एलोपैथी मेडिकल कॉलेज की समिति में एलोपैथी डॉक्टर गायब, फार्मासिस्ट बने चिकित्सक
स्वास्थ्य विभाग के एक शासकीय पत्र ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला दंतेवाड़ा के नवीन शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्वशासी समिति का है। हैरानी की बात यह है कि एलोपैथी मेडिकल कॉलेज की समिति में एक भी एलोपैथी डॉक्टर को जगह नहीं मिली। इतना ही नहीं, दो फार्मासिस्ट और एक आयुर्वेद चिकित्सक को चिकित्सक सदस्य बनाकर नाम प्रस्तावित कर दिए गए। अब सवाल उठ रहा है कि जब मेडिकल कॉलेज एलोपैथी का है, तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की जगह फार्मासिस्ट और आयुष डॉक्टरों को क्यों चुना गया?
मंत्री कार्यालय से भेजा प्रस्ताव
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा विभाग के मंत्री कार्यालय से चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजा गया। इसमें दंतेवाड़ा मेडिकल कॉलेज की स्वशासी समिति की सामान्य सभा के लिए छह सदस्यों के नाम प्रस्तावित किए गए हैं। तीन नाम जनप्रतिनिधियों के हैं, जबकि तीन को चिकित्सक सदस्य की श्रेणी में रखा गया है।
फार्मासिस्ट को बना दिया चिकित्सक
सबसे बड़ा विवाद यहीं से शुरू होता है। प्रस्तावित सूची में नीरज शर्मा (फार्मासिस्ट, गीदम), डॉ. पारस ठाकुर (आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी, बारसूर) और दिनेश गुप्ता (फार्मासिस्ट एवं मेडिकल स्टोर संचालक, गीदम) को चिकित्सक सदस्य बताया गया है। सवाल यह है कि क्या फार्मासिस्ट को चिकित्सक माना जा सकता है? और यदि मेडिकल कॉलेज एलोपैथी का है तो एक भी एमबीबीएस या विशेषज्ञ डॉक्टर का नाम क्यों नहीं है?
विशेषज्ञों की जगह गैर-विशेषज्ञ
शासकीय मेडिकल कॉलेज की स्वशासी समिति अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में भूमिका निभाती है। ऐसे में उम्मीद रहती है कि समिति में मेडिकल शिक्षा और एलोपैथी से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ शामिल हों। लेकिन प्रस्तावित सूची में एलोपैथी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व लगभग नदारद दिख रहा है। इससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और मापदंड दोनों सवालों के घेरे में आ गए हैं।
अब उठेंगे कई सवाल
क्या दंतेवाड़ा और आसपास एलोपैथी के योग्य डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे? क्या चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रस्तावित नामों की जांच की? क्या चिकित्सक सदस्य की परिभाषा बदल गई है? ऐसे कई सवाल अब इस सूची के सामने आने के बाद उठने लगे हैं। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह प्रस्ताव सीधे मंत्री कार्यालय से भेजा गया है।
सरकार की चुप्पी पर निगाह
पत्र मंत्री कार्यालय के विशेष सहायक हिमांचल साहू के हस्ताक्षर से जारी हुआ है और इसकी प्रतिलिपि चिकित्सा शिक्षा आयुक्त तथा दंतेवाड़ा मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता को भी भेजी गई है। अब नजर इस बात पर है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग इस प्रस्ताव को ज्यों का त्यों मंजूरी देता है या फिर विवाद के बाद सूची में बदलाव करता है। फिलहाल एक बात साफ है, एलोपैथी मेडिकल कॉलेज की समिति में एलोपैथी डॉक्टरों की गैरमौजूदगी ने सरकार को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है।
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