छत्तीसगढ़ में सरकारी भर्ती का बदलेगा सिस्टम : पटवारी से प्यून तक अब परीक्षा से चयन की तैयारी
Umeshwari Baghel | Oct 04, 2026, 10:23 IST
छत्तीसगढ़ में अब हर सरकारी नौकरी के लिए देनी होगी परीक्षा
छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य के अलग-अलग विभागों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पद अब विभाग अपने स्तर पर भरने की बजाय कर्मचारी चयन मंडल के जरिए भरेंगे। इसके लिए कई विभाग भर्ती नियमों में बदलाव कर चुके हैं। कुछ विभागों में संशोधन की प्रक्रिया अभी जारी है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद पटवारी से लेकर सहायक ग्रेड-3 तक की भर्ती परीक्षा के जरिए होगी। वाहन चालक और भृत्य जैसे पद भी इसी दायरे में आएंगे। चौकीदार और माली जैसे पदों के लिए भी उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया से गुजरना होगा।
सरकार का जोर अलग-अलग विभागों की भर्ती को एक व्यवस्था के तहत लाने पर है। इसका मकसद भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। साथ ही उन शिकायतों को कम करना है जो विभागीय स्तर पर होने वाली सीधी भर्ती को लेकर लंबे समय से सामने आती रही हैं।
अब तक कई सरकारी विभाग अपने यहां खाली तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पदों के लिए अलग-अलग भर्ती प्रक्रिया चलाते थे। विभाग विज्ञापन जारी करने से लेकर उम्मीदवारों के चयन तक की प्रक्रिया खुद पूरी करते थे।
नई व्यवस्था में इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे सीमित किया जा रहा है। कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से लिखित परीक्षा कराने पर जोर दिया गया है। भर्ती नियमों में इसी अनुसार संशोधन किए जा रहे हैं।
इस बदलाव का असर बड़ी संख्या में सरकारी पदों पर पड़ेगा। खास बात यह है कि केवल लिपिकीय या प्रशासनिक पद ही इसके दायरे में नहीं होंगे। छोटे पदों पर नियुक्ति के लिए भी एक तय परीक्षा और चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
राज्य के कई बड़े विभागों के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पद नई व्यवस्था में शामिल किए गए हैं। इनमें सामान्य प्रशासन और गृह विभाग शामिल हैं। पुलिस और वन विभाग से जुड़े पदों को भी परीक्षा आधारित भर्ती के दायरे में लाया जा रहा है।
जेल विभाग और जल संसाधन विभाग के पद भी इसमें शामिल होंगे। आदिम जाति विकास और समाज कल्याण विभाग भी नई व्यवस्था का हिस्सा होंगे। कृषि और उद्यानिकी विभाग के कई पद भी कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से भरे जाएंगे।
इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग में भी भर्ती प्रक्रिया बदलेगी। श्रम और सहकारिता विभाग के पद परीक्षा के माध्यम से भरे जाएंगे। राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण पद भी इसी व्यवस्था में आएंगे।
ऊर्जा और मत्स्य विभाग के पदों को भी नई प्रक्रिया में शामिल किया गया है। मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग के साथ कुछ निगमों और सहकारी संस्थाओं के पद भी कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षा व्यवस्था से जोड़े जा रहे हैं।
नई भर्ती व्यवस्था में सबसे ज्यादा ध्यान प्रशासन और राजस्व से जुड़े पदों पर रहेगा। स्नातक स्तर के कई पद परीक्षा के माध्यम से भरे जाएंगे।
इनमें राजस्व निरीक्षक और पटवारी जैसे पद शामिल हैं। अमीन और खाद्य निरीक्षक जैसे पद भी इसी श्रेणी में आते हैं। श्रम निरीक्षक और सहकारिता निरीक्षक की भर्ती भी कर्मचारी चयन मंडल से कराई जा सकती है।
इसके अलावा सहायक प्रबंधक और कनिष्ठ रोजगार अधिकारी जैसे पदों को भी शामिल किया गया है। सहायक सांख्यिकी अधिकारी और सहायक प्रोग्रामर के पद भी परीक्षा के माध्यम से भरे जाएंगे।
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जैसे पद भी इसी व्यवस्था में शामिल किए गए हैं। इसका मतलब है कि स्नातक स्तर पर होने वाली कई सरकारी भर्तियों के लिए उम्मीदवारों को एक व्यवस्थित प्रतियोगी परीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।
कार्यालयों में काम करने वाले लिपिकीय पद भी नई भर्ती प्रणाली से बाहर नहीं रहेंगे। सहायक ग्रेड-3 के पद कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षा से भरे जाएंगे। स्टेनो टाइपिस्ट और डेटा एंट्री ऑपरेटर के पद भी इसी व्यवस्था में आएंगे। पंजीयन लिपिक जैसे पदों के लिए भी परीक्षा आयोजित की जाएगी।
सरकारी कार्यालयों में इन पदों की संख्या काफी अधिक होती है। इसलिए नई व्यवस्था लागू होने पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में शामिल होने का मौका मिलेगा।
इस नई व्यवस्था की सबसे अहम बात चतुर्थ श्रेणी के पद हैं। पहले कई विभाग इन पदों की भर्ती अपने स्तर पर करते थे। अब ऐसे पदों के लिए भी परीक्षा आधारित चयन को प्राथमिकता दी जाएगी।
वाहन चालक और भृत्य के पद इसमें शामिल हैं। चौकीदार और स्वीपर की भर्ती भी कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से हो सकती है। माली और हमाल जैसे पद भी इसी व्यवस्था में रखे गए हैं।
वार्ड बॉय और आया के पद भी नई भर्ती प्रणाली का हिस्सा होंगे। केयरटेकर और रसोइया जैसे पदों को भी परीक्षा के दायरे में रखा गया है।
मत्स्य जमादार और वाटरमैन जैसे पद भी इसी समूह में शामिल किए गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि अब सरकारी नौकरी के सबसे निचले स्तर तक भी केंद्रीकृत चयन प्रणाली लागू करने की तैयारी है।
कर्मचारी चयन मंडल ने अलग-अलग पदों को सात समूहों में बांटा है। पदों का वर्गीकरण शैक्षणिक योग्यता और काम की प्रकृति के आधार पर किया गया है।
एक समूह में अभियांत्रिकी सेवाओं से जुड़े पद रखे गए हैं। इनमें उप अभियंता जैसे पद शामिल हैं। दूसरे समूहों में स्नातक और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के तकनीकी और प्रशासनिक पदों को जगह दी गई है।
कार्यालयीन और आशुलिपिक पदों के लिए अलग समूह बनाया गया है। शैक्षणिक सेवाओं के पदों को भी अलग श्रेणी में रखा गया है।
वर्दीधारी सेवाओं के लिए अलग समूह तय किया गया है। विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा के पदों को भी अलग वर्ग में रखा गया है। हाईस्कूल और तकनीकी योग्यता वाले पद सातवें स्तर तक अलग-अलग समूहों में रखे गए हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं में भी कई महत्वपूर्ण पद इस केंद्रीकृत भर्ती प्रणाली में शामिल किए गए हैं। इनमें स्टाफ नर्स का पद प्रमुख है।
ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और लैब तकनीशियन के पद भी परीक्षा के जरिए भरे जाएंगे। फार्मासिस्ट और दूसरे तकनीकी पद भी कर्मचारी चयन मंडल की चयन प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। इससे अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाली भर्ती को एक तय प्रक्रिया के तहत लाने की कोशिश होगी।
कर्मचारी चयन मंडल ने वर्ष 2027 में होने वाली कई परीक्षाओं का कैलेंडर जारी किया है। इसमें अलग-अलग सरकारी विभागों की भर्ती परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है।
इससे साफ है कि अगले साल से केंद्रीकृत भर्ती व्यवस्था का दायरा और बढ़ सकता है। जिन विभागों के भर्ती नियमों में संशोधन पूरा हो जाएगा वहां पदों की मांग कर्मचारी चयन मंडल को भेजी जा सकेगी।
इसके बाद मंडल विज्ञापन जारी कर परीक्षा आयोजित करेगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल उम्मीदवारों को संबंधित विभागों में नियुक्ति दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ में विभागीय स्तर पर होने वाली तृतीय और चतुर्थ श्रेणी भर्तियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर चयन में पक्षपात के आरोप लगे।
कुछ मामलों में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर विवाद भी हुए। बिना बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के चयन किए जाने पर सवाल उठाए गए। केवल इंटरव्यू या सीमित चयन प्रक्रिया के जरिए नियुक्तियों को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं।
इन्हीं विवादों के बाद सरकार भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा केंद्रीकृत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
नई व्यवस्था लागू होने का सबसे बड़ा असर सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं पर होगा। अब उम्मीदवारों को अलग-अलग विभागों की चयन प्रक्रिया के बजाय कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं पर ज्यादा ध्यान देना होगा।
भर्ती की जानकारी भी एक तय मंच के जरिए मिलने की संभावना बढ़ेगी। परीक्षा का पैटर्न और चयन के नियम पहले से ज्यादा व्यवस्थित हो सकते हैं।
वहीं विभागों के लिए भी अपने स्तर पर पूरी भर्ती प्रक्रिया चलाने की जरूरत कम होगी। खाली पदों की जानकारी कर्मचारी चयन मंडलको भेजी जाएगी और परीक्षा के माध्यम से उम्मीदवार चुने जाएंगे।
कुल मिलाकर राज्य सरकार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्ती को विभागीय प्रक्रिया से निकालकर परीक्षा आधारित केंद्रीकृत व्यवस्था की ओर ले जा रही है। नियमों में बदलाव पूरा होने के बाद पटवारी और बाबू से लेकर ड्राइवर और प्यून तक बड़ी संख्या में सरकारी पद कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षा के जरिए भरे जा सकेंगे।
सरकार का जोर अलग-अलग विभागों की भर्ती को एक व्यवस्था के तहत लाने पर है। इसका मकसद भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है। साथ ही उन शिकायतों को कम करना है जो विभागीय स्तर पर होने वाली सीधी भर्ती को लेकर लंबे समय से सामने आती रही हैं।
विभाग अपने स्तर पर नहीं करेंगे ज्यादातर भर्तियां
नई व्यवस्था में इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे सीमित किया जा रहा है। कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से लिखित परीक्षा कराने पर जोर दिया गया है। भर्ती नियमों में इसी अनुसार संशोधन किए जा रहे हैं।
इस बदलाव का असर बड़ी संख्या में सरकारी पदों पर पड़ेगा। खास बात यह है कि केवल लिपिकीय या प्रशासनिक पद ही इसके दायरे में नहीं होंगे। छोटे पदों पर नियुक्ति के लिए भी एक तय परीक्षा और चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इन विभागों की भर्तियां भी आएंगी दायरे में
जेल विभाग और जल संसाधन विभाग के पद भी इसमें शामिल होंगे। आदिम जाति विकास और समाज कल्याण विभाग भी नई व्यवस्था का हिस्सा होंगे। कृषि और उद्यानिकी विभाग के कई पद भी कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से भरे जाएंगे।
इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग में भी भर्ती प्रक्रिया बदलेगी। श्रम और सहकारिता विभाग के पद परीक्षा के माध्यम से भरे जाएंगे। राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण पद भी इसी व्यवस्था में आएंगे।
ऊर्जा और मत्स्य विभाग के पदों को भी नई प्रक्रिया में शामिल किया गया है। मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग के साथ कुछ निगमों और सहकारी संस्थाओं के पद भी कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षा व्यवस्था से जोड़े जा रहे हैं।
पटवारी और राजस्व निरीक्षक भी इसी व्यवस्था में
इनमें राजस्व निरीक्षक और पटवारी जैसे पद शामिल हैं। अमीन और खाद्य निरीक्षक जैसे पद भी इसी श्रेणी में आते हैं। श्रम निरीक्षक और सहकारिता निरीक्षक की भर्ती भी कर्मचारी चयन मंडल से कराई जा सकती है।
इसके अलावा सहायक प्रबंधक और कनिष्ठ रोजगार अधिकारी जैसे पदों को भी शामिल किया गया है। सहायक सांख्यिकी अधिकारी और सहायक प्रोग्रामर के पद भी परीक्षा के माध्यम से भरे जाएंगे।
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जैसे पद भी इसी व्यवस्था में शामिल किए गए हैं। इसका मतलब है कि स्नातक स्तर पर होने वाली कई सरकारी भर्तियों के लिए उम्मीदवारों को एक व्यवस्थित प्रतियोगी परीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।
बाबू और डेटा एंट्री ऑपरेटर भी परीक्षा के दायरे में
सरकारी कार्यालयों में इन पदों की संख्या काफी अधिक होती है। इसलिए नई व्यवस्था लागू होने पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में शामिल होने का मौका मिलेगा।
ड्राइवर से माली तक के पद भी होंगे शामिल
वाहन चालक और भृत्य के पद इसमें शामिल हैं। चौकीदार और स्वीपर की भर्ती भी कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से हो सकती है। माली और हमाल जैसे पद भी इसी व्यवस्था में रखे गए हैं।
वार्ड बॉय और आया के पद भी नई भर्ती प्रणाली का हिस्सा होंगे। केयरटेकर और रसोइया जैसे पदों को भी परीक्षा के दायरे में रखा गया है।
मत्स्य जमादार और वाटरमैन जैसे पद भी इसी समूह में शामिल किए गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि अब सरकारी नौकरी के सबसे निचले स्तर तक भी केंद्रीकृत चयन प्रणाली लागू करने की तैयारी है।
सात समूहों में बांटे गए सरकारी पद
एक समूह में अभियांत्रिकी सेवाओं से जुड़े पद रखे गए हैं। इनमें उप अभियंता जैसे पद शामिल हैं। दूसरे समूहों में स्नातक और पोस्ट ग्रेजुएट स्तर के तकनीकी और प्रशासनिक पदों को जगह दी गई है।
कार्यालयीन और आशुलिपिक पदों के लिए अलग समूह बनाया गया है। शैक्षणिक सेवाओं के पदों को भी अलग श्रेणी में रखा गया है।
वर्दीधारी सेवाओं के लिए अलग समूह तय किया गया है। विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा के पदों को भी अलग वर्ग में रखा गया है। हाईस्कूल और तकनीकी योग्यता वाले पद सातवें स्तर तक अलग-अलग समूहों में रखे गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की भर्तियां भी नई प्रक्रिया से
ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और लैब तकनीशियन के पद भी परीक्षा के जरिए भरे जाएंगे। फार्मासिस्ट और दूसरे तकनीकी पद भी कर्मचारी चयन मंडल की चयन प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। इससे अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाली भर्ती को एक तय प्रक्रिया के तहत लाने की कोशिश होगी।
2027 के परीक्षा कैलेंडर में भी संकेत
इससे साफ है कि अगले साल से केंद्रीकृत भर्ती व्यवस्था का दायरा और बढ़ सकता है। जिन विभागों के भर्ती नियमों में संशोधन पूरा हो जाएगा वहां पदों की मांग कर्मचारी चयन मंडल को भेजी जा सकेगी।
इसके बाद मंडल विज्ञापन जारी कर परीक्षा आयोजित करेगा। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सफल उम्मीदवारों को संबंधित विभागों में नियुक्ति दी जाएगी।
बैकडोर भर्ती के आरोपों के बाद बदलाव
कुछ मामलों में भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर विवाद भी हुए। बिना बड़ी प्रतियोगी परीक्षा के चयन किए जाने पर सवाल उठाए गए। केवल इंटरव्यू या सीमित चयन प्रक्रिया के जरिए नियुक्तियों को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं।
इन्हीं विवादों के बाद सरकार भर्ती प्रक्रिया को ज्यादा केंद्रीकृत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
युवाओं के लिए क्या बदलेगा
भर्ती की जानकारी भी एक तय मंच के जरिए मिलने की संभावना बढ़ेगी। परीक्षा का पैटर्न और चयन के नियम पहले से ज्यादा व्यवस्थित हो सकते हैं।
वहीं विभागों के लिए भी अपने स्तर पर पूरी भर्ती प्रक्रिया चलाने की जरूरत कम होगी। खाली पदों की जानकारी कर्मचारी चयन मंडलको भेजी जाएगी और परीक्षा के माध्यम से उम्मीदवार चुने जाएंगे।
कुल मिलाकर राज्य सरकार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भर्ती को विभागीय प्रक्रिया से निकालकर परीक्षा आधारित केंद्रीकृत व्यवस्था की ओर ले जा रही है। नियमों में बदलाव पूरा होने के बाद पटवारी और बाबू से लेकर ड्राइवर और प्यून तक बड़ी संख्या में सरकारी पद कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षा के जरिए भरे जा सकेंगे।
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