छत्तीसगढ़ में दमकल विभाग सुस्त : आधे वाहन खराब, 124 करोड़ लैप्स होने की कगार पर
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में उपलब्ध 150 दमकल वाहनों में से आधे खराब हैं।
- प्रदेश के 6 जिलों और 146 ब्लॉकों में फायर स्टेशन नहीं हैं।
- सुधार के लिए मिले 147 करोड़ रुपए प्रशासनिक सुस्ती से दबे रहे।
- 30 जून तक बजट खर्च न होने पर राशि लैप्स हो जाएगी।
- दमकल देरी से पहुंचने से दुर्ग और रायपुर में बड़े हादसे हुए।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में बदहाल फायर सिस्टम और प्रशासनिक सुस्ती के कारण केंद्र व राज्य सरकार से मिले 147 करोड़ रुपए लैप्स होने की कगार पर हैं। प्रदेश के 6 जिलों और 146 ब्लॉकों में आज भी एक भी फायर स्टेशन नहीं है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध 150 दमकल वाहनों में से आधे खराब पड़े हैं। इस बड़ी लापरवाही के कारण राज्य में लगातार भीषण हादसे हो रहे हैं और जान-माल का भारी नुकसान हो रहा है।
147 करोड़ की भारी-भरकम राशि और लेटलतीफी का सफर
केंद्र सरकार ने साल 2023-24 में 15वें वित्त आयोग के माध्यम से देश भर में फायर सिस्टम सुधार के लिए 5,000 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। इसमें 75% केंद्र और 25% राज्य की हिस्सेदारी के तहत छत्तीसगढ़ को कुल 147 करोड़ रुपए (110 करोड़ केंद्र और 37 करोड़ राज्य) मिले थे। इस राशि का उपयोग तीन साल के भीतर नए फायर स्टेशन बनाने, आधुनिक गाड़ियां खरीदने और ट्रेनिंग सेंटर्स को अपग्रेड करने के लिए किया जाना था, लेकिन यह समय सिर्फ कागजी फाइलों में बीत गया।
साल 2023-24 : आपदा प्रबंधन विभाग साल भर केवल टेंडर की प्रक्रिया और नियम तय करने के आपसी विवादों में उलझा रहा।
साल 2024-25 : मुख्य सचिव की बैठक में तय हुआ कि यदि आपदा विभाग काम नहीं कर पा रहा, तो काम दूसरी एजेंसी को सौंप दिया जाए।
साल 2025-26 : नगर सेना लगातार राशि की मांग करती रही, पर आपदा विभाग खुद खरीदी करने पर अड़ा रहा। जनवरी 2026 में 'ई-वाई' नामक कंसल्टेंसी कंपनी को 80 लाख रुपए में अनुबंधित किया गया। उसे 43 लाख का भुगतान भी हुआ, लेकिन उसके प्रोजेक्ट पर विभाग सहमति नहीं बना सका और यह राशि बेकार चली गई।
30 जून की डेडलाइन और लैप्स होने का खतरा
मार्च 2026 में वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर जब यह राशि लैप्स होने लगी, तो आपदा विभाग के अनुरोध पर केंद्र ने विशेष परिस्थितियों में इसे 'के-डिपॉजिट' में रखने की अनुमति दी। केंद्र ने सख्त शर्त रखी कि यह राशि हर हाल में 30 जून 2026 तक खर्च हो जानी चाहिए। इसके बाद 8 अप्रैल 2026 को 124 करोड़ रुपए नगर सेना को सौंपे गए।
जून की शुरुआत होने के बावजूद नगर सेना बड़ी दमकल गाड़ियों के लिए मुख्य टेंडर जारी नहीं कर पाई है। कुछ छोटे टेंडर निकाले जरूर गए हैं, जो 30 जून तक फाइनल नहीं हो सकेंगे। ऐसे में करीब 150 नई दमकल गाड़ियां आने का रास्ता बंद होना और 124 करोड़ रुपए केंद्र को वापस लौटना तय माना जा रहा है।
6 जिलों में फायर स्टेशन नहीं
विधानसभा में सरकार ने स्वीकार किया था कि प्रदेश के केवल 27 जिलों में ही फायर स्टेशन हैं। नए बने 6 जिलों—गोरेला-पेंड्रा-मरवाही, खैरागढ़-छुईखदान, मोहला-मानपुर, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में आज भी कोई सेटअप नहीं है। प्रदेश के कलेक्टरों ने जिलों की बदहाली को देखते हुए आपदा विभाग से 210 करोड़ रुपए की मांग की थी और सुझाव दिया था कि राशि सीधे जिलों को आवंटित की जाए, लेकिन विभाग पैसा दबाकर बैठा रहा।
समय पर गाड़ियां नहीं पहुंचने से प्रदेश में बड़े हादसे
दुर्ग में सिलेंडर ब्लास्ट (12 मई 2026) : कुम्हारी में एक घरेलू सिलेंडर ब्लास्ट में दमकल के समय पर न पहुंचने के कारण एक ही परिवार के 4 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई।
रायपुर मेटल पार्क में आग (29 मई 2026) : उरला औद्योगिक क्षेत्र की 'आरती फूड्स फैक्ट्री' में भीषण आग लगी। औद्योगिक क्षेत्र होने के बाद भी गाड़ियां वक्त पर नहीं पहुंचीं, जिससे आग बुझाने में साढ़े आठ घंटे का समय लगा और पूरी फैक्ट्री खाक हो गई।
TIMELINE
- 2023-24: ₹147 करोड़ मिले, लेकिन विभाग टेंडर नियमों के विवाद में उलझा रहा।
- 2024-25: काम ठप देख मुख्य सचिव ने एजेंसी बदलने का सुझाव दिया।
- जनवरी 2026: 'ई-वाई' कंसल्टेंसी को ₹43 लाख दिए, पर प्रोजेक्ट फेल रहा।
- मार्च 2026: बजट बचाने के लिए केंद्र ने राशि 'के-डिपॉजिट' में डाली।
- 8 अप्रैल 2026: आपदा विभाग ने ₹124 करोड़ नगर सेना को ट्रांसफर किए।
- 30 जून 2026: खर्च की आखिरी डेडलाइन; टेंडर न होने से बजट लैप्स होना तय।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में फायर सिस्टम की यह बदहाली प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी और आपसी खींचतान का नतीजा है। आपदा प्रबंधन विभाग की लेटलतीफी के कारण न केवल 124 करोड़ रुपए का केंद्रीय बजट वापस लौटने की कगार पर है, बल्कि प्रदेश की जनता को अपनी जान-माल की कीमत चुकाकर इसकी भारी सजा भुगतनी पड़ रही है।
FAQ
- 15वें वित्त आयोग के तहत छत्तीसगढ़ को फायर सिस्टम सुधार के लिए कुल कितनी राशि मिली थी?
उत्तर: कुल 147 करोड़ रुपए (जिसमें 75% केंद्र की हिस्सेदारी के रूप में 110 करोड़ रुपए और 25% राज्य की हिस्सेदारी के रूप में 37 करोड़ रुपए शामिल थे)। - केंद्र सरकार द्वारा बजट खर्च करने की अंतिम समय-सीमा (Deadline) क्या तय की गई है?
उत्तर: 30 जून 2026। यदि इस तारीख तक राशि खर्च नहीं हुई, तो बची हुई 124 करोड़ रुपए की राशि लैप्स (वापस) हो जाएगी। - छत्तीसगढ़ में कुल उपलब्ध दमकल वाहनों की संख्या कितनी है और उनमें से कितने खराब हैं?
उत्तर: प्रदेश में कुल 150 दमकल वाहन उपलब्ध हैं, जिनमें से आधे (लगभग 75 वाहन) खराब पड़े हैं। - छत्तीसगढ़ के कुल कितने जिलों में फायर स्टेशन की सुविधा उपलब्ध है?
उत्तर: विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, प्रदेश के केवल 27 जिलों में ही फायर स्टेशन चालू स्थिति में हैं।
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