डायल-112 में अब हल्बी और गोंडी भाषा में भी दर्ज होगी शिकायत, एक नंबर पर 8 सेवाएं

Harrison Masih | May 20, 2026, 11:02 IST
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छत्तीसगढ़ में डायल-112 इमरजेंसी सेवा को और आधुनिक और स्थानीय भाषा-फ्रेंडली बनाया जा रहा है। अब आदिवासी क्षेत्रों में लोग हल्बी और गोंडी भाषा में भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। राज्य में पुलिस, एंबुलेंस और अन्य आपात सेवाएं एक ही नंबर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

छत्तीसगढ़ में आपातकालीन सेवाओं को अधिक प्रभावी और आम लोगों के लिए सरल बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग डायल-112 इमरजेंसी सेवा में अपनी शिकायतें, सहायता अनुरोध हल्बी और गोंडी भाषा में भी दर्ज करा सकेंगे। इस पहल का सबसे अधिक लाभ बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है।



सरकार का उद्देश्य है कि भाषा की बाधा को खत्म कर हर नागरिक तक त्वरित आपातकालीन सहायता पहुंचाई जा सके।



400 हाईटेक इमरजेंसी वाहन तैनात

डायल-112 सेवा के तहत राज्य में कुल 400 आधुनिक इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन तैनात किए गए हैं। इन वाहनों में जीपीएस सिस्टम, मोबाइल डेटा टर्मिनल (MDT) और एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम लगाए गए हैं। इनकी मदद से कंट्रोल रूम से सीधे लोकेशन ट्रैक कर सबसे नजदीकी वाहन को तुरंत घटनास्थल पर भेजा जाता है, जिससे रिस्पॉन्स टाइम कम हो जाता है।



एक नंबर पर मिलेंगी 8 इमरजेंसी सेवाएं

डायल-112 को अब मल्टी-सर्विस इमरजेंसी प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया गया है। इसके तहत नागरिकों को एक ही नंबर पर कई आपात सेवाएं उपलब्ध होंगी-



छत्तीसगढ़ डायल 112


  • पुलिस सहायता
  • अग्निशमन सेवा
  • एंबुलेंस सेवा
  • महिला सुरक्षा सहायता
  • सड़क दुर्घटना सहायता
  • रेल सुरक्षा सेवा
  • प्राकृतिक आपदा सहायता
  • अन्य त्वरित नागरिक सहायता

इस व्यवस्था से लोगों को अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी।



16 जिलों में नई व्यवस्था लागू

यह उन्नत डायल-112 सिस्टम फिलहाल प्रदेश के 16 जिलों में लागू किया गया है, जिनमें रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, बस्तर, कोरबा, रायगढ़, कांकेर, दंतेवाड़ा और सुकमा सहित कई जिले शामिल हैं। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इसे पूरे छत्तीसगढ़ में विस्तार दिया जाएगा।



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आदिवासी क्षेत्रों में राहत

अधिकारियों के अनुसार, पहले आदिवासी क्षेत्रों में कई बार भाषा की समस्या के कारण लोग अपनी समस्या सही तरीके से नहीं बता पाते थे। हल्बी और गोंडी भाषा की सुविधा से अब स्थानीय लोग आसानी से अपनी बात रख सकेंगे और समय पर मदद मिल सकेगी।



यह कदम विशेष रूप से बस्तर संभाग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



लाखों लोगों को मिली त्वरित सहायता

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, डायल-112 सेवा शुरू होने के बाद अब तक लाखों कॉल्स पर कार्रवाई की जा चुकी है। सड़क दुर्घटना, महिला सुरक्षा और मेडिकल इमरजेंसी जैसे मामलों में इस सेवा ने कई लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई है।



तकनीक और स्थानीय भाषा का संयोजन

सरकार का कहना है कि इस नई पहल से तकनीक और स्थानीय भाषाओं का बेहतर समन्वय होगा, जिससे इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनेगा।



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