Chhattisgarh Politics: महतारी वंदन के पैसे महंगाई से वसूल रही सरकार? दीपक बैज ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप
दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई से परिवारों का खर्च लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बिजली बिल, बस किराए और राशन की कीमतों को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर महंगाई बड़ा मुद्दा बन गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता को राहत देने के बजाय आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। राशन सामग्री से लेकर बिजली और परिवहन तक खर्च बढ़ने का दावा किया। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा असर सामान्य और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है।
दीपक बैज ने महतारी वंदन योजना को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका आरोप है कि महिलाओं को एक तरफ आर्थिक सहायता दी जा रही है। दूसरी तरफ जरूरी वस्तुओं और सेवाओं की बढ़ती कीमतें परिवारों की बचत कम कर रही हैं। उन्होंने सरकार से महंगाई नियंत्रित करने और आम उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की।
महतारी वंदन योजना पर उठाए सवाल
दीपक बैज ने महतारी वंदन योजना का जिक्र करते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं को आर्थिक मदद देने का प्रचार कर रही है। दूसरी तरफ महंगाई के कारण परिवारों को अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
बैज के मुताबिक चावल, दाल और अन्य जरूरी राशन सामग्री की कीमतें बढ़ी हैं। पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना है कि बढ़ते खर्च से आम परिवारों का बजट बिगड़ रहा है। सरकार को केवल योजनाओं का प्रचार नहीं करना चाहिए। जनता को महंगाई से वास्तविक राहत देना भी जरूरी है।
बस किराए में बढ़ोतरी पर घेरा
यात्री बसों के बढ़ते किराए को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। दीपक बैज ने दावा किया कि पिछले एक साल में दो बार किराया बढ़ाया गया। उनके मुताबिक कुल बढ़ोतरी 75 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन पर बड़ी आबादी निर्भर रहती है। बस किराया बढ़ने से छात्रों, कर्मचारियों और रोजाना यात्रा करने वालों का खर्च बढ़ता है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के यात्रियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।
बैज ने सरकार से किराया वृद्धि की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आम यात्रियों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम किया जाना चाहिए। हालांकि किराए में बढ़ोतरी के उनके दावे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
बिजली बिल ने बढ़ाई परेशानी
बिजली की दरों और उपभोक्ताओं को मिलने वाले बिलों पर भी दीपक बैज ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि एक साल के भीतर दो बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा कई उपभोक्ताओं के बिल में अतिरिक्त शुल्क जोड़ा गया है। बैज के अनुसार कुछ उपभोक्ताओं को 600 से 1000 रुपए तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से इन शुल्कों की समीक्षा करने की मांग की।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य की बिजली व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पास कोयले सहित पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन हैं। इसके बावजूद महंगी बिजली खरीदने की स्थिति क्यों बन रही है? सरकार को इस संबंध में जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
धान खरीदी से पहले नई चुनौती
महंगाई के अलावा दीपक बैज ने किसानों से जुड़े मुद्दे भी उठाए। उन्होंने नवंबर से प्रस्तावित धान खरीदी से पहले पटवारियों की हड़ताल पर चिंता जताई। उनका कहना है कि हड़ताल लंबी चली तो किसानों की परेशानी बढ़ सकती है।
धान बेचने के लिए किसानों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड जरूरी होते हैं। इसमें रकबा और अन्य राजस्व दस्तावेज भी शामिल हैं। पटवारियों की हड़ताल से इन कार्यों में देरी होने की आशंका है।
बैज ने दावा किया कि पिछली बार भी कई किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ा था। कुछ किसान अपना धान नहीं बेच सके थे। उन्होंने सरकार से पटवारियों के साथ तत्काल बातचीत शुरू करने की मांग की। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि खरीदी शुरू होने से पहले समस्याओं का समाधान जरूरी है। इससे किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकेगा।
राम की मूर्ति पर सरकार से सवाल
दीपक बैज ने कौशल्या माता धाम में भगवान राम की नई मूर्ति स्थापित नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि तैयार मूर्ति को अब तक स्थापित क्यों नहीं किया गया।
बैज के मुताबिक मूर्ति बदलने का फैसला पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान हुआ था। उसी कार्यकाल में नई मूर्ति भी तैयार कराई गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इसके बाद भी स्थापना का काम पूरा नहीं कर सकी है।
उन्होंने भाजपा पर धार्मिक मुद्दों को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया। मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और दान के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए। बैज ने कहा कि सरकार को लंबित काम पूरे करने पर ध्यान देना चाहिए।
विभाग का नाम बदलने पर विरोध
आदिवासी विभाग का नाम बदलकर जनजाति विभाग किए जाने के फैसले का भी कांग्रेस ने विरोध किया है। दीपक बैज ने इसे आदिवासी समाज की पहचान से जुड़ा मुद्दा बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आदिवासी समुदाय की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है। बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान में आदिवासी समाज का महत्वपूर्ण योगदान है।
उन्होंने सवाल किया कि विभाग का नाम बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी। सरकार को इसके पीछे की वजह सार्वजनिक करनी चाहिए। बैज ने इस फैसले को वापस लेने की मांग की। उन्होंने राज्य सरकार पर आदिवासी हितों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। हालांकि नाम बदलने के पीछे सरकार का आधिकारिक तर्क सामने आना जरूरी है।
कई मुद्दों पर सरकार से मांगा जवाब
दीपक बैज ने महंगाई के साथ कई प्रशासनिक मुद्दों को भी उठाया है। इनमें बिजली बिल, बस किराया, धान खरीदी और पटवारियों की हड़ताल शामिल हैं। उन्होंने धार्मिक स्थल से जुड़े लंबित कार्य और विभाग के नाम बदलने पर भी आपत्ति जताई।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को आम जनता की परेशानियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने जरूरी वस्तुओं की कीमतों और बिजली बिल में राहत देने की मांग की। किसानों से संबंधित समस्याओं का समय रहते समाधान करने पर भी जोर दिया।
फिलहाल ये आरोप दीपक बैज के बयानों पर आधारित हैं। बिजली दरों, बस किराए और अन्य मूल्यवृद्धि संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन मुद्दों पर सरकार का आधिकारिक जवाब भी खबर में उपलब्ध नहीं है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस इन मुद्दों के जरिए सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष के आरोपों पर क्या जवाब देती है।