इधर इंतजार, उधर अंतिम संस्कार, कुलगाम आतंकी हमले में दीपक रात्रे की मौत
समझें क्या है पूरा मामला
- इधर घर में इंतजार, उधर कश्मीर में अंतिम संस्कार
- दीपक का शव नहीं पहुंचा, कश्मीर में ही हुई अंतिम विदाई
- आखिरी बार चेहरा भी नहीं देख पाए दीपक के परिजन
- कुलगाम हमले में मारे गए दीपक को नहीं मिली घर की मिट्टी
- बेटे के आने का इंतजार करते रहे, अंतिम संस्कार की खबर आ गई
जांजगीर/सक्ती। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले में जान गंवाने वाले छत्तीसगढ़ के दीपक रात्रे के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी 21 वर्षीय दीपक की मौत के बाद परिजन उसके पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। घर में अंतिम विदाई की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन इसी बीच खबर आई कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने वहीं दीपक का अंतिम संस्कार कर दिया।
परिवार को इस बात का सबसे ज्यादा दुख है कि वे अपने लाडले का आखिरी बार चेहरा तक नहीं देख पाए। दीपक के मामा दिलहरण सांडे ने बताया कि उन्होंने दीपक को बचपन से अपनी गोद में खिलाया था। उसकी मौत की खबर के बाद पूरा परिवार सदमे में है। अंतिम दर्शन की इच्छा अधूरी रह जाने से परिजनों की पीड़ा और बढ़ गई है।
मामा के घर हुआ था पालन-पोषण
दीपक रात्रे का बचपन उसके ननिहाल हरदीडीह में बीता था। मामा दिलहरण सांडे ने ही उसे बड़े होते देखा था। परिवार के अनुसार दीपक की शादी भी ननिहाल से ही हुई थी। वह परिवार की जिम्मेदारियां संभाल रहा था।
दीपक की मौत के बाद हरदीडीह गांव में मातम पसरा हुआ है। परिवार के लोग लगातार रो रहे हैं। ग्रामीण भी इस घटना से दुखी हैं और आतंकियों की इस हरकत को लेकर नाराजगी जता रहे हैं।
चार महीने के बेटे और परिवार को छोड़ गया दीपक
दीपक अपने पीछे पत्नी और चार महीने के मासूम बेटे को छोड़ गया है। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में दीपक ही परिवार का मुख्य सहारा था। उसका छोटा भाई दिव्यांग है और मां भी वृद्ध हैं।
परिवार के लिए दीपक की मौत सिर्फ भावनात्मक नुकसान नहीं है बल्कि आर्थिक संकट भी लेकर आई है। जिस बेटे पर घर की जिम्मेदारी थी वह अचानक चला गया।
आतंकियों ने पहचान पूछकर मारी गोली
जानकारी के अनुसार दीपक रोजी-रोटी कमाने के लिए जम्मू-कश्मीर गया था। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के केलाम इलाके में आतंकियों ने उसे निशाना बनाया। बताया जा रहा है कि आतंकियों ने पहले दीपक से उसका नाम और पहचान पूछी। इसके बाद गोली मार दी।
इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत हुई है। घटना के बाद पूरे प्रदेश में आक्रोश है। लोग निर्दोष मजदूरों को निशाना बनाए जाने की निंदा कर रहे हैं।
प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुआ अंतिम संस्कार
परिजनों को उम्मीद थी कि दीपक का शव गांव लाया जाएगा और वे अपने तरीके से अंतिम विदाई देंगे। लेकिन दूरस्थ क्षेत्र और सुरक्षा कारणों के चलते जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर ही अंतिम संस्कार कर दिया।
परिवार को इस फैसले की जानकारी मिलने के बाद वे काफी भावुक हो गए। उनका कहना है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पाना उनके लिए जीवनभर का दर्द बन गया है।
मुख्यमंत्री ने की आर्थिक सहायता की घोषणा
घटना पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुख जताया है। उन्होंने आतंकी हमले को मानवता के खिलाफ अपराध बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने वाली ऐसी घटनाएं बेहद दुखद हैं।
उन्होंने मृतक श्रमिकों के परिवारों के लिए राज्य सरकार की ओर से 20-20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही अधिकारियों को जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ समन्वय कर जरूरी मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवार और गांव में गहरा दुख
दीपक की मौत की खबर के बाद बुंदेली और हरदीडीह गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि दीपक मेहनती युवक था और परिवार के लिए बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश कर रहा था।
अब परिवार के सामने बेटे को खोने का दुख और भविष्य की चिंता दोनों खड़ी हैं। परिजनों का कहना है कि दीपक की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। उनका सबसे बड़ा दर्द यही है कि वे अपने बेटे को आखिरी बार देख भी नहीं सके।
FAQ
- जम्मू-कश्मीर आतंकी हमले में किसकी मौत हुई?
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी 21 वर्षीय दीपक रात्रे की मौत हुई। - दीपक रात्रे का अंतिम संस्कार कहां किया गया?
दीपक रात्रे का अंतिम संस्कार जम्मू-कश्मीर में ही प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत किया गया। परिजन उसका शव गांव आने का इंतजार कर रहे थे। - दीपक के परिवार को सरकार ने क्या मदद दी है?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मृतक दीपक रात्रे और दूसरे श्रमिक के परिवार को 20-20 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
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