बांग्लादेश की स्वीटी ने फेसबुक से फंसाया छत्तीसगढ़िया पति, फर्जी कागजों से हरिद्वार में चला रही थी लॉज
हरिद्वार में लोग मोह माया को छोड़ सच के रास्ते पर चलने के लिए आते हैं। लेकिन बांग्लादेश की स्वीटी ने अपने छत्तीसगढ़िया पति के साथ यहीं फर्जीवाड़े का पूरा माया जाल रच दिया। हरिद्वार में पुलिस ने एक बांग्लादेशी महिला और उसके भारतीय पति को फर्जी दस्तावेजों के सहारे लॉज चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया है।
यह कार्रवाई स्थानीय खुफिया इकाई से मिली सूचना के आधार पर की गई। जिसने इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया। पोल खुलने के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
फेसबुक से फंसाया छत्तीसगढ़िया पति :
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार महिला की पहचान 41 वर्षीय सलेहा बेगम के रूप में हुई है। जो मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है। वहीं उसका पति श्यामदास छत्तीसगढ़ का निवासी बताया जा रहा है। दोनों पिछले कुछ समय से हरिद्वार में रहकर एक लॉज चला रहे थे।
जांच में सामने आया कि सलेहा बेगम ने बांग्लादेश में अपने पहले पति से तलाक लेने के बाद सोशल मीडिया के जरिए श्यामदास से संपर्क किया था। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और श्यामदास ने उसे भारत आने के लिए कहा। इसके बाद सलेहा 2023 में वैध दस्तावेजों के साथ भारत आई, लेकिन तय समय सीमा पूरी होने के बाद भी वापस नहीं लौटी।
हरिद्वार में बेगम बनी स्वीटी :
भारत आने के बाद उसने अपनी पहचान बदल ली। हरिद्वार पहुंचने पर सलेहा बेगम ने अपना नाम बदलकर स्वीटी रख लिया और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों तैयार करवा लिए। पुलिस का कहना है कि इन फर्जी कागजातों में पहचान पत्र और विवाह प्रमाण पत्र भी शामिल हैं।
जिनकी मदद से दोनों लॉज चला रहे थे। हरिद्वार के पुलिस अधिकारी ने बताया कि ज्वालापुर थाना पुलिस ने छापेमारी कर सलेहा बेगम को गिरफ्तार किया। पूछताछ में यह भी सामने आया कि श्यामदास ने उसे फर्जी दस्तावेजों बनवाने में मदद की थी।
पुलिस ने उसके बांग्लादेश के मूल दस्तावेजों भी बरामद कर लिए हैं, जिससे उसकी असली पहचान की पुष्टि हुई। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि भारत आने के बाद यह दंपती पहले दिल्ली में रहा और करीब एक साल पहले हरिद्वार शिफ्ट हो गया था। यहीं पर उन्होंने अपने जीवनयापन के लिए लॉज शुरू की।
90 दिन का था वीजा :
अधिकारियों के अनुसार सलेहा बेगम का वीजा केवल 90 दिनों के लिए वैध था। लेकिन वह निर्धारित समय के बाद भी भारत में ही रुकी रही। जो कि नियमों का उल्लंघन है। इसके साथ ही फर्जी दस्तावेजों बनवाना और उनका उपयोग करना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
फिलहाल पुलिस ने दोनों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी दस्तावेजों बनाने में और कौन-कौन लोग शामिल थे। यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि फर्जी पहचान और अवैध तरीके से रहने के मामलों में सतर्कता कितनी जरूरी है। पुलिस का कहना है कि आगे की जांच में और भी खुलासे हो सकते हैं।
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