हसदेव बचाओ आंदोलन में जुटे 5 हजार लोग, सिंहदेव बोले अब पानी सिर के ऊपर जा चुका
Harrison Masih | Jun 14, 2026, 16:55 IST
हसदेव बचाओ आंदोलन 2026
छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में कोल खदानों के विस्तार के खिलाफ विरोध बढ़ गया है। रामगढ़ बचाओ संघर्ष समिति की बड़ी परिचर्चा में टीएस सिंहदेव सहित हजारों लोग शामिल हुए। सिंहदेव ने कहा कि अब पानी सिर के ऊपर जा चुका है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- हसदेव अरण्य में कोल खदानों को केंद्र की मंजूरी के खिलाफ विरोध तेज।
- रामगढ़ बचाओ संघर्ष समिति की परिचर्चा में 5,000 से अधिक लोग शामिल हुए।
- सिंहदेव ने आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि अब पानी सर के ऊपर जा चुका है।
- पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार पर पर्यावरण और संसाधनों की अनदेखी का आरोप लगाया।
- पर्यावरण कार्यकर्ताओं की चेतावनी- बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से गंभीर परिणाम होंगे।
5 हजार लोगों की हुंकार
इसके खिलाफरामगढ़ की नाट्यशाला के पास एक बड़ी परिचर्चा हुई। आसपास के गांवों और शहरों से 5 हजार से ज्यादा लोग यहां पहुंचे। जहां-जहां जंगल बचाने के आंदोलन चल रहे हैं, उन सभी संगठनों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। विपक्ष के नेताओं ने भी मंच से आंदोलन को समर्थन दिया। इसका खनन कार्य अडानी समूह द्वारा किया जाएगा।
सिंहदेव बोले, रामगढ़ का मंदिर कहीं और नहीं जाएगा
उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा रामगढ़ को बचाना नहीं है। इसीलिए उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखा था।
जब मंच से लोगों ने उनसे आंदोलन का नेतृत्व करने की अपील की तो सिंहदेव ने कहा, "अब पानी सर के ऊपर जा चुका है। राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन और एनजीओ (NGO - Non Governmental Organisation) सबको एक साथ मिलकर यह लड़ाई लड़नी होगी। शासन तंत्र और अरबपतियों के खिलाफ यह लड़ाई है।"
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— Alok Shukla (@alokshuklacg) June 14, 2026
पीसीसी चीफ का हमला
उन्होंने कहा, "तमनार में भी यही हो रहा है, बस्तर में भी। सरकार कोल माइंस हो या आयरन ओर, सब अपने चहेतों को दे रही है।"
बैज ने ऐलान किया कि आने वाले समय में जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधन बचाने के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी जाएगी। "अडानी, अंबानी या जिंदल, किसी को भी यह बेचने नहीं देंगे।"
12 साल की लड़ाई और अब तीसरी खदान
उन्होंने चेतावनी दी कि तीसरी खदान मिलने के बाद न रामगढ़ बचेगा, न हसदेव और न बांगो का पानी। "पूरे छत्तीसगढ़ के पर्यावरण का विनाश है।" शुक्ला ने बताया कि स्थानीय गांव के लोग 12 सालों से यह संघर्ष कर रहे हैं। अब इसके बाद तारा कोल ब्लॉक का नंबर है।
कमजोर आबादी वाले इलाकों को निशाना
आगे की रणनीति तय
FAQ
- हसदेव जंगल में आंदोलन क्यों हो रहा है?
केते एक्सटेंशन समेत हसदेव में तीन कोल ब्लॉक मंजूर हो चुके हैं। इससे 15000 एकड़ जंगल और 15 लाख पेड़ कटने का खतरा है। स्थानीय लोग 12 सालों से इसका विरोध कर रहे हैं। - हसदेव में खनन का क्या असर होगा?
आलोक शुक्ला के अनुसार इससे रामगढ़, हसदेव नदी और बांगो बांध का पानी खतरे में पड़ेगा। हाथियों का आवास नष्ट होगा और आदिवासियों की आजीविका प्रभावित होगी। पर्यावरण विशेषज्ञ इसे पूरे छत्तीसगढ़ के पर्यावरण के लिए खतरा मान रहे हैं।
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