कृषि मैपर पोर्टल पर विनायक ताम्रकार की नहीं थी फोटो, जांच के बाद महिला अधिकारी सस्पेंड

VINAY VERMA | Mar 14, 2026, 18:55 IST
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दुर्ग जिले में अफीम की अवैध खेती के मामले में कृषि विभाग की जांच में नए खुलासे हुए हैं। जिस खेत को मक्का फसल प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था, उसकी जानकारी विभागीय रिकॉर्ड में छिपाई जा रही थी। मामले में महिला अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है।

Durg. अफीम की अवैध खेती के मामले में कृषि विभाग की जांच में नया खुलासा हुआ है। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार जिस खेत को मक्का फसल प्रदर्शन प्लॉट बताया गया था। उसकी जानकारी छिपाई जा रही थी। कृषि मैपर पोर्टल पर असली किसान की जगह किसी दूसरे व्यक्ति की फोटो अपलोड की गई थी। साथ ही फील्ड विजिट की जानकारी भी उपरी अधिकारियों से साझा नहीं की गई थी। मामले में कृषि विस्तार अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है।



किसानों को ट्रेनिंग देने वाला प्लॉट

विनायक ताम्रकार भाजपा किसान मोर्चा का जिला अध्यक्ष था। जिसके कारण उसे शासकीय योजना का लाभ मिलता था। केंद्र की राष्ट्रीय कृषि योजना के तहत मक्का प्रदर्शन कर रहा था। जिसके तहत किसानों को मक्का खेती की नई तकनीक बताना था। उससे हुई मक्का फसल उत्पादन का प्रदर्शन किया जाना था। जिससे किसान प्रेरित हों। उसी जगह के आसपास अवैध खेती चल रही थी।



जवाब में अधिकारी ने बताई अपनी मजबूरी

समोदा गांव में अफीम की खेती मिलने के बाद अलग-अलग विभाग जांच कर रहे हैं। इसी के तहत कृषि विभाग ने भी कृषि विस्तार अधिकारी को नोेटिस दिया था। जिसके जवाब में अधिकारी एकता साहू ने बताया कि खेत में जाना संभव नहीं था। खेत में जाने का रास्ता नही था। खेत को कटीले तारों से फेंसिंग करवाया गया था। गेट पर ताला लटका रहता था, अंदर एंट्री करने के लिए अनुमति लेनी पड़ती थी। लेकिन उनके जवाब मे कृषि विभाग के उप संचालक संतुष्ट नहीं हुए हैं



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अधिकारियों से क्यों छिपाया?

दुर्ग की वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी एकता साहू की जवाब से कृषि उप संचालक संतुष्ट नहीं हुए। सवाल पूछा जा रहा है कि अगर वहां नहीं पहुची तो भौतिक सत्यापन कैसे किया। इसके अलावा ऐसा नहीं होने की जानकारी उच्च अधिकारियों को क्यों नहीं दी?



अफीम कांड के बाद कई स्तरों पर जांच

अफीम की खेती (Durg opium farming) का मामला सामने आने के बाद अब अलग-अलग विभागों में जांच तेज कर दी है। प्रशासन, कृषि विभाग और अन्य एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि आखिर इस पूरे मामले में किस स्तर पर चूक हुई। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी कई जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। फिलहाल कृषि विभाग की कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा।



मामले में भूपेश बघेल का आरोप

इधर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मामले में लगातार सरकारी मिलीभगत का हवाला दे रहे हैं। कलेक्टर्स, सांसद पर विनायक के संरक्षण का आरोप लगा रहे हैं। वे कह रहे हैं कि गृहमंत्री की घनिष्ठता के कारण वह जब चाहता कि ग्रामीणों को गिरफ्तार करवा देता। होली के दिन वर्तमान सरपंच की गिरफ्तारी भी गृहमत्री बंगले से फोन आने के बाद हुई थी।



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