छह साल से अधूरा पुल, बच्चों की जान जोखिम में, NHRC ने CS से मांगा जवाब

VINAY VERMA | Sept 10, 2026, 16:05 IST
मुख्य सचिव को नोटिस जारी
गरियाबंद में अधूरे पुल के कारण स्कूली बच्चों को पैरी नदी पार करने के लिए संकरी और फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ रहा है। करीब 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण छह साल से अधूरा है।

गरियाबंद के मैनपुर में अधूरे पुल ने स्कूली बच्चों के बाद छग के मुख्य सचिव विकासशील की भी मुश्किल बढ़ा दी है। स्कूल जाने के लिए बच्चों को पैरी नदी पार करनी पड़ रही है। इसके लिए वे अधूरे पुल से लगी संकरी और फिसलन भरी लोहे की सीढ़ी का सहारा लेते हैं। मामला सामने आने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने खुद संज्ञान लिया है। आयोग ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को नोटिस भेजकर दो सप्ताह में पूरी रिपोर्ट मांगी है।



खतरे का रास्ता

मैनपुर विकासखंड के खंभाठा और आसपास के गांवों के दर्जनों बच्चे इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। सामान्य दिनों में कम पानी वाली पैरी नदी मानसून में अचानक तेज बहाव वाली हो जाती है। ऐसे में लोहे की सीढ़ी से नदी पार करना बच्चों के लिए किसी खतरे से कम नहीं है। फिसलन बढ़ने पर एक छोटी सी चूक भी भारी पड़ सकती है।



छह साल से काम अधूरा

3 सितंबर 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देहारगुड़ा और खंभाठा के बीच करीब 300 मीटर लंबे पुल का निर्माण लगभग छह साल से चल रहा है। इतने लंबे समय में भी पुल पूरा नहीं हुआ। ग्रामीणों को करीब एक साल पहले छह महीने में काम पूरा करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन वह समय भी निकल गया और पुल अधूरा ही रह गया।



NHRC ने पूछा सवाल

मीडिया रिपोर्ट को गंभीर मानते हुए आयोग ने राज्य सरकार से पुल की देरी का पूरा ब्योरा मांगा है। साथ ही यह भी बताने को कहा है कि बच्चों और ग्रामीणों को किस तरह के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। आयोग ने साफ संकेत दिया है कि अगर रिपोर्ट में सामने आए तथ्य सही पाए गए तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला हो सकता है।



जवाबदेही तय होगी?

NHRC की कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल निर्माण की रफ्तार पर उठ रहा है। छह साल में करीब 300 मीटर का पुल पूरा नहीं हो पाया। इस बीच बच्चे जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते रहे। ग्रामीण भी इसी रास्ते पर निर्भर हैं। अब मुख्य सचिव को आयोग के सामने पूरी स्थिति रखनी होगी और बताना होगा कि पुल कब तक पूरा होगा।



मानसून में बढ़ा खतरा

बारिश के दिनों में यह रास्ता और खतरनाक हो जाता है। नदी का बहाव तेज होने के साथ सीढ़ियां फिसलन भरी हो जाती हैं। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना सबसे जरूरी है। छभ्त्ब् के नोटिस ने इस मामले को स्थानीय परेशानी से उठाकर सीधे मानवाधिकार के सवाल तक पहुंचा दिया है।



अब दो हफ्ते का हिसाब

आयोग ने मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा है। इसमें पुल निर्माण में देरी, मौजूदा हालात और बच्चों-ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी देनी होगी। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार रिपोर्ट में क्या जवाब देती है और छह साल से अधूरे पड़े इस पुल को पूरा करने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।



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