E-20 पेट्रोल से गाड़ी खराब होने पर देनी होगी नई गाड़ी, उपभोक्ता फोरम का आदेश

Harrison Masih | Jul 15, 2026, 19:15 IST
रायपुर उपभोक्ता आयोग का आदेश 2026
छत्तीसगढ़ में उपभोक्ता आयोग ने E-20 पेट्रोल से कार खराब होने के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि प्रार्थी की गाड़ी E-20 पेट्रोल के कारण खराब हुई थी। आयोग ने कंपनी और डीलर को नई कार देने या 21 लाख रूपए देने का आदेश दिया है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में उपभोक्ता आयोग ने एक अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि ई-20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) के कारण एक नई कार बार-बार खराब हुई। इसके लिए वाहन निर्माता कंपनी और डीलर को जिम्मेदार ठहराते हुए पीड़ित ग्राहक को नई कार देने या उसकी कीमत लौटाने का आदेश दिया गया है।



रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (अतिरिक्त पीठ) ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि वाहन का इंजन ई-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं था, जिससे कार में लगातार तकनीकी खराबी आती रही।



क्या है पूरा मामला?

रायपुर के सड्डू निवासी डॉ. प्रेमराज देवता ने 3 जून 2024 को एक नई ग्रैंड विटारा कार खरीदी थी। कार खरीदने के कुछ महीनों बाद नवंबर 2024 में वाहन में तकनीकी समस्या आने लगी।



11 नवंबर 2024 को वे कार को अधिकृत सर्विस सेंटर लेकर पहुंचे। वहां उन्हें बताया गया कि पेट्रोल की गुणवत्ता खराब होने के कारण इंजन में समस्या आई है।



सर्विस सेंटर ने कई बार रिपेयरिंग की, पेट्रोल टंकी की सफाई भी कराई, लेकिन इसके बाद भी कार बार-बार खराब होती रही।



लैब जांच में सामने आई सच्चाई

समस्या का समाधान नहीं होने पर डॉ. देवता ने कार में उपयोग किए जा रहे पेट्रोल का सैंपल जांच के लिए मान्यता प्राप्त एसजीएस लैब भेजा।



जांच रिपोर्ट में सामने आया कि पेट्रोल वाहन के इंजन के अनुकूल नहीं था। इसी वजह से इंजन बार-बार चोक हो रहा था और कार में तकनीकी खराबी आ रही थी।



दूसरी तरफ संबंधित पेट्रोल पंप ने कहा कि अन्य किसी ग्राहक ने ऐसी शिकायत नहीं की है।



कंपनी ने नहीं मानी जिम्मेदारी

कार मालिक का आरोप था कि बार-बार शिकायत के बावजूद कंपनी और डीलर ने निर्माण संबंधी किसी भी खामी को स्वीकार नहीं किया।



बाद में कंपनी ने वाहन का मूल्यांकन करीब 12 लाख रुपए बताया, जिससे ग्राहक संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।



आयोग ने क्या फैसला दिया?

रायपुर उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कून्डु और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया।



आयोग ने डीलर और निर्माता कंपनी को आदेश दिया कि वे 45 दिनों के भीतर ई-20 पेट्रोल को सपोर्ट करने वाली उसी मॉडल की नई कार दें, या वाहन की पूरी कीमत 20,50,494 रुपए लौटाएं।



इसके अलावा आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपए, वाद व्यय के लिए 10 हजार रुपए देने का भी आदेश दिया है।



इस तरह कुल भुगतान राशि करीब 21.60 लाख रुपए होगी। तय समय में भुगतान नहीं करने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।



क्या होता है E-20 पेट्रोल?

E-20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। केंद्र सरकार देश में एथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा दे रही है ताकि पेट्रोलियम आयात कम हो और प्रदूषण में कमी आए।



हालांकि कुछ वाहन मालिकों ने E-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से इंजन की परफॉर्मेंस, माइलेज और तकनीकी समस्याओं की शिकायत भी की है।



क्यों अहम है यह फैसला?

विशेषज्ञों के अनुसार यह देश के शुरुआती और महत्वपूर्ण मामलों में से एक है, जिसमें उपभोक्ता आयोग ने E-20 पेट्रोल और वाहन की तकनीकी अनुकूलता को लेकर स्पष्ट टिप्पणी की है।



यह फैसला उन वाहन मालिकों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो ई-20 पेट्रोल के उपयोग के बाद तकनीकी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।



FAQ

  1. E-20 पेट्रोल क्या होता है?
    E-20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण होता है। केंद्र सरकार इसे ईंधन आयात कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए बढ़ावा दे रही है।
  2. E-20 पेट्रोल से वाहन में क्या समस्याएं आ सकती हैं?
    यदि वाहन E-20 के अनुकूल नहीं है, तो इंजन चोक होना, स्टार्टिंग समस्या, माइलेज में कमी, फ्यूल सिस्टम में खराबी और परफॉर्मेंस प्रभावित होने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं।


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