डोंगरगढ़ के माता मंदिर की सालाना 17 करोड़ रूपए की आय, पुजारियों के कम वेतन पर सवाल
Raipur/Delhi. सुप्रीम कोर्ट में एक पीआईएल दाखिल हुई है जो भक्त और भगवान को लेकर है। इस याचिका में मंदिरों के पुजारियों को मिलने वाले मानदेय पर सवाल खड़ा किया गया है। यानी मंदिरों की आय तो बहुत ज्यादा है लेकिन वहां के पुजारियों को बहुत कम मानदेय मिलता है। छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध मंदिर डोंगरगढ़ की माता बम्लेश्वरी के ट्रस्ट की आय और पुजारियों के मानदेय में भी इसी तरह की विसंगति सामने आई।
भक्त और भगवान की कमाई:
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी का मंदिर है। यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। माँ यहां पर आने वाले भक्तों की मन्नत पूरी करती है। पीएम मोदी भी यहां मत्था टेकने आ चुके हैं। मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर ट्रस्ट प्रदेश के सबसे समृद्ध मंदिर ट्रस्टों में गिना जाता है। ट्रस्ट की वार्षिक आय करीब साढ़े 17 करोड़ रुपए बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक मंदिर में सेवा देने वाले पुजारियों को 6 से 9 हजार रुपए तक मानदेय दिया जा रहा है।
कम वेतन पर सवाल:
मंदिर ट्रस्ट में लगभग 350 कर्मचारी कार्यरत बताए जाते हैं, जिनमें करीब 27 पुजारी शामिल हैं। पुजारियों का कहना है कि दिनभर पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियों में सेवा देने के बाद उन्हें कम राशि मिलती है। जिससे परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो जाता है। कुछ पुजारियों को प्रतिदिन के हिसाब से केवल 200 से 300 रुपए तक भुगतान मिल पाता है।
श्रम कानूनों के जानकारों का कहना है कि यदि कोई संस्था नियमित रूप से कर्मचारियों से सेवा लेती है, तो उसे न्यूनतम वेतन अधिनियम के प्रावधानों का पालन करना चाहिए।
यह हैं ट्रस्ट की कमाई के साधन:
ट्रस्ट की आय के स्रोत भी काफी बड़े बताए जाते हैं। इनमें श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया दान, रोपवे शुल्क, मंदिर परिसर की दुकानों का किराया, धर्मशाला से होने वाली आय और विज्ञापन शामिल हैं। बताया जा रहा है कि केवल रोपवे से ही हर वर्ष करीब 4 करोड़ रुपए की आमदनी होती है। हालांकि ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर के रखरखाव, निर्माण, प्रसाद व्यवस्था, धार्मिक आयोजनों और कर्मचारियों के भुगतान में बड़ी राशि खर्च होती है।
क्या कहता है ट्रस्ट:
ट्रस्ट प्रबंधन का पक्ष है कि पुजारियों को केवल मानदेय ही नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें अन्य प्रकार की सुविधाएं और आय के अवसर भी उपलब्ध हैं। ट्रस्ट के अनुसार आरती और पूजा के दौरान मिलने वाली दक्षिणा पुजारियों को दी जाती है। इसके अलावा मंदिर परिसर के बाहर धार्मिक अनुष्ठान और कर्मकांड कराने से भी पुजारी अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं। नवरात्रि जैसे बड़े आयोजनों में पुजारियों को विशेष लाभ मिलने की बात भी कही जा रही है।
धार्मिक आयोजनों में खर्च:
बताया गया है कि चैत्र और क्वार नवरात्रि के दौरान मंदिर की व्यवस्थाओं पर हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। केवल फूलों और सजावट पर ही लाखों रुपए खर्च होने का दावा किया गया है। ट्रस्ट का यह भी कहना है कि वर्षों से यही व्यवस्था लागू है और अब तक पुजारियों की ओर से औपचारिक आपत्ति नहीं की गई है।
PIL के बाद बहस तेज़:
देशभर में मंदिरों के पुजारियों के वेतन और सामाजिक सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो रही है। विभिन्न राज्यों में पुजारियों को नियमित वेतन, पेंशन और श्रमिक अधिकार देने की मांग उठती रही है। इस मामले में भी श्रम कानूनों के तहत न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है। इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है, जिसमें पुजारियों को श्रमिक मानते हुए उन्हें न्यूनतम वेतन देने की मांग उठाई गई है।
ये हैं देश के धनी मंदिर:
तिरुपति बालाजी मंदिर देश का सबसे धनी मंदिर माना जाता है। इसकी कमाई अरबों में है।अम्बानी समेत बड़े उद्योगपति और फ़िल्म स्टार यहां पर करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाते हैं। इसके अलावा शिरडी के साईं बाबा, वैष्णोदेवी, पुरी के जग्गनाथ, महादेव के ज्योतिर्लिंग, माता के शक्तिपीठ, द्वारिका, मथुरा, वृन्दावन, अयोध्या के राम मंदिर समेत मुम्बई के सिद्धि विनायक जैसे कई मंदिर है जिनकी आय करोड़ों में है।
एमपी, राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिर:
एमपी के महाकाल, ओम्कारेश्वर, मैहर की शारदा माता, सलकनपुर की विजयासन देवी, उज्जैन के खजराना, बड़े गणेश, भोजपुर शिव मंदिर और कालभैरव, मंगलनाथ और चिंतामन गणेश मंदिर शामिल हैं।
राजस्थान के प्रमुख मंदिरों में खाटू श्याम, श्रीनाथजी, सालासर और मेंहदीपुर के बालाजी और सांवलिया सेठ मंदिर शामिल हैं। यहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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