रायपुर समेत पूरे राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश का बदला नियम

Umeshwari Baghel | Jun 23, 2026, 09:36 IST
इंजीनियरिंग एडमिशन का नया नियम
छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए अब मूल निवासी प्रमाण पत्र जरूरी कर दिया गया है। इस नियम के बाद तहसीलों में आवेदन दोगुना हो गया है। राज्य के 34 कॉलेजों की 11,514 सीटों पर काउंसिलिंग होगी।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur। रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया इस बार एक नए नियम के कारण सुर्खियों में है। तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए मूल निवासी प्रमाण पत्र (डोमिसाइल सर्टिफिकेट) जरूरी कर दिया गया है। इस वजह से तहसील दफ्तरों में ऑनलाइन आवेदन करने वालों की भीड़ लग रही है।



राज्यभर में कुल 34 इंजीनियरिंग कॉलेजों की लगभग 11,514 सीटों पर इस साल प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन काउंसिलिंग के माध्यम से की जाएगी। पीईटी (Pre Engineering Test) के परिणाम घोषित होने के बाद अब काउंसिलिंग की तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन मूल निवासी प्रमाण पत्र की अनिवार्यता ने प्रक्रिया को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।



प्रमाण पत्र के लिए तहसीलों में बढ़ा दबाव, आवेदन हुए दोगुने

प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार रायपुर तहसील में सामान्य दिनों में मूल निवासी प्रमाण पत्र के लिए लगभग 100 से 150 आवेदन आते थे, जिन्हें 10 से 15 दिनों में निपटाया जाता था। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में यह आंकड़ा तेजी से बढ़कर 250 से ऊपर हो गया है।



छात्र और उनके परिजन लगातार तहसील कार्यालयों और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर रहे हैं ताकि प्रवेश प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। अधिकारियों का कहना है कि जिन आवेदकों के दस्तावेज पूरे हैं, उन्हें प्रमाण पत्र तत्काल जारी किया जा रहा है, जबकि जिनके दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें ऑनलाइन सिस्टम के माध्यम से आवश्यक जानकारी भेजी जा रही है।



तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने नियम को पहले ही कर दिया था स्पष्ट

तकनीकी शिक्षा संचालनालय के अनुसार यह नियम कोई नया नहीं है, बल्कि प्रवेश प्रक्रिया की शुरुआत से ही इसकी जानकारी सार्वजनिक कर दी गई थी। विभाग का कहना है कि राज्य के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में मूल निवासी प्रमाण पत्र अनिवार्य शर्त के रूप में लागू किया गया है ताकि प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और राज्य के पात्र छात्रों को प्राथमिकता मिल सके।



एडिशनल डायरेक्टर अभिताभ दुबे ने स्पष्ट किया कि यह नियम सभी कॉलेजों पर समान रूप से लागू है और इसके बिना किसी भी छात्र को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रक्रिया जल्द ही शुरू की जाएगी और इसकी विस्तृत सूचना जारी की जा रही है।



कोरोना के बाद घटते कॉलेज और सीटों की बदलती तस्वीर

छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग शिक्षा की स्थिति पिछले कुछ वर्षों में काफी बदली है। वर्ष 2018-19 में राज्य में 47 इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित थे, जिनमें बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग की कुल सीटें लगभग 18,529 थीं। लेकिन कोरोना महामारी के बाद कई कॉलेज बंद हो गए या उनमें दाखिले कम हो गए, जिसके चलते अब कॉलेजों की संख्या घटकर 34 रह गई है।



इसके साथ ही सीटों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है। हालांकि, सरकार ने प्रवेश को सरल बनाने और सीटों को भरने के उद्देश्य से कई नियमों में बदलाव किए हैं, जिनमें अधिकतम आयु सीमा हटाना भी शामिल है। पहले 30 वर्ष तक की आयु सीमा निर्धारित थी, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है, जिससे अधिक उम्र के युवा भी इंजीनियरिंग में प्रवेश ले सकते हैं।



काउंसिलिंग प्रक्रिया और छात्रों की बढ़ती उम्मीदें

PET का रिजल्ट आ चुका है और अब विभाग जल्द ही ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू करने की तैयारी में है। राज्य की 11,514 सीटों पर दाखिले के लिए यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। विभाग का मानना है कि इससे प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।



हालांकि मूल निवासी प्रमाण पत्र की अनिवार्यता ने छात्रों के बीच तैयारी का दबाव बढ़ा दिया है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता देने की नीति पर सख्ती से अमल कर रही है। यही कारण है कि आवेदन प्रक्रिया में तेजी देखी जा रही है और तहसील कार्यालयों में भीड़ बढ़ गई है।



IMP FACTS

राज्य में 34 इंजीनियरिंग कॉलेजों की 11,514 सीटों पर एडमिशन होगा।



मूल निवासी प्रमाण पत्र अब अनिवार्य कर दिया गया है।



रायपुर में आवेदन पहले 100–150 थे, अब 250 से ज्यादा हो गए हैं।



पहले 47 कॉलेज थे, अब घटकर 34 रह गए हैं।



कोरोना के बाद कॉलेज और सीटों की संख्या कम हुई है।



उम्र सीमा हटाकर 30 साल से ज्यादा उम्र वालों को भी मौका दिया गया है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में इंजीनियरिंग प्रवेश प्रक्रिया इस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है। मूल निवासी प्रमाण पत्र की अनिवार्यता ने जहां प्रशासनिक स्तर पर काम का दबाव बढ़ा दिया है, वहीं छात्रों के बीच भी इसे लेकर जागरूकता और सक्रियता बढ़ी है। आने वाले दिनों में काउंसिलिंग शुरू होने के साथ ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह नियम प्रवेश प्रक्रिया को कितना प्रभावित करता है और छात्रों के लिए क्या नए अवसर लेकर आता है।



FAQ

  1. क्या इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए मूल निवासी प्रमाण पत्र जरूरी है?
    हां, छत्तीसगढ़ के सभी इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश के लिए मूल निवासी प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बिना एडमिशन नहीं मिलेगा।
  2. इस साल कितनी सीटों पर प्रवेश होगा?
    राज्य के 34 इंजीनियरिंग कॉलेजों में करीब 11,514 सीटों पर ऑनलाइन काउंसिलिंग के जरिए प्रवेश दिया जाएगा।
  3. आवेदन में बढ़ोतरी क्यों हुई है?
    नए नियम के कारण छात्र मूल निवासी प्रमाण पत्र बनवा रहे हैं, जिससे ऑनलाइन आवेदन दोगुने हो गए हैं।

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