तारा कोल ब्लॉक की नीलामी पर बवाल, हसदेव बचाओ संगठनों ने उठाए सवाल
हसदेव-अरण्य क्षेत्र में तारा (रिवाइज्ड) कोयला ब्लॉक की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन (CBA) और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी का विरोध करते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है।
संगठनों ने आरोप लगाया है कि तारा की नीलामी हसदेव के जंगलों, आदिवासी समुदायों और राज्य की पहले की प्रतिबद्धताओं की अनदेखी है। इसको लेकर छत्तीसगढ़ में एक बार फिर आंदोलन की आग सुलगने लगी है।
संगठनों का विरोध तेज:
संगठनों का कहना है कि हसदेव-अरण्य छत्तीसगढ़ के सबसे घने और जैव-विविधता से समृद्ध वन क्षेत्रों में शामिल है। यह क्षेत्र हाथियों के महत्वपूर्ण आवास के साथ-साथ लेमरू एलीफेंट रिजर्व के व्यापक परिदृश्य का हिस्सा माना जाता है।
दावा किया गया है कि यहां हाथियों समेत 450 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें 20 से अधिक अति-संकटग्रस्त प्रजातियां शामिल हैं। इन जंगलों पर आदिवासी और अन्य वन-निर्भर समुदाय अपनी आजीविका और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के लिए निर्भर हैं।
WII की रिपोर्ट का दिया हवाला:
हसदेव बचाओ संगठनों ने अपने विरोध के समर्थन में भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के जैव-विविधता आकलन का हवाला दिया है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में खनन और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के कारण हाथियों के आवास के विखंडन पर चिंता जताई गई है।
संगठनों के मुताबिक, रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आवास के और नुकसान से मानव-हाथी संघर्ष बढ़ सकता है।संगठनों का दावा है कि WII ने मौजूदा संचालित खदान से आगे हसदेव-अरण्य के क्षेत्रों को खनन के लिए ‘नो-गो’ क्षेत्र मानने की सिफारिश की थी। इसी आधार पर उन्होंने सरकार से तारा ब्लॉक की नीलामी पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
2022 के विधानसभा प्रस्ताव का मुद्दा:
तारा ब्लॉक की नीलामी को लेकर सबसे बड़ा सवाल 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव को लेकर उठाया गया है। संगठनों के अनुसार, विधानसभा ने हसदेव-अरण्य क्षेत्र में कोयला ब्लॉकों को रद्द करने और इस वन क्षेत्र को खनन से बचाने का प्रस्ताव पारित किया था।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने हसदेव क्षेत्र के कोयला ब्लॉकों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल किए जाने का विरोध किया था। संगठन का दावा है कि तारा ब्लॉक को पहले भी नीलामी के लिए रखा गया था, लेकिन राज्य सरकार के अनुरोध के बाद इसे सूची से हटाया गया था। संगठनों ने जुलाई 2023 में सुप्रीम कोर्ट के सामने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से दायर हलफनामे का भी उल्लेख किया है।
उनके अनुसार, सरकार ने कहा था कि हसदेव-अरण्य में नए खनन भंडार क्षेत्रों के आवंटन या उपयोग की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पहले से संचालित PEKB खदान से उपलब्ध कोयला पर्याप्त है। अब तारा की नीलामी को लेकर संगठन पूछ रहे हैं कि उस रुख में बदलाव क्यों हुआ।
अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को लेकर भी सवाल:
संगठनों ने तारा ब्लॉक की सफल बोली लगाने वाली कंपनी CG Syn-Gas & Chemicals Ltd. को लेकर भी सवाल उठाए हैं। प्रेस नोट के मुताबिक, यह कंपनी Mundra Synenergy Ltd. की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और Mundra Synenergy Ltd. Adani Enterprises Ltd. की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
संगठनों का कहना है कि अडानी समूह पहले से ही PEKB खदान के संचालन के माध्यम से हसदेव क्षेत्र में मौजूद है। ऐसे में तारा ब्लॉक भी समूह से जुड़ी कंपनी को मिलने को लेकर पारदर्शिता और पर्यावरणीय प्रभाव से जुड़े सवालों का जवाब सरकार को देना चाहिए।
15 साल से जारी है विरोध:
हसदेव के आदिवासी और वन-निर्भर समुदाय लंबे समय से खनन विस्तार का विरोध करते रहे हैं। संगठनों के मुताबिक, ग्राम सभा प्रस्तावों, पदयात्राओं, धरनों और विभिन्न लोकतांत्रिक माध्यमों से यह विरोध लगातार जारी है। अक्टूबर 2021 में ग्रामीणों ने करीब 300 किलोमीटर पैदल मार्च कर रायपुर पहुंचकर जंगल बचाने की मांग उठाई थी।
छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति ने तारा ब्लॉक की नीलामी रद्द करने, हसदेव-अरण्य में आगे के कोयला खनन विस्तार पर रोक लगाने, 2022 के विधानसभा प्रस्ताव को लागू करने और WII की वैज्ञानिक सिफारिशों का पालन करने की मांग की है। साथ ही ग्राम सभाओं और आदिवासी समुदायों के संवैधानिक व कानूनी अधिकारों का सम्मान करने की मांग भी उठाई है।
हसदेव में अब खनन नहीं:
संगठनों ने अपने बयान के अंत में नारा दिया है हसदेव में अब और खनन नहीं, तारा की नीलामी रद्द करो और हसदेव अरण्य बचाओ।
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