ईडी के सामने सतपाल छाबड़ा ने चबाए लाल डायरी के पन्ने, खुल गया कैश का राज

Arun Tiwari | Sept 04, 2026, 16:11 IST
छत्तीसगढ़ डीएमएफ घोटाला
डीएमएफ घोटाला जांच में ईडी को मिली लाल डायरी में नकद लेन-देन और कमीशन का हिसाब दर्ज है। एजेंसी के अनुसार, मुख्य लाइजनर सतपाल सिंह छाबड़ा ने डायरी के कुछ पन्ने नष्ट करने की कोशिश की।

डीएमएफ घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को एक ऐसी लाल डायरी मिली है, जिसमें नकद लेन-देन और कमीशन का हिसाब दर्ज था। एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान गिरफ्तार मुख्य लाइजनर सतपाल सिंह छाबड़ा ने पूछताछ के दौरान इसी डायरी के कुछ पन्नों को फाड़कर नष्ट करने की कोशिश की।



इतना ही नहीं, उसने एक पन्ना मुंह में डालकर चबाने की भी कोशिश की। अधिकारियों ने पन्ना बरामद कर लिया। ईडी अब इसे सबूत नष्ट करने की कोशिश के तौर पर देख रही है।



लाल डायरी में छिपे राज:

ईडी की कार्रवाई के दौरान छाबड़ा के ठिकाने से बरामद लाल डायरी जांच का अहम आधार बन गई है। डायरी में अलग-अलग रकम के लेन-देन का हस्तलिखित ब्योरा दर्ज होने का दावा किया गया है। तलाशी के दौरान डायरी के कुछ पन्नों पर 60 लाख, 31.50 लाख, 7.50 लाख, 35 लाख और 30 लाख रुपए जैसी रकम की प्रविष्टियां मिलने की बात सामने आई है।



इसके अलावा पटवारी अकाउंट और रजिस्ट्री विलय जैसे उल्लेख भी डायरी में पाए गए हैं। ईडी के अनुसार, कमीशन की करीब 9.11 करोड़ रुपए की रकम तीसरे पक्ष के खातों में भेजे जाने का भी उल्लेख मिला है।



13 विक्रेताओं से 21.33 करोड़ मिलने का दावा:

जांच एजेंसी के मुताबिक, बीज निगम से जुड़े 13 विक्रेताओं से छाबड़ा को कुल 21.33 करोड़ रुपए मिलने के साक्ष्य सामने आए हैं। इसमें करीब 11.19 करोड़ रुपए बैंकिंग माध्यम और 10.13 करोड़ रुपए नकद होने का दावा किया गया है।



इसके अलावा तीन विक्रेताओं से विनय गर्ग के माध्यम से 3.66 करोड़ रुपए और ओजस एग्रो केमिकल्स से नरेंद्र सिंह के जरिए 6.06 करोड़ रुपए नकद मिलने की बात भी जांच में सामने आई है। ईडी का आरोप है कि छाबड़ा ने 2019 से 2023 के बीच बीज निगम के कामों से जुड़ी कंपनियों के सलाहकार के तौर पर काम करने की बात पूछताछ में स्वीकार की है।



एजेंसी के अनुसार, परिवहन, लोडिंग-अनलोडिंग और बिलिंग जैसे कामों के बदले सामान के मूल मूल्य पर 20 से 32 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था। ईडी ने इस रकम को सामान्य सेवा शुल्क मानने से इनकार किया है।



31 करोड़ की अवैध कमीशन राशि की जांच:

जांच में छाबड़ा पर करीब 31 करोड़ रुपए के कथित अवैध कमीशन लेन-देन का आरोप है। ईडी का कहना है कि इस रकम को सीधे रखने के बजाय परिवार, एचयूएफ, कारोबारी संस्थाओं और अन्य खातों के जरिए घुमाकर संपत्तियों में निवेश किया गया। जांच में सैंड एग्रीगेट के नाम से 19 भूखंड और सैंड स्टोन इंफ्रा के नाम से 11 भूखंड खरीदे जाने का भी उल्लेख है।



एजेंसी अब इस 31 करोड़ रुपए की अपराध आय का पूरा मनी ट्रेल तलाश रही है। साथ ही डायरी के नष्ट किए गए पन्नों में दर्ज लेन-देन और इस सिंडिकेट से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।



कांग्रेस नेताओं से जुड़े तार:

जांच के दौरान यह बात भी सामने आने का दावा किया गया है कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में छाबड़ा प्रभावशाली नेताओं के लिए वित्तीय समन्वयक की भूमिका निभाता था। ईडी अब डायरी में दर्ज रकम, बैंक खातों, संपत्तियों और नकद लेन-देन को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की तस्वीर तैयार करने में जुटी है।



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