भुगतान जारी किया गया। इससे यह संदेह और मजबूत होता है कि पूरा मामला फर्जी बिलिंग और कागजी हेरफेर के जरिए अंजाम दिया गया।
ACB-EOW की टीम अब इस मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं, क्योंकि पूछताछ में लगातार नए नाम सामने आ रहे हैं। इस कार्रवाई को शराब घोटाले की जांच में एक अहम कड़ी माना जा रहा है। इससे पहले भी इस मामले में कई बड़े नामों पर शिकंजा कस चुका है और अब मैनपावर घोटाले के जरिए इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश तेज हो गई है।
100 करोड़ से ज्यादा के इस घोटाले ने एक बार फिर सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर बिना ठोस सत्यापन के इतनी बड़ी राशि का भुगतान कैसे हो गया? क्या सिस्टम में निगरानी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है, या फिर यह सब मिलीभगत से हुआ?
फिलहाल, सभी की नजर ACB-EOW की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच एजेंसी इस मामले में और किन-किन बड़े नामों तक पहुंचती है और क्या इस घोटाले के मास्टरमाइंड तक पहुंच पाती है या नहीं। मैनपावर घोटाला
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गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों को ACB-EOW की विशेष कोर्ट में पेश किया गया, जहां से कोर्ट ने उन्हें 11 मई तक कस्टोडियल रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस घोटाले की जड़ तक पहुंचा जा सकेगा।
ओवरटाइम के नाम पर करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया है कि साल 2019-20 से 2023-24 के बीच ओवरटाइम भत्ते के नाम पर 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि का भुगतान किया गया। आरोप है कि यह भुगतान वास्तविक जरूरत के बिना और फर्जी तरीके से किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।
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अधिकारियों और एजेंसियों की मिलीभगत
सूत्रों की मानें तो कई मामलों में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और काम के घंटों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं था, फिर भी भुगतान जारी किया गया। इससे यह संदेह और मजबूत होता है कि पूरा मामला फर्जी बिलिंग और कागजी हेरफेर के जरिए अंजाम दिया गया।
जांच का दायरा बढ़ेगा, और गिरफ्तारियां संभव
सवालों के घेरे में सिस्टम
फिलहाल, सभी की नजर ACB-EOW की आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच एजेंसी इस मामले में और किन-किन बड़े नामों तक पहुंचती है और क्या इस घोटाले के मास्टरमाइंड तक पहुंच पाती है या नहीं। मैनपावर घोटाला
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