छत्तीसगढ़ आबकारी और भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला ; ED ने खंगाले 17 ठिकाने
NEWS IN SHORT
- 17 किलो सोना और 3 करोड़ के हीरे।
- भाजपा नेता चतुर्भुज राठी के ठिकानों पर दबिश।
- भारतमाला प्रोजेक्ट में अफसरों की भूमिका की गहन जांच।
- रायपुर, दुर्ग और भिलाई समेत 6 शहरों में छापेमारी।
- शराब कारोबारी अनवर ढेबर के करीबियों पर कसा शिकंजा।
NEWS IN DETAIL
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया। जांच एजेंसी ने प्रदेश के छह प्रमुख शहरों—रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, दुर्ग, भिलाई और अंबिकापुर में एक साथ 17 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुख्य रूप से दो बड़े मामलों—भारतमाला सड़क परियोजना मुआवजा घोटाला और बहुचर्चित आबकारी घोटाला पर केंद्रित रही।
बिलासपुर में कुबेर का खजाना
छापेमारी की सबसे चौंकाने वाली खबर बिलासपुर से आई। यहाँ ईडी की टीम सराफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के ठिकानों पर पहुँची। विवेक, फरार आरोपी विकास अग्रवाल (सिब्बू) का भाई है। सूत्रों के मुताबिक, तलाशी के दौरान वहां से 17 किलो सोना और लगभग 3 करोड़ रुपए के हीरों के हार समेत भारी मात्रा में नकदी बरामद की गई है। गौरतलब है कि विकास अग्रवाल, जेल में बंद शराब कारोबारी अनवर ढेबर का करीबी है और पिछले चार वर्षों से फरार है।
नेताओं और ठेकेदारों पर कसा शिकंजा
ईडी की रडार पर भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों से जुड़े रसूखदार लोग रहे:
भाजपा नेता चतुर्भुज राठी (अमर इंफ्रा): दुर्ग में अमर इंफ्रा के डायरेक्टर और भाजपा नेता चतुर्भुज राठी के घर और दफ्तरों की तलाशी ली गई। राठी ने दोनों ही सरकारों के कार्यकाल में बड़े ठेके लिए हैं। टीम ने यहाँ से हार्ड डिस्क और वित्तीय दस्तावेज जब्त किए हैं।
कांग्रेसी नेता और सीए: रायपुर और अंबिकापुर में कांग्रेस नेताओं और उनके करीबियों के यहाँ दबिश दी गई। अंबिकापुर में एक रिश्तेदार के पास से बड़ी नकद राशि मिलने की सूचना है।
गोविंद मंडल (भिलाई): भिलाई के कारोबारी गोविंद मंडल के यहाँ भी टीम पहुँची, जिन पर एक ही पते पर दो फैक्ट्रियां चलाने और नियमों के उल्लंघन का आरोप है।
भारतमाला प्रोजेक्ट घोटाला
भारतमाला सड़क परियोजना में हुए भूमि अधिग्रहण मुआवजे में बड़े पैमाने पर धांधली की शिकायत थी। इस मामले में ईडी ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ के 12 जिलों (रायपुर, बस्तर, दुर्ग, राजनांदगांव आदि) के तत्कालीन कलेक्टरों और राजस्व अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि अफसरों और बिचौलियों ने मिलकर मुआवजे की राशि में करोड़ों का बंदरबांट किया।
निष्कर्ष
देर रात तक चली इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्रीय एजेंसियां अब भ्रष्टाचार के इन मामलों में सीधे सफेदपोशों और बड़े नौकरशाहों पर शिकंजा कसने की तैयारी में हैं। जहाँ एक ओर करोड़ों की बेनामी संपत्ति उजागर हो रही है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक हलकों में इस छापेमारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।