साइबर फ्रॉड में फ्रीज बैंक खातों पर बड़ी राहत: 90 दिनों में हट सकती है रोक, बैंकों को प्रक्रिया शुरू करने का मिला अधिकार
रायपुर। नई व्यवस्था में 90 दिन की अवधि अहम होगी। साइबर ठगी की शिकायत के बाद किसी खाते पर रोक लगाई गई है और 90 दिनों के भीतर उसे जारी रखने का वैध निर्देश नहीं मिलता है तो बैंक आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। रोक हटाने से पहले संबंधित जांच एजेंसी को सूचना भी देनी होगी। अदालत का कोई आदेश होने पर बैंक अपने स्तर पर रोक नहीं हटा सकेगा।
छोटे कारोबारियों को मिल सकती है राहत
इस व्यवस्था से सबसे ज्यादा राहत छोटे कारोबारियों और सामान्य खाताधारकों को मिल सकती है। साइबर ठगी के कई मामलों में ऐसे लोगों के खाते भी फ्रीज हो जाते हैं जिनका अपराध से सीधा संबंध नहीं होता।
उदाहरण के लिए कोई व्यक्ति पान दुकान या सब्जी विक्रेता को यूपीआई से 10 या 20 रुपए देता है। बाद में पता चलता है कि भुगतान करने वाले व्यक्ति के खाते से संदिग्ध रकम का लेनदेन हुआ था। जांच के दौरान उस रकम की पूरी कड़ी देखी जाती है। ऐसी स्थिति में भुगतान पाने वाले छोटे दुकानदार का खाता भी जांच के दायरे में आ सकता है।
पुलिस लेनदेन की कड़ी में लेयर-1 से लेयर-6 तक के खातों की जांच कर सकती है। इसी कारण कई ऐसे बैंक खातों पर भी रोक लग जाती है जिनके धारकों को मूल साइबर ठगी की जानकारी तक नहीं होती।
खाता फ्रीज होने से रुक जाता है पूरा काम
छोटे व्यापारियों के लिए बैंक खाता बंद होना बड़ी परेशानी बन जाता है। उसी खाते से दुकान का लेनदेन चलता है। कई लोगों के इसी खाते में रोज की कमाई आती है। खाता फ्रीज होने पर वे अपनी दूसरी रकम भी इस्तेमाल नहीं कर पाते।
वेतन खातों में भी ऐसी परेशानी सामने आती है। खाता लंबे समय तक फ्रीज रहने पर कर्मचारी वेतन की रकम नहीं निकाल पाते। पहले खाते से रोक हटवाने के लिए संबंधित व्यक्ति को बैंक के साथ पुलिस और साइबर सेल से संपर्क करना पड़ता था। कई मामलों में यह प्रक्रिया महीनों तक चलती थी।
90 दिन का नियम कैसे काम करेगा
खाताधारक अपने बैंक में लिखित शिकायत दे सकता है। वह बैंक से खाता फ्रीज करने का आधार और रोक हटाने की प्रक्रिया पूछ सकता है। बैंक इस शिकायत को अपनी तय शिकायत निवारण व्यवस्था के तहत दर्ज करेगा।
इसके बाद 90 दिनों की अवधि महत्वपूर्ण होगी। इस दौरान खाते पर रोक जारी रखने या उसे हटाने से संबंधित वैध निर्देश का इंतजार किया जाएगा। यदि तय समय में ऐसा निर्देश नहीं मिलता है तो बैंक निर्धारित प्रक्रिया के तहत रोक हटाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है।
90 दिन पूरे होने से कम से कम 15 दिन पहले संबंधित जांच एजेंसी को सूचना देने का प्रावधान है। इससे जांच एजेंसी को यह बताने का मौका मिलेगा कि खाते पर रोक आगे भी जरूरी है या नहीं।
पूरी रकम रोकने पर भी उठे सवाल
साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी के मुताबिक साइबर ठगी के मामलों में विवादित रकम और खाते में मौजूद दूसरी रकम के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। किसी खास लेनदेन पर विवाद होने की स्थिति में संबंधित रकम रोककर बाकी राशि के इस्तेमाल की अनुमति देने का सवाल उठता है।
अदालत ने भी संबंधित परिस्थितियों में विवादित रकम को रोककर बाकी अविवादित राशि के इस्तेमाल की अनुमति देने के सिद्धांत पर जोर दिया है। इससे ऐसे लोगों को राहत मिल सकती है जिनके खाते में संदिग्ध लेनदेन की रकम बहुत कम है लेकिन पूरा खाता फ्रीज हो गया है।
90 रुपए के भुगतान पर खाता हुआ ब्लॉक
रायपुर के गोलबाजार के कारोबारी देव कुमार के साथ ऐसी ही स्थिति सामने आई। उनकी दुकान से एक ग्राहक ने सामान खरीदा और यूपीआई से 90 रुपए दिए। इसके करीब 24 घंटे के भीतर उनका बैंक खाता ब्लॉक हो गया।
इसी खाते से उनका कारोबार चलता था। खाता बंद होने के कारण रोज के लेनदेन पर असर पड़ा। करीब तीन महीने तक अलग-अलग जगह संपर्क करने के बाद उनका खाता दोबारा खुल पाया।
पांच महीने से वेतन खाते पर रोक
खमतराई के पंडित शंकर कुमार का मामला अलग है। उनके खाते से एपीके फाइल के जरिए 76 हजार रुपए निकाल लिए गए। घटना के बाद उन्होंने अपना वेतन खाता ब्लॉक कराया।
मई में बंद कराया गया खाता अक्टूबर तक नहीं खुला। इसके कारण करीब पांच महीने से उनके वेतन की रकम भी अटकी हुई है। यह मामला बताता है कि लंबे समय तक खाता ब्लॉक रहने से पीड़ित को भी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ सकती है।
कोर्ट का आदेश हुआ तो जारी रहेगी रोक
नई प्रक्रिया का मतलब यह नहीं है कि हर फ्रीज बैंक खाता 90 दिन पूरे होते ही अपने आप खुल जाएगा। बैंक को निर्धारित प्रक्रिया और शर्तों का पालन करना होगा। जांच एजेंसी का वैध निर्देश या अदालत का आदेश होने पर रोक जारी रह सकती है।
साइबर क्राइम प्रभारी सतीश गहरवार के मुताबिक एमआरएम और जीएमआर पोर्टल के जरिए पीड़ितों की रकम वापस करने की प्रक्रिया चल रही है। जिन खातों को लेकर अदालत का कोई निर्देश नहीं है उन्हें अनफ्रीज करने की प्रक्रिया भी इसी माध्यम से की जा रही है।
नई व्यवस्था का मुख्य फायदा उन खाताधारकों को हो सकता है जिनका खाता किसी संदिग्ध लेनदेन की कड़ी में फ्रीज हुआ है। अब ऐसे मामलों में बैंक के पास तय प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई करने का रास्ता रहेगा।
FAQ - अक्सर पूछे जानें वाले सवाल
- 90 दिन की अवधि का नया नियम कैसे काम करेगा?
खाताधारक अपने बैंक में लिखित शिकायत देकर खाता फ्रीज करने का आधार और उसकी रोक हटाने की प्रक्रिया पूछ सकते हैं। 90 दिन के भीतर वैध निर्देश नहीं मिलने पर बैंक रोक हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। - अगर मेरा बैंक खाता साइबर ठगी के मामले में फ्रीज हो जाए तो मुझे क्या करना चाहिए?
आपको संबंधित बैंक, पुलिस और साइबर सेल से संपर्क करना चाहिए और अपने खाते की स्थिति के बारे में जानकारी मांगनी चाहिए। - क्या सभी फ्रीज खातों पर 90 दिन बाद स्वतः रोक हट जाएगी?
नहीं, 90 दिन पूरे होने के बाद भी रोक हटाने के लिए बैंक को निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा और जांच एजेंसी या अदालत से वैध निर्देश की जरूरत होगी।