आग में जले शिक्षा विभाग के मुख्य दस्तावेज, निजी स्कूलों से दोबारा मांगे दस्तावेज
NEWS IN SHORT
- आग में नौ सालों के महत्वपूर्ण स्कूली दस्तावेज जलकर खाक हुए।
- विभाग ने 850 निजी स्कूलों से दोबारा रिकॉर्ड मांगे हैं।
- आरटीई भुगतान और मान्यता से जुड़े अहम वित्तीय रिकॉर्ड नष्ट।
- जांच समिति के पहुंचने से पहले ही भवन जमींदोज किया।
- ईओडब्ल्यू और एसीबी से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग।
NEWS IN DETAIL
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय की मान्यता शाखा में लगी भीषण आग के बाद शिक्षा विभाग ने एक बड़ा और अभूतपूर्व कदम उठाया है। 18 जनवरी की रात हुई इस आगजनी में पिछले नौ सालों के महत्वपूर्ण दस्तावेज पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए हैं। इस संकट से निपटने के लिए कार्यालय ने एक आदेश जारी कर सभी 850 निजी विद्यालयों के प्राचार्यों, सचिवों और प्रबंधकों को सत्र 2016-17 से 2025-26 तक के सभी रिकॉर्ड दोबारा जमा करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी दस्तावेजों को पृष्ठवार क्रमांकित कर चेकलिस्ट के अनुसार व्यवस्थित रूप से जमा करना होगा।
करोड़ों के आरटीई भुगतान और मान्यता के रिकॉर्ड नष्ट
विभागीय पत्र के अनुसार, आग की इस अप्रत्याशित घटना में अशासकीय संस्थाओं की मान्यता से जुड़ी मूल नस्तियां (फाइलें), निरीक्षण प्रतिवेदन, वित्तीय दस्तावेज और आय-व्यय के अभिलेख पूरी तरह स्वाहा हो चुके हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत निजी स्कूलों को किए गए करोड़ों-अरबों रुपये के भुगतान से जुड़े अहम रिकॉर्ड भी इस आग की भेंट चढ़ गए हैं, जिससे विभाग के पास अब कोई जमीनी रिकॉर्ड नहीं बचा है।
जांच के घेरे में आगजनी: शॉर्ट सर्किट या साजिश?
इस पूरे मामले को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 18 जनवरी की रात आग लगने के तुरंत बाद, अगले ही दिन 19 जनवरी को पूरे भवन को जमींदोज (ध्वस्त) कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में बनी जांच समिति के मौके पर पहुंचने से पहले ही मलबे को साफ कर दिया गया, जिन्होंने प्रारंभिक रिपोर्ट में आग का कारण शॉर्ट सर्किट बताया था।
अब मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने पुलिस कमिश्नर, आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को शिकायत सौंपकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
DEO पर आरोप, निष्पक्ष जांच और PIL की तैयारी
वर्तमान डीईओ हिमांशु भारतीय पहले से ही निजी स्कूलों की मान्यता में अनियमितताओं के आरोपों से घिरे हैं। विधानसभा में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव भी इस संबंध में जांच चलने की बात स्वीकार कर चुके हैं। ऐसे में रिकॉर्ड जलने की घटना ने इस विवाद को और हवा दे दी है।
> सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी का कहना है: "इस पूरी घटना की स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आरटीई भुगतान और मान्यता प्रक्रिया का विशेष ऑडिट किया जाए और बचे हुए डिजिटल डेटा को तुरंत सुरक्षित किया जाए।"
इस पूरे घटनाक्रम को देखते हुए अब मामले को उच्च न्यायालय में ले जाने और जनहित याचिका (PIL) दायर करने की तैयारी भी की जा रही है, ताकि सच सामने आ सके।
निष्कर्ष
डीईओ कार्यालय में आग लगने और आनन-फानन में मलबे को हटाने से विभागीय पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। करोड़ों के वित्तीय रिकॉर्ड नष्ट होने के बाद निजी स्कूलों से दोबारा दस्तावेज मांगना महज एक तात्कालिक राहत है, लेकिन मामले की निष्पक्ष ईओडब्ल्यू जांच से ही असली सच्चाई सामने आ पाएगी।
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