गारे पालमा में होगा खनन : सुप्रीम कोर्ट ने पलटा NGT का फैसला
Raipur : सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले स्थित गारे पालमा (सेक्टर-II) कोयला खदान से जुड़े मामले में महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) को बड़ी राहत देते हुए खनन कार्य जारी रखने की अनुमति दे दी है। हालांकि शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया नई जनसुनवाई के बिना पूरी नहीं मानी जाएगी।
अदालत ने नई जनसुनवाई कराए जाने की निगरानी का जिम्मा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंप दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि परियोजना से जुड़ी अधिकांश आवश्यक शर्तों का पहले ही पालन किया जा चुका है। ऐसे में केवल इस आधार पर कि नई जनसुनवाई अभी तक नहीं कराई गई है, खनन गतिविधियों को पूरी तरह रोकना उचित नहीं होगा। अदालत ने माना कि जनसुनवाई पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसे हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए।
अफ्रेश शब्द की व्याख्या भी स्पष्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनजीटी के पहले दिए गए आदेश में प्रयुक्त अफ्रेश शब्द की भी व्याख्या की। अदालत ने कहा कि इसका स्पष्ट अर्थ है कि संबंधित अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया नई सिरे से शुरू करते हुए सार्वजनिक जनसुनवाई आयोजित करनी थी। चूंकि यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, इसलिए पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर सवाल बने हुए हैं। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि केवल जनसुनवाई लंबित होने के आधार पर खनन कार्य पूरी तरह बंद कर देना उचित नहीं माना जा सकता।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद उस पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ा है, जो 11 जुलाई 2022 को महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड को गारे पालमा (सेक्टर-II) कोयला खदान के लिए प्रदान की गई थी। इस मंजूरी को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने 15 जनवरी 2024 को रद्द कर दिया था। एनजीटी ने अपने आदेश में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को निर्देश दिया था कि पूरे मामले की दोबारा समीक्षा की जाए और नई जनसुनवाई से प्रक्रिया शुरू की जाए।
ट्रिब्यूनल का मानना था कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी किए बिना पर्यावरणीय मंजूरी देना पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप नहीं था। एनजीटी के इसी फैसले को महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कंपनी को फिलहाल खनन जारी रखने की राहत दी, लेकिन नई जनसुनवाई कराने की अनिवार्यता भी बरकरार रखी।
एनजीटी करेगा पूरी प्रक्रिया की निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण को आगे की सुनवाई और जरूरी कार्रवाई के लिए भोपाल स्थित एनजीटी की केंद्रीय पीठ को सौंप दिया है। कोर्ट ने एनजीटी को नई जनसुनवाई प्रक्रिया पर नजर रखने और प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार फैसला लेने के निर्देश दिए हैं। यदि दोनों पक्ष पर्यावरण या अन्य कानूनी पहलुओं से जुड़े कोई अतिरिक्त मुद्दे उठाते हैं तो एनजीटी उन पर भी तथ्य और मेरिट के आधार पर निर्णय कर सकेगा। इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को एनजीटी में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल को विवाद का शीघ्र समाधान करने के निर्देश भी दिए हैं।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक बार फिर यह संकेत देता है कि विकास परियोजनाओं को पूरी तरह रोकना न्यायपालिका का उद्देश्य नहीं है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों की अनदेखी भी स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने साफ किया कि उद्योग और विकास कार्य जारी रह सकते हैं, लेकिन पर्यावरणीय मंजूरी, जनभागीदारी और सार्वजनिक परामर्श जैसी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होगा। यह फैसला भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि आर्थिक गतिविधियों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है।
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट ने गारे पालमा कोयला खदान पर क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने महाजेनको को गारे पालमा सेक्टर-II कोयला खदान में खनन जारी रखने की अनुमति दे दी है। हालांकि नई जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। - नई जनसुनवाई की निगरानी कौन करेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने नई जनसुनवाई प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी भोपाल स्थित एनजीटी की केंद्रीय पीठ को सौंपी है। - एनजीटी ने पहले पर्यावरण मंजूरी क्यों रद्द की थी?
एनजीटी ने माना था कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी किए बिना पर्यावरणीय मंजूरी दी गई थी। इसलिए उसने मंजूरी की दोबारा समीक्षा और नई जनसुनवाई के निर्देश दिए थे।
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