सोम डिस्टिलरीज पर कसता शिकंजा, अब सिस्टर कंसर्न कंपनियों को भी नोटिस
मध्य प्रदेश में जिस सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस सस्पेंड हो चुका है, वहीं अब छत्तीसगढ़ में उससे जुड़ी कंपनियों पर भी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। छत्तीसगढ़ के महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने अपनी कानूनी राय आबकारी विभाग को भेज दी है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि न्याय को ध्यान में रखते हुए विभाग अपने विवेक से निर्णय ले। यानी अब गेंद पूरी तरह आबकारी विभाग के पाले में है।
इधर आबकारी आयुक्त एल्मा ने भी कहा कि मामला अब सिर्फ सोम डिस्टिलरीज तक सीमित नहीं है। विभाग ने सोम डिस्टिलरीज से जुड़ी उसकी सिस्टर कंसर्न कंपनियों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नोटिस में सीधा सवाल पूछा गया है कि जब मूल कंपनी का लाइसेंस निरस्त हो चुका है, तब आखिर उनकी शराब छत्तीसगढ़ में क्यों बेची जाए?
एक ही डायरेक्टर… तो कार्रवाई अलग कैसे?
आबकारी आयुक्त एल्मा ने नोटिस जारी करने की वजह भी स्पष्ट कर दी है। उनका कहना है कि सोम और उससे जुड़ी दूसरी कंपनी सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज ओडिसा प्राइवेट लिमिटेड और लीजेंड डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड में कई डायरेक्टर समान हैं। जगदीश कुमार अरोरा का नाम इन तीनों ही कंपनियों के डायरेक्टर की सूची में शामिल हैं। ठीक उसी तरह ओडिसा की कंपनी में उनके पुत्र दीपक अरोरा भी संचालक के रूप में जुड़े हुए हैं। यानी कंपनी का नेटवर्क अलग-अलग नामों से काम कर रहा है, लेकिन नियंत्रण एक ही समूह के हाथ में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सिर्फ नाम बदलकर या सिस्टर कंसर्न बनाकर कार्रवाई से बचा जा सकता है? यही वजह है कि विभाग ने अब उन कंपनियों से भी जवाब मांगा है जो छत्तीसगढ़ में सप्लाई कर रही थीं। विभाग का कहना है कि जवाब आते ही तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
अब आबकारी विभाग पर भी उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर जब मध्य प्रदेश में कंपनी पर कार्रवाई हो चुकी थी। हाई कोर्ट भी लाइसेंस सस्पेंशन को सही ठहरा चुका था, तब छत्तीसगढ़ में इन्हीं कंपनियों को सप्लायर रजिस्ट्रेशन और लैंडिंग प्राइस प्रक्रिया में शामिल कैसे कर लिया गया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग को पहले से सारी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर आंखें बंद रखी गई। क्योंकि अब खुद आबकारी विभाग यह मान रहा है कि कंपनियों के डायरेक्टर और कारोबारी कनेक्शन आपस में जुड़े हुए हैं।
फर्जी परमिट से शराब सिंडिकेट तक
सोम पर सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी के आरोप नहीं थे। मध्य प्रदेश में कंपनी पर फर्जी एक्साइज परमिट, अवैध शराब परिवहन और गंभीर आपराधिक मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। इन्हीं मामलों के बाद फरवरी 2026 में कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड किया गया था। बाद में हाई कोर्ट ने भी कंपनी को राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में उसी समूह की कंपनियों को कारोबार की छूट मिलना अब बड़े शराब सिंडिकेट की आशंका को जन्म दे रहा है।
अब क्या होगा
अब पूरा मामला (Som Distilleries news) छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के अगले फैसले पर टिक गया है। महाधिवक्ता अपनी राय दे चुके हैं। आबकारी आयुक्त नोटिस जारी कर चुके हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग सिर्फ नोटिस देकर मामला ठंडा करता है या फिर वास्तव में इन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर बड़ा एक्शन लेता है।
FAQ
- सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस क्यों सस्पेंड किया गया?
मध्य प्रदेश में सोम डिस्टिलरीज पर फर्जी एक्साइज परमिट, अवैध शराब परिवहन और अन्य गंभीर अनियमितताओं के आरोपों के बाद उसका लाइसेंस सस्पेंड किया गया था। - सोम डिस्टिलरीज मामले में छत्तीसगढ़ में क्या कार्रवाई हो रही है?
छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग ने सोम डिस्टिलरीज से जुड़ी सिस्टर कंसर्न कंपनियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और उनकी भूमिका की जांच शुरू कर दी है। - सोम डिस्टिलरीज को छत्तीसगढ़ में शराब बेचने की परमिशन कैसे मिली?
छत्तीसगढ़ में सोम डिस्टिलरीज से जुड़ी कंपनियों को सप्लायर रजिस्ट्रेशन और लैंडिंग प्राइस प्रक्रिया के तहत अनुमति दी गई थी, हालांकि अब कंपनी के मध्य प्रदेश में लाइसेंस सस्पेंशन और कारोबारी लिंक सामने आने के बाद इस अनुमति की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं और जांच जारी है।
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