थानों में दबी हैं 1 लाख 45 हजार क्लोजर रिपोर्ट्स, डीजीपी से मांगा पूरा ब्यौरा
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के पुलिस थानों में जांच पूरी होने के बावजूद 1लाख 45 हजार 97 मामलों की क्लोजर रिपोर्ट अब तक अदालतों में पेश नहीं की गई है। इनमें कई मामले वर्षों से थानों में दबे पड़े हैं। डीजीपी के हलफनामे से यह खुलासा हुआ है। इसके बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले सभी लंबित मामलों की पूरी स्थिति मांगी है। अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। यह मामला योगेंद्र बाबू शर्मा की तीन याचिकाओं से जुड़ा है।
हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल और 5 मई 2026 को डीजीपी से शपथपत्र मांगा था। इसी क्रम में डीजीपी ने अब यह हलफनामा अदालत में पेश किया है।
15 जून तक थे 1.47 लाख से ज्यादा मामले
डीजीपी के हलफनामे में बताया गया है कि 15 जून तक प्रदेश में ऐसे करीब 1 लाख 47 हजार 714 मामले थे, जिनमें जांच पूरी होने के बावजूद क्लोजर रिपोर्ट अदालत तक नहीं पहुंची थी।
हालांकि हलफनामे में यह भी दिखाया गया कि मौजूदा स्थिति में यह आंकड़ा घटकर 1 लाख 45 हजार 97 रह गया है। इसके बावजूद यह संख्या बेहद बड़ी बनी हुई है।
हाईकोर्ट ने मांगा पूरा ब्यौरा
कोर्ट ने डीजीपी को नए शपथपत्र में यह बताने को कहा है कि जांच पूरी हो चुके कितने मामलों की क्लोजर रिपोर्ट संबंधित अदालतों में पेश की गई है और कितने अब भी लंबित हैं। सुनवाई 18 अगस्त को तय की गई है।
कोर्ट का यह रुख साफ करता है कि वह इस मामले में सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जमीनी स्थिति की पूरी तस्वीर चाहता है।
वर्षों से थानों में दबी थीं रिपोर्ट
हाईकोर्ट के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय ने प्रदेश भर में समीक्षा कराई। इस समीक्षा में सामने आया कि रायपुर पुलिस कमिश्नरेट और विभिन्न रेंज व जिलों के थानों में बड़ी संख्या में क्लोजर रिपोर्ट वर्षों से लंबित पड़ी थीं।
यह स्थिति बताती है कि जांच पूरी होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट अदालत तक पहुंचाने में बड़ी देरी होती रही है।
डीजीपी बोले, चलेगा विशेष अभियान
डीजीपी ने अदालत को बताया कि इन लंबित रिपोर्टों के निपटारे के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। उनके मुताबिक इस अभियान के जरिए लंबित मामलों की संख्या में कमी लाई जाएगी।
यह अभियान कब से शुरू होगा और किस समयसीमा में पूरा किया जाएगा, इसकी जानकारी आगे स्पष्ट हो सकती है।
अब आगे क्या होगा
18 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई में डीजीपी को नया शपथपत्र पेश करना होगा। इसमें साफ बताना होगा कि कितनी क्लोजर रिपोर्ट अदालत तक पहुंच चुकी हैं और कितनी अब भी अटकी हैं।
यह मामला अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस थानों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
FAQ
- क्लोजर रिपोर्ट क्या होती है?
क्लोजर रिपोर्ट वह रिपोर्ट होती है जिसे पुलिस जांच पूरी होने के बाद अदालत में पेश करती है, जब मामले में पर्याप्त सबूत नहीं मिलते या कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाने का आधार नहीं होता। - छत्तीसगढ़ में कितनी क्लोजर रिपोर्ट लंबित हैं?
डीजीपी के हलफनामे के अनुसार, वर्तमान में 1,45,097 मामलों की क्लोजर रिपोर्ट जांच पूरी होने के बावजूद संबंधित अदालतों में पेश नहीं की गई है।
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