छत्तीसगढ़ हाथी संरक्षण नियम : हाथियों से छेड़छाड़ पर 3 साल की जेल
समझें क्या है पूरा मामला
हाथियों को पत्थर मारने या पटाखा फोड़ने पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी। राज्य में हाथियों को भगाने के नाम पर अक्सर प्रताड़ित किया जाता है। लोग उन पर पत्थरों की बौछार करते हैं। अब ऐसा करने वालों के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह नया आदेश छत्तीसगढ़ के सभी प्रभावित जिलों में लागू होगा। विभाग ने इस संबंध में सभी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। मानव और हाथियों के बीच संघर्ष रोकने के लिए यह फैसला हुआ। हाथियों को चिढ़ाना अब पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
कानून में सजा के कड़े प्रावधान
हाथियों को प्रताड़ित करने पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज होगा। पहली बार अपराध साबित होने पर तीन साल की जेल हो सकती है। इसके साथ ही एक लाख रुपए तक का जुर्माना भी लगेगा। कुछ मामलों में यह दोनों सजाएं एक साथ मिल सकती हैं।
यदि कोई व्यक्ति दोबारा यही गलती करता है तो सजा बढ़ेगी। दूसरी बार अपराध करने पर सात साल तक की जेल होगी। दोबारा गलती करने पर कानून में कोई रियायत नहीं मिलेगी। यह सजा गैर-जमानती धाराओं के तहत दी जा सकती है।
क्यों हिंसक हो जाते हैं हाथी
विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों को भगाने से व्यवहार बदल जाता है। पटाखे फोड़ने से हाथी बहुत ज्यादा डर जाते हैं। इस डर के कारण उनके भीतर आक्रामकता काफी बढ़ जाती है। चिड़चिड़े स्वभाव के कारण वे इंसानों को दुश्मन समझने लगते हैं।
हाथियों को अनावश्यक परेशान होने से रोकना मुख्य लक्ष्य है। वन विभाग अब निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक अपना रहा है। रेडियो कॉलर और ड्रोन कैमरों से लोकेशन ली जा रही है। ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी की जानकारी पहले ही मिलेगी।
इन इलाकों में रहेगी विशेष नजर
यह निर्देश सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और कांकेर के लिए हैं। कई प्रमुख टाइगर रिजर्व में भी इसे लागू किया जाएगा। इनमें उदंती-सीतानदी और अचानकमार टाइगर रिजर्व शामिल हैं। गुरु घासीदास-तमोर पिंगला क्षेत्र में विशेष निगरानी रखी जाएगी।
संवेदनशील गांवों में इस नियम की मुनादी कराई जा रही है। ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की सलाह दी गई है। दोषियों के खिलाफ बिना देरी के सख्त कार्रवाई की जाएगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में हाथियों को परेशान करने पर क्या सजा मिलेगी?
उत्तर: नए नियमों के तहत हाथियों पर पत्थर फेंकने या पटाखा फोड़ने पर सीधे एफआईआर दर्ज होगी। इसमें दोषी को 3 साल तक की जेल और 1 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। - वन विभाग ने यह सख्त आदेश क्यों जारी किया है?
उत्तर: हाथियों को बार-बार खदेड़ने और प्रताड़ित करने से उनका व्यवहार आक्रामक हो जाता है। इससे मानव-हाथी संघर्ष बढ़ता है और बेकसूर लोगों की जान व माल को खतरा पैदा होता है।
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