छत्तीसगढ़ के दाल भात केंद्र बंद होने से डेढ़ लाख गरीबों का निवाला छिना
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ के रायपुर में गरीबों के लिए बने 14 से ज्यादा दाल-भात केंद्र बंद हैं।
- इन केंद्रों पर गरीबों को सिर्फ 5 रुपए में भरपेट खाना मिलता था।
- पिछले 7 सालों से इन सभी केंद्रों पर ताले लटके पड़े हैं।
- अब हर महीने करीब डेढ़ लाख मजदूरों को महंगा खाना खरीदना पड़ता है।
- सरकारी अनदेखी के कारण गरीब और दिहाड़ी मजदूर काफी परेशान हो रहे हैं।
दाल-भात केंद्र बंद
गरीबों का पेट भरने वाली एक बड़ी योजना अब दम तोड़ चुकी है। रायपुर जिले में चल रहे 14 से अधिक दाल-भात केंद्र बंद पड़े हैं। बीते सात सालों से इन केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। एक समय था जब यहां गरीबों को सस्ता खाना मिलता था। महज 5 रुपए में दाल, चावल, सब्जी और रोटी दी जाती थी। लेकिन अब यह पूरी सुविधा खत्म हो चुकी है।
मजदूरों की बढ़ी मुश्किलें
इस योजना का सबसे बड़ा सहारा गरीब मजदूर वर्ग था। रिक्शा चालक और दिहाड़ी मजदूर रोजाना यहां आते थे। फुटपाथ पर रहने वाले और बुजुर्ग भी इस पर निर्भर थे। अब केंद्र बंद होने से उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। मजबूरन उन्हें 40 से 50 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। वे होटल से महंगा खाना खरीदने को मजबूर हैं।
गायब हो गए दाल भात केंद्र
रायपुर शहर की जमीनी पड़ताल में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में जहां केंद्र था, वहां अब सेवा सेतु चल रहा है। रेलवे स्टेशन चौक के केंद्र पर एक लॉ एसोसिएशन का पोस्टर लगा है। तेलघानी नाका में ब्रिज के नीचे अब एक ट्रांसपोर्ट कंपनी खुल गई है। राठौर चौक के केंद्र की जगह अब हमर अस्पताल बन चुका है।
बंद होने की नहीं मिली जानकारी
स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र अचानक बंद कर दिए गए। इसके लिए कोई भी आधिकारिक सूचना जारी नहीं की गई थी। एक दिन अचानक दरवाजों पर ताले लटका दिए गए। उसके बाद से ये केंद्र कभी दोबारा नहीं खुल सके।
शासन काल में योजना हुई बंद
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह योजना पहले ही बंद हो गई थी। कांग्रेस (Congress) शासन काल के समय से ही केंद्र बंद हैं। वर्तमान में जेल रोड पर चल रहा केंद्र निजी हाथों में है। सरकारी मदद से चलने वाले बाकी सभी केंद्र बंद हो चुके हैं। इन्हें दोबारा शुरू करने पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।
हर महीने करीब डेढ़ लाख लोगों को भोजन दिया जाता था। खाद्य विभाग इसके लिए राशन का आवंटन करता था। केंद्रों को चावल, दाल, नमक और चना दिया जाता था। अब आवंटन रुकने से योजना पूरी तरह ठप है।
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