छत्तीसगढ़ नक्सल बंदी केस पर सरकार का फैसला, बारह सौ होंगे रिहा
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल मामलों में बड़ी पहल की है। जेलों में बंद बारह सौ से ज्यादा बंदियों को राहत मिलेगी। सामान्य प्रकृति के मामलों के केस वापस लिए जाएंगे। इसके लिए हर जिले में कानूनी समीक्षा बैठक होगी। गंभीर हिंसा में शामिल कैदियों को छोड़ना मुमकिन नहीं होगा।
कैदियों के केस होंगे वापस
छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। जेलों में बंद करीब ढाई हजार से अधिक बंदी हैं। इनमें से बारह सौ से अधिक आरोपियों को राहत दी जाएगी। इनके खिलाफ दर्ज छोटे मामलों को वापस लिया जाएगा।
गृहमंत्री विजय शर्मा ने इसके लिए कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने हर एक बंदी के केस की समीक्षा करने को कहा है। सरकार ऐसे सभी मामलों की पूरी कानूनी जांच कराएगी। इसके बाद ही केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू होगी।
अधिकारियों की संयुक्त टीम बनेगी
इस काम के लिए एक विशेष टीम का गठन होगा। इसमें विधि विभाग और अभियोजन के अधिकारी शामिल होंगे। पुलिस अधिकारियों को भी इस टीम में रखा जाएगा। यह संयुक्त टीम हर एक केस की बारीकी से जांच करेगी।
हर सप्ताह संबंधित जिले में समीक्षा बैठक बुलाई जाएगी। यह बैठक पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित की जाएगी। बैठक में एक-एक केस की फाइल देखी जाएगी। इसके बाद ही केस वापसी पर अंतिम निर्णय होगा।
मंत्रालय में पुलिस विभाग की एक बड़ी समीक्षा बैठक हुई। यह बैठक गृह एवं उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस दौरान केस वापसी की रूपरेखा तय की गई।
गंभीर मामलों में नहीं मिलेगी छूट
सरकार ने बैठक में एक बात बिल्कुल साफ कर दी है। गंभीर अपराध करने वालों को कोई राहत नहीं मिलेगी। हत्या और बड़े नक्सली हमलों के आरोपी जेल में रहेंगे। गंभीर हिंसा वाले मामलों को इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।
केवल सामान्य प्रकृति के नक्सल मामलों पर ही विचार होगा। इसके लिए विधि विभाग (Law Department) की मदद ली जाएगी। शासकीय वकीलों और अभियोजन अधिकारियों की विशेष टीम बनेगी। यही टीम अदालत में आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी करेगी।
राज्य की जेलों में कई लोग वर्षों से बंद हैं। इन लोगों पर कोई गंभीर हिंसक अपराध दर्ज नहीं है। इसलिए प्रत्येक मामले की अलग से कानूनी जांच जरूरी है। जांच पूरी होने के बाद ही अदालत में आवेदन दिया जाएगा।
जन मिलिशिया सदस्यों को राहत
जेलों में हार्डकोर नक्सलियों से ज्यादा जन मिलिशिया के सदस्य हैं। पहले इन लोगों को संघम सदस्य कहा जाता था। इनका काम सिर्फ पुलिस के मूवमेंट की सूचना देना होता था। यह जानकारी वे हार्डकोर नक्सलियों तक पहुंचाते थे।
बाद में नक्सली संगठनों ने इनका काम बहुत बढ़ा दिया। इनके जिम्मे सिर्फ सूचना देना ही नहीं रह गया। नक्सली इन सदस्यों से बारूदी सुरंग बिछवाने लगे। इसके लिए वे इनसे जमीन में गड्ढे खुदवाते थे।
पुलिस जवानों को घेरने के दौरान इन्हें साथ रखते थे। पुलिस पर हमला करने के दौरान इनकी संख्या अधिक होती थी। ये लोग सीधे लड़ाई में शामिल नहीं होते थे। फिर भी वे नक्सलियों की मदद करते थे।
बाद में पुलिस इन सभी के खिलाफ केस दर्ज करती थी। जन मिलिशिया सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता था। सुरंग का गड्ढा खोदने वालों की भी यही स्थिति थी। अब बारूदी सुरंग बिछाने पर विस्फोट न करने वालों को राहत मिल सकती है।
इन अपराधों में नहीं मिलेगी रिहाई
सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने वाले नहीं छूटेंगे। आईईडी (IED - Improvised Explosive Device) और लैंडमाइन ब्लास्ट के आरोपियों को राहत नहीं मिलेगी। पुलिस से हथियार लूटने वालों के केस वापस नहीं होंगे।
आगजनी और बड़े पैमाने पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले जेल में रहेंगे। अपहरण (Kidnapping) और फिरौती मांगने वाले आरोपियों को भी नहीं छोड़ा जाएगा। अन्य गंभीर हिंसक अपराधों के दोषी जेलों में ही बंद रहेंगे।
बैठक में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर भी चर्चा हुई। सरकार ने पुनर्वास को लेकर कई बड़े फैसले लिए हैं। सुकमा के 20 और बीजापुर के 20 गांवों का चयन हुआ है। नारायणपुर के 10 गांवों को भी इसमें शामिल किया गया है।
गांवों के विकास के लिए बजट मंजूर
इन 50 नक्सल मुक्त गांवों के लिए भारी बजट स्वीकृत हुआ है। प्रत्येक गांव के विकास के लिए एक-एक करोड़ रुपए मिलेंगे। यह राशि गांवों में बुनियादी सुविधाओं पर खर्च की जाएगी। इससे ग्रामीणों की आजीविका के साधन सुधरेंगे। आगामी 15 अगस्त को सभी नक्सल मुक्त गांवों में तिरंगा फहराया जाएगा। इन गांवों में बड़े पैमाने पर तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही सम्मानपूर्वक ध्वजारोहण कार्यक्रम भी आयोजित होगा।
नक्सल पीड़ित और पुनर्वासित परिवारों के लिए विशेष योजना है। उन्हें पीएम (PM - Prime Minister) आवास योजना के तहत घर दिए जाएंगे। इसके लिए विशेष प्रावधानों के तहत आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। पुनर्वासित युवाओं की प्रोत्साहन राशि भी जल्द जारी होगी। एक माह के भीतर यह राशि देने के निर्देश हैं। शहीद परिवारों के लंबित मामलों का भी समयबद्ध निपटारा होगा।
FAQ
- छत्तीसगढ़ सरकार किन नक्सल बंदियों के केस वापस ले रही है?
उत्तर: सरकार केवल सामान्य प्रकृति के मामूली मामलों में बंद कैदियों के केस वापस ले रही है। जिन पर हत्या या बड़े हमले का आरोप नहीं है, उन्हें राहत मिलेगी। - नक्सल मुक्त गांवों के विकास के लिए क्या योजना है?
उत्तर: सरकार ने सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर के 50 गांवों के लिए एक-एक करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। यहां बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
यह खबरें भी पढ़ें...
नक्सल केस में पुलिस गवाही पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
नक्सल एडीजी की चेतावनी पर पीसीसीएफ का जवाब-कोई घर नहीं टूटा
महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर नक्सलियों की हथियार फैक्ट्री ध्वस्त, भारी सामान जब्त
नारायणपुर में नक्सलियों के ठिकाने से भारी मात्रा में हथियार और 24 लाख कैश जब्त