महादेव सट्टा एप केस के सभी आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत, ED की जांच जारी
Harrison Masih | Oct 08, 2025, 13:34 IST
mahadhev-satta-app-case-supreme-court-bail-12-accused the sootr
महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में जेल में बंद 12 आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। एप ने वर्षों तक करोड़ों रुपए का कारोबार किया और पुलिस-ED की नजर में रहा। जानिए कौन हैं आरोपी और कैसे चलता था इस एप का अवैध नेटवर्क।
Raipur. महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले (Mahadev betting app case) में सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद सभी 12 आरोपियों को जमानत दे दी है। आरोपियों में शामिल हैं रितेश यादव, भारत ज्योति, विश्वजीत राय, राहुल वकटे, नीतीश दीवान, भीम सिंह यादव, अर्जुन यादव, चंद्रभूषण वर्मा और सतीश चंद्राकर। ये सभी पिछले ढाई साल से रायपुर जेल में कैद थे। सुप्रीम कोर्ट से दस्तावेज प्राप्त होने के बाद आरोपियों को जेल से रिहा कर दिया जाएगा।
ये खबर भी पढ़ें... महादेव सट्टा एप केस: सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने गिरफ्तारी से बचने कोर्ट में लगाई गुहार
महादेव सट्टा एप की शुरुआत 2016 में हुई थी। इसे लॉन्च किया था सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और अतुल अग्रवाल ने। शुरुआत में एप पर ऑनलाइन सट्टेबाजी होती थी, जिसमें क्रिकेट, फुटबॉल, टेनिस, बैडमिंटन जैसे खेलों के साथ पोकर, तीन पत्ती और वर्चुअल गेम्स के अलावा चुनाव भविष्यवाणी पर भी दांव लगाया जाता था। यह एप दुबई से संचालित होने के कारण जुआ गतिविधियों के लिए कुख्यात हो गया।
एप का ग्राहक आधार पहले तीन साल में 12 लाख तक पहुंचा। 2020 में फाउंडर्स ने हैदराबाद स्थित रेड्डी अन्ना नामक प्लेटफॉर्म को 1,000 करोड़ रुपए में खरीद लिया। इसके बाद महादेव एप के यूजर्स की संख्या 50 लाख से अधिक हो गई और कमाई में भारी बढ़ोतरी हुई। एप संचालकों ने वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी व्यवसाय का विस्तार किया और हजारों करोड़ का कारोबार खड़ा किया।
ये खबर भी पढ़ें... ईडी की कार्रवाई में रायपुर देश भर में नंबर वन, 8 हजार करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा, महादेव ने पहुंचाया टॉप पर
महादेव एप एक सिंडिकेट के रूप में संचालित होता था। यह विभिन्न अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म को एकत्र करता और फ्रेंचाइजी के माध्यम से काम करता। फ्रेंचाइजी के साथ 70:30 के अनुपात में मुनाफा बांटा जाता था। यूजर्स को संपर्क करने के लिए नंबर दिए जाते थे, जिससे वे आईडी बनाकर पैसे जमा कर सकते थे। जीतने के बाद पैसे नकद निकालने की सुविधा दी जाती थी।
यूजर बेस बढ़ने के साथ एप का मुनाफा भी बढ़ता गया, अनुमान है कि एप से रोजाना लगभग 200 करोड़ रुपए का लाभ होता था। एप की सफलता का श्रेय यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस, विविध सट्टेबाजी विकल्प और त्वरित लाभ के वादे को जाता है। हालांकि लंबे समय तक एप खेलते रहने वाले यूजर्स के साथ हेरफेर भी किया जाता था ताकि कंपनी का मुनाफा सुनिश्चित किया जा सके।
ये खबर भी पढ़ें... महादेव बेटिंग ऐप केस में CBI ने चलाया बड़ा अभियान, 150 पुलिसकर्मी-अधिकारी और नेताओं को समन जारी
ये खबर भी पढ़ें... महादेव सट्टा एप मामले में 11 आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों की लेनदेन की जांच जारी
महादेव एप 2022 तक खुलेआम चलता रहा, लेकिन इसके बाद इनकम टैक्स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की निगरानी में आया। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए और बड़े पैमाने पर ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में पता चला कि इस मामले में लगभग 6,000 करोड़ रुपए का मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क शामिल था।
जांच में हवाला नेटवर्क, शेल कंपनियां और यहां तक कि राजनीतिक संरक्षण के दावों के लिंक भी सामने आए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद आरोपियों पर जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी।
महादेव सट्टा एप मामले ने छत्तीसगढ़ और देश भर में ऑनलाइन जुआ और मनी लॉन्ड्रिंग की गंभीरता को उजागर किया। सुप्रीम कोर्ट की जमानत से आरोपियों को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन ED और पुलिस की जांच जारी है और भविष्य में इससे जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
ये खबर भी पढ़ें... महादेव सट्टा एप केस: सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने गिरफ्तारी से बचने कोर्ट में लगाई गुहार
एप की शुरुआत और विस्तार
एप का ग्राहक आधार पहले तीन साल में 12 लाख तक पहुंचा। 2020 में फाउंडर्स ने हैदराबाद स्थित रेड्डी अन्ना नामक प्लेटफॉर्म को 1,000 करोड़ रुपए में खरीद लिया। इसके बाद महादेव एप के यूजर्स की संख्या 50 लाख से अधिक हो गई और कमाई में भारी बढ़ोतरी हुई। एप संचालकों ने वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए भी व्यवसाय का विस्तार किया और हजारों करोड़ का कारोबार खड़ा किया।
ये खबर भी पढ़ें... ईडी की कार्रवाई में रायपुर देश भर में नंबर वन, 8 हजार करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा, महादेव ने पहुंचाया टॉप पर
एप का संचालन और मुनाफा
यूजर बेस बढ़ने के साथ एप का मुनाफा भी बढ़ता गया, अनुमान है कि एप से रोजाना लगभग 200 करोड़ रुपए का लाभ होता था। एप की सफलता का श्रेय यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस, विविध सट्टेबाजी विकल्प और त्वरित लाभ के वादे को जाता है। हालांकि लंबे समय तक एप खेलते रहने वाले यूजर्स के साथ हेरफेर भी किया जाता था ताकि कंपनी का मुनाफा सुनिश्चित किया जा सके।
ये खबर भी पढ़ें... महादेव बेटिंग ऐप केस में CBI ने चलाया बड़ा अभियान, 150 पुलिसकर्मी-अधिकारी और नेताओं को समन जारी
महादेव सट्टा एप केस को 3 पॉइंट्स में समझें:
|
जांच और शिकंजा
जांच में हवाला नेटवर्क, शेल कंपनियां और यहां तक कि राजनीतिक संरक्षण के दावों के लिंक भी सामने आए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बावजूद आरोपियों पर जांच की प्रक्रिया जारी रहेगी।
महादेव सट्टा एप मामले ने छत्तीसगढ़ और देश भर में ऑनलाइन जुआ और मनी लॉन्ड्रिंग की गंभीरता को उजागर किया। सुप्रीम कोर्ट की जमानत से आरोपियों को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन ED और पुलिस की जांच जारी है और भविष्य में इससे जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
FAQ
- छत्तीसगढ़
महादेव सट्टा एप केस क्या है ?
महादेव सट्टा एप केस एक ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी मामला है, जिसमें महादेव एप के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, पोकर और वर्चुअल गेम्स पर अवैध दांव लगाए जाते थे। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप कौन चलाता था?
महादेव ऑनलाइन सट्टा एप को सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और अतुल अग्रवाल ने 2016 में लॉन्च किया था। बाद में इसके संचालन में अन्य फ्रेंचाइजी और सहयोगी भी जुड़े।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman