ठगी करने केके श्रीवास्तव ने खोले थे फर्जी खाते, विदेशों तक मनी ट्रेल
समझें क्या है पूरा मामला...
- 500 करोड़ रुपए की ठगी मामले में ईडी ने नए खुलासे किए हैं।
- फर्जी दस्तावेजों, बैंक खातों और शेल कंपनियों के इस्तेमाल का दावा।
- ठगी की रकम दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर तक भेजी गई।
- आरोपी ने नौकर के नाम से लिए सिम, फर्जी संस्थाओं के खातों का इस्तेमाल।
- ईडी ने छापे में डायरी, लेनदेन रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिलने की बात।
ईडी ने दावा किया है कि तांत्रिक बाबा यानि केके श्रीवास्तव ने ठगी करने के लिए फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकों में खाते खोले थे। जिस सिम से वह व्हाट्सएप कॉल करता था वह भी अपने घर के नौकर के नाम पर लिए थे।
इसके अलावा ईडी का दावा है कि करोड़ों रुपए की रकम को शेल कंपनियों और फर्जी खातों के जरिए विदेश भेजने का संगठित नेटवर्क भी सामने आया है। यह ठगी कांग्रेस सरकार के दौरान हुई थी जिसमें कांग्रेस में पूर्व नेता प्रमोद कृष्णम का भी नाम सामने आया था।
फर्जी खातों का खेल
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम पांच अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कराई गई। इन खातों की जानकारी व्हाट्सएप के जरिए भेजी गई थी। ईडी का दावा है कि मोबाइल नंबर भी आरोपी ने अपने एक कर्मचारी के नाम पर लिया था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि जिन पांच संस्थाओं के खातों में रकम गई, वे कथित तौर पर फर्जी तरीके से खोले गए थे। इतना ही नहीं, जिन लोगों के नाम पर खाते खुले, उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी और जांच के दौरान संबंधित पते पर कोई संस्था मौजूद नहीं मिली।
विदेश तक पहुंचा पैसा
ईडी के अनुसार, ठगी से मिली रकम को कई परतों में घुमाकर शेल और कंड्यूट कंपनियों के जरिए विदेश भेजा गया। जांच में दुबई, हांगकांग, चीन और सिंगापुर तक मनी ट्रेल मिलने का दावा किया गया है। एजेंसी का कहना है कि रकम को फ्रेट चार्ज और कंटेनर लीजिंग जैसे फर्जी व्यावसायिक भुगतान के रूप में विदेश भेजा गया। पीड़ित को 3.40 करोड़ रुपए वापस भी किए गए, लेकिन ईडी का आरोप है कि यह रकम भी उसी कथित अवैध धन से जुटाकर लौटाई गई ताकि लेनदेन को वैध दिखाया जा सके। अब भी 11.60 करोड़ रुपए वापस नहीं किए गए हैं।
छापे में मिले सबूत
ईडी ने अप्रैल 2025 में पीएमएलए के तहत तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान हाथ से लिखे लेनदेन के रिकॉर्ड, निजी डायरी, संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए। जांच में यह भी दावा किया गया है कि कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने इसी तरह के तरीके से एक अन्य कारोबारी को भी कथित तौर पर निशाना बनाया। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है।
पूछताछ में नहीं मिला सहयोग
ईडी के मुताबिक जांच के दौरान आरोपी से पीएमएलए की धारा 50 के तहत पूछताछ की गई, लेकिन उसने कथित तौर पर गोलमोल जवाब दिए, महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जानकारी साझा नहीं की। इसी आधार पर एजेंसी ने उसकी गिरफ्तारी को आवश्यक बताया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित फर्जीवाड़े में और कौन-कौन लोग शामिल थे। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
क्या था पूरा मामला
ईडी की जांच के मुताबिक जून 2023 में आरोपी ने रावत एसोसिएट्स के संचालक को भरोसा दिलाया कि रायपुर स्मार्ट सिटी का करीब 500 करोड़ रुपए का बड़ा प्रोजेक्ट सब-कॉन्ट्रैक्ट पर उपलब्ध है। उसने दावा किया कि प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए 15 करोड़ रुपए बतौर परफॉर्मेंस सिक्योरिटी जमा करने होंगे। भरोसा दिलाने के लिए कथित तौर पर फर्जी परियोजना दस्तावेज भी दिखाए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर कारोबारी से करोड़ों रुपए हासिल किए गए।
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