CSMCL Overtime Scam : तीन IAS के नाम, समन से पहले बचाव की तैयारी

VINAY VERMA | Jun 04, 2026, 15:14 IST
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छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (CSMCL) में 2019 से 2024 के बीच मैनपावर एजेंसियों को 183 करोड़ रुपए का फर्जी ओवरटाइम भुगतान किया गया, जिसकी जांच अब तीन पूर्व IAS प्रबंध निदेशकों तक पहुंच गई है।

छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (CSMCL) के कथित 183 करोड़ रुपए के ओवरटाइम भुगतान घोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। एसीबी-ईओडब्ल्यू की चार्जशीट में दावा किया गया है कि वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच मैनपावर एजेंसियों को 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया। खास बात यह है कि यह भुगतान अलग-अलग समय में पदस्थ रहे तीन आईएएस अधिकारियों के कार्यकाल में जारी हुआ।



तीन IAS पर जांच की नजर

जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार निगम में कई बार प्रबंध निदेशक बदले गए। अरुणपति त्रिपाठी की गिरफ्तारी के बाद राकेश मंडावी, जनक प्रसाद पाठक और महादेव कावरे को एमडी बनाया गया। बावजूद इसके भुगतान की प्रक्रिया नहीं बदली। चार्जशीट में दावा है कि अतिरिक्त भुगतान लगातार जारी रहा। ऐसे में अब जांच का दायरा पूर्व एमडी रहे अधिकारियों तक पहुंच सकता है।



कोर्ट से पहले तैयार किए जा रहे जवाब

सूत्रों के मुताबिक संभावित पूछताछ और अदालत से समन की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने अपना पक्ष तैयार करना शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि वे केवल साइनिंग अथॉरिटी थे। भुगतान संबंधी फाइलें कई स्तरों की जांच और अनुमोदन के बाद उनके पास पहुंचती थीं। अंतिम हस्ताक्षर उनकी जिम्मेदारी जरूर थी, लेकिन पूरी प्रक्रिया उनके नियंत्रण में नहीं थी।



महादेव कांवरे का दावा- दो बार ही किया हस्ताक्षर

सबसे लंबे समय तक सीएसएमसीएल के एमडी रहे महादेव कांवरे का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि भुगतान की फाइलें जिला स्तर से तैयार होकर वित्त और अन्य शाखाओं की प्रक्रिया पूरी करने के बाद एमडी कार्यालय तक पहुंचती थीं। बैंक भुगतान एमडी के हस्ताक्षर से होता था, इसलिए हस्ताक्षर करना औपचारिक जिम्मेदारी थी। उनका दावा है कि वेतन भुगतान से जुड़ी फाइलों पर उन्होंने शायद केवल दो बार ही हस्ताक्षर किए होंगे।



16 दिन में कंपनी समझना ही मुश्किल था

पूर्व एमडी और आईएएस अधिकारी जनक प्रसाद पाठक का कहना है कि उनका कार्यकाल केवल 16 दिनों का था। उनके अनुसार इतना समय तो निगम की कार्यप्रणाली समझने में ही निकल गया। ऐसे में किसी बड़े वित्तीय निर्णय या भुगतान प्रक्रिया में उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं होगा।



भाजपा सरकार में भी जारी रहे भुगतान

जानकारी के अनुसार विधानसभा चुनाव के दौरान जब महादेव कांवरे एमडी थे, उसी अवधि में सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा सरकार के समय आर. संगीता को निगम की जिम्मेदारी मिली। बताया जा रहा है कि कथित अनियमित भुगतान की जानकारी सामने आने के बाद पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई थी। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर वर्षों तक यह व्यवस्था बिना आपत्ति के कैसे चलती रही।



28.80 लाख ने बदली जांच की दिशा

मामले में बड़ा मोड़ 29 नवंबर 2023 को आया। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कार्रवाई करते हुए 28.80 लाख रुपए नकद जब्त किए। इसी बरामदगी के बाद जांच एजेंसियों का फोकस ओवरटाइम भुगतान और नकद लेन-देन के संभावित संबंधों पर गया। इसके बाद पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं।



अफसरों तक पहुंचने वाली थी रकम?

जांच एजेंसी का दावा है कि जब्त राशि में से 60 हजार रुपए कार्यालय खर्च के लिए अलग रखे गए थे। शेष रकम कथित तौर पर निगम से जुड़े कुछ अधिकारियों तक पहुंचाई जानी थी। हालांकि लाभांडी क्षेत्र में रकम पहुंचने से पहले ही ईडी ने कार्रवाई कर नकदी जब्त कर ली। यही दावा अब जांच का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है।



फर्जी ओवरटाइम और बोनस के आरोप

एसीबी-ईओडब्ल्यू ने जांच के दौरान कर्मचारियों, अधिकारियों और एजेंसी प्रतिनिधियों के बयान दर्ज किए हैं। इन बयानों के आधार पर दावा किया गया है कि वर्ष 2019 से फर्जी ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त कार्य दिवसों के दावे तैयार किए जा रहे थे। कई मामलों में कर्मचारियों तक वास्तविक राशि नहीं पहुंची, लेकिन एजेंसियों को भुगतान जारी होता रहा।



2019 के टेंडर के बाद बदली पूरी व्यवस्था

जांच रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2017 में सरकार ने शराब दुकानों का संचालन अपने नियंत्रण में लिया था। शुरुआती व्यवस्था में एजेंसियों को केवल वेतन, पीएफ, ईएसआईसी और सेवा शुल्क का भुगतान किया जाता था। लेकिन अगस्त 2019 में नए टेंडर के बाद नियमों में बदलाव हुआ। एजेंसियों को लंबी अवधि तक काम देने और अतिरिक्त विस्तार की व्यवस्था जोड़ी गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि इसी के बाद ओवरटाइम भुगतान का ग्राफ तेजी से बढ़ा।



शराब घोटाले से आगे बढ़ा मामला

यह मामला अब केवल चर्चित शराब घोटाले तक सीमित नहीं रह गया है। जांच एजेंसियां सरकारी शराब दुकानों के संचालन, मैनपावर प्रबंधन और वित्तीय भुगतान प्रणाली में व्यापक अनियमितताओं की पड़ताल कर रही हैं। 183 करोड़ रुपए के कथित अतिरिक्त भुगतान ने प्रशासनिक जवाबदेही, निगरानी व्यवस्था और अफसरों की भूमिका को लेकर कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर अदालत की अगली सुनवाई और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी है।



FAQ

  1. CSMCL का पूरा नाम क्या है और यह किस राज्य से संबंधित है?
    उत्तर: CSMCL का पूरा नाम छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (Chhattisgarh State Marketing Corporation Limited) है। यह छत्तीसगढ़ सरकार का उपक्रम है जो राज्य में शराब के विपणन और दुकानों के संचालन का जिम्मा संभालता है।
  2. ओवरटाइम घोटाला कुल कितने करोड़ रुपये का है?
    उत्तर: यह घोटाला लगभग 183 करोड़ रुपये (सटीक आंकड़ा: 182.98 करोड़ रुपये) का है।
  3. CSMCL की भुगतान व्यवस्था में मुख्य बदलाव कब और क्यों आया?
    उत्तर: अगस्त 2019 में नए टेंडर के बाद नियमों में बदलाव किया गया। इसके तहत मैनपावर एजेंसियों को लंबी अवधि का काम और अतिरिक्त विस्तार (Extension) देने की व्यवस्था जोड़ी गई, जिसके बाद ओवरटाइम का ग्राफ तेजी से बढ़ा।

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