ब्लैकलिस्टेड कंपनी छत्तीसगढ़ में करेगी शराब सप्लाई, सोम डिस्टलरी पर सरकार मेहरबान
VINAY VERMA | Apr 08, 2026, 11:36 IST
Blacklisted Company Som Distilleries Supply Liquor in Chhattisgarh
मध्य प्रदेश में सस्पेंड सोम डिस्टिलरीज को छत्तीसगढ़ में शराब सप्लाई का ठेका मिला है। कंपनी पर अवैध शराब परिवहन और फर्जी परमिट के आरोप हैं, बावजूद इसके विभाग ने कंपनी को सप्लायर बना लिया।
छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग ने मध्य प्रदेश में ब्लैकलिस्टेड कंपनी को शराब सप्लाई की मंजूरी दी है। सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस एमपी में सस्पेंड हो चुका है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में इसे हरी झंडी मिल गई है। यह मामला अब तूल पकड़ रहा है और नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। हमने इस मामले में आबकारी विभाग की आयुक्त और सचिव आर सगीता से सवाल पूछा, जवाब आया ओके, मीटिंग में हूं, थैंक्यू...
एमपी में सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस सस्पेंड है
फर्जी परमिट और अवैध शराब परिवहन का आरोप है
हाईकोर्ट ने भी लाइसेंस निलंबन को सही बताया है
लेकिन छत्तीसगढ़ ने 2026-27 के लिए सप्लायर बना दिया
वैध लाइसेंस वाली कंपनियां ही सप्लायर बन सकती हैं।
छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग में एक बार फिर बड़ी लापरवाही देखने को मिली है। विभाग ने उन कंपनियों को काम दे दिया है जो बाहर बैन हैं। यह मामला सीधे तौर पर नियमों को ताक पर रखने जैसा है।
मध्य प्रदेश में जिन कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड हैं, उन्हें यहां एंट्री मिली है। इन कंपनियों को साल 2026-27 के लिए सप्लायर के तौर पर चुना गया है। अब इस फैसले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज लिमिटेड पर एमपी में एक्शन हुआ था। फरवरी 2026 को इस कंपनी का लाइसेंस एमपी में सस्पेंड हुआ था। यह कार्रवाई एक आपराधिक मामले में सजा मिलने के बाद हुई थी।
कंपनी पर फर्जी एक्साइज परमिट बनाने के आरोप साबित हो चुके हैं। इसके अलावा अवैध शराब के परिवहन जैसे गंभीर मामले भी सामने आए थे। एमपी सरकार ने इन कारणों से कंपनी पर कड़ा प्रतिबंध लगाया था।
मध्य प्रदेश आबकारी आयुक्त ने कंपनी के लाइसेंस को रद्द करने का फैसला लिया था। इसके खिलाफ कंपनी कोर्ट गई थी लेकिन उसे वहां से राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने 23 मार्च 2026 को निलंबन बरकरार रखने का आदेश दिया।
कोर्ट के आदेश के बाद भी छत्तीसगढ़ में कंपनी की राह आसान रही। विभाग ने कंपनी की ओडिशा यूनिट और एक सहयोगी को लिस्ट में जोड़ा है। इन्हें छत्तीसगढ़ की लैंडिंग प्राइस लिस्ट में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है।
आबकारी विभाग की शर्तों के मुताबिक सप्लायर बनना इतना आसान नहीं है। केवल वही कंपनियां योग्य हैं जो कानूनी रूप से उत्पादन कर रही हों। इसके लिए कंपनी के पास हर राज्य में वैध लाइसेंस होना अनिवार्य है।
नियमों के अनुसार दस्तावेजों में कोई भी कमी होने पर आवेदन रद्द होना चाहिए। लेकिन यहां निलंबित लाइसेंस वाली कंपनी का चयन कर लिया गया। जानकारों का कहना है कि यह विभाग के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
इस पूरे मामले ने आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिया है। जब एक कंपनी दूसरे राज्य में बैन है, तो उसे यहां काम कैसे मिला? क्या अधिकारियों ने कंपनी के पुराने रिकॉर्ड की जांच नहीं की थी?
छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर पहले भी कई विवाद हो चुके हैं। ऐसे में विवादित कंपनी को मौका देना विभाग को भारी पड़ सकता है।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। लोग इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। द सूत्र ने जब आबकारी विभाग की आयुक्त आर संगीता से सवाल पूछा तो वे मीटिंग में होना बता, जवाब नहीं दिया। हमने मैसेज मे पूरा सवाल भेजा फिर भी उन्होंने जवाब नहीं दिया।
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पांच प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
फर्जी परमिट और अवैध शराब परिवहन का आरोप है
हाईकोर्ट ने भी लाइसेंस निलंबन को सही बताया है
लेकिन छत्तीसगढ़ ने 2026-27 के लिए सप्लायर बना दिया
वैध लाइसेंस वाली कंपनियां ही सप्लायर बन सकती हैं।
आबकारी विभाग का कारनामा
मध्य प्रदेश में जिन कंपनियों के लाइसेंस सस्पेंड हैं, उन्हें यहां एंट्री मिली है। इन कंपनियों को साल 2026-27 के लिए सप्लायर के तौर पर चुना गया है। अब इस फैसले को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
सोम डिस्टिलरीज पर एमपी में कार्रवाई
कंपनी पर फर्जी एक्साइज परमिट बनाने के आरोप साबित हो चुके हैं। इसके अलावा अवैध शराब के परिवहन जैसे गंभीर मामले भी सामने आए थे। एमपी सरकार ने इन कारणों से कंपनी पर कड़ा प्रतिबंध लगाया था।
हाईकोर्ट ने कार्रवाई को सही बताया
कोर्ट के आदेश के बाद भी छत्तीसगढ़ में कंपनी की राह आसान रही। विभाग ने कंपनी की ओडिशा यूनिट और एक सहयोगी को लिस्ट में जोड़ा है। इन्हें छत्तीसगढ़ की लैंडिंग प्राइस लिस्ट में आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है।
आबकारी विभाग के कड़े नियम
नियमों के अनुसार दस्तावेजों में कोई भी कमी होने पर आवेदन रद्द होना चाहिए। लेकिन यहां निलंबित लाइसेंस वाली कंपनी का चयन कर लिया गया। जानकारों का कहना है कि यह विभाग के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
अनदेखी से उठ रहे हैं गंभीर सवाल
छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर पहले भी कई विवाद हो चुके हैं। ऐसे में विवादित कंपनी को मौका देना विभाग को भारी पड़ सकता है।
बढ़ सकती हैं मुश्किलें
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