छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला : 60 दैनिक कर्मियों के नियमितीकरण का रास्ता साफ

Umeshwari Baghel | Jun 15, 2026, 17:48 IST
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोरबा नगर निगम के 60 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण मामले में अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने सरकार का 2020 का आदेश रद्द कर 180 दिनों में पुनर्विचार करने को कहा है।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 60 कर्मचारियों को राहत
  • दो दशक से कार्यरत दैनिक वेतनभोगियों की उम्मीद फिर जगी
  • कोरबा नगर निगम मामले में सरकार को बड़ा झटका
  • नियमितीकरण पर पुनर्विचार के हाईकोर्ट ने दिए आदेश
  • लंबे संघर्ष के बाद कर्मचारियों को मिला न्याय

NEWS IN DETAIL

Bilaspur : छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने कोरबा नगर निगम के 60 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें इन कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे को खारिज कर दिया गया था। इस फैसले के बाद लंबे समय से न्याय की राह देख रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है और उनके नियमित होने की उम्मीद फिर से मजबूत हो गई है।



दो दशक से ज्यादा समय से कर रहे थे काम

कोरबा नगर निगम में ये सभी कर्मचारी पिछले 23 से 24 सालों से काम कर रहे हैं। इनकी नियुक्ति वर्ष 1997 से 2000 के बीच हुई थी। समय के साथ इन्होंने नगर निगम के अलग-अलग कार्यों में लगातार अपनी सेवाएं दीं। इसके बावजूद सरकार की ओर से इन्हें नियमित नहीं किया गया।



कर्मचारियों का कहना था कि वे वर्षों से स्थायी प्रकृति का काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल दैनिक वेतनभोगी के रूप में ही रखा गया। इसी कारण उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।



सरकार के आदेश को कोर्ट ने किया रद्द

राज्य सरकार ने वर्ष 2008 के एक सर्कुलर के आधार पर नियमितीकरण की नीति तय की थी। लेकिन बाद में 12 मई 2020 को एक आदेश जारी कर इन 60 कर्मचारियों के दावे को खारिज कर दिया गया था।



सरकार का तर्क था कि उनकी नियुक्ति तय समय सीमा के बाद हुई और उनकी सेवा में बीच-बीच में अंतराल रहा, जिसे ब्रेक इन सर्विस माना गया। इसी आधार पर नियमितीकरण से इनकार किया गया था।



हाईकोर्ट ने इस आदेश को अस्वीकार कर दिया और साफ कहा कि केवल तकनीकी कारणों से लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।



हाईकोर्ट की टिप्पणी: सरकार संवैधानिक नियोक्ता है

जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सरकार केवल एक नियोक्ता नहीं, बल्कि एक संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने वाली संस्था है।



कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारी लंबे समय से लगातार काम कर रहे हैं, तो उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि कुछ समय के छोटे अंतराल को नियमितीकरण रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता।



समान स्थिति वाले कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं

अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा कि यदि समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को पहले ही नियमित किया जा चुका है, तो इन कर्मचारियों को अलग रखना न्यायसंगत नहीं है।



कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि प्रशासनिक पारदर्शिता की कमी के कारण अस्थायी व्यवस्था लंबे समय तक चलती रहती है, जिससे कर्मचारियों का शोषण होता है। स्थायी प्रकृति के कार्यों के लिए वर्षों तक अस्थायी लेबल लगाकर काम कराना गलत है।



180 दिनों में पुनर्विचार का आदेश

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम कोरबा को निर्देश दिया है कि वे इन 60 कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामलों पर फिर से विचार करें। यह पूरी प्रक्रिया 180 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।



अदालत के इस आदेश के बाद अब प्रशासन को हर मामले की अलग से समीक्षा करनी होगी और यह तय करना होगा कि किन कर्मचारियों को नियमित किया जा सकता है।



हजारों कर्मचारियों में जगी उम्मीद

इस फैसले का असर सिर्फ कोरबा तक सीमित नहीं है। छत्तीसगढ़ में ऐसे हजारों दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं जो लंबे समय से नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद उनके बीच भी उम्मीद की नई किरण जगी है।



कर्मचारियों का मानना है कि अगर अदालत ने लंबे समय की सेवा को आधार माना है, तो आने वाले समय में अन्य मामलों में भी राहत मिल सकती है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला न केवल 60 कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों के अधिकारों को केवल तकनीकी कारणों से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजरें सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि ये कर्मचारी आखिर कब तक नियमित हो पाएंगे।



FAQ

  1. यह मामला किससे जुड़ा था?
    यह मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा नगर निगम में कार्यरत 60 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़ा था। ये कर्मचारी पिछले 20 से 24 वर्षों से लगातार काम कर रहे थे और लंबे समय से अपनी सेवा स्थायी करने की मांग कर रहे थे।
  2. हाईकोर्ट ने क्या फैसला दिया?
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा 2020 में जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इन कर्मचारियों के नियमितीकरण के दावे को खारिज किया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार और नगर निगम को 180 दिनों के भीतर इस पूरे मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।
  3. इस फैसले का क्या असर होगा?
    इस फैसले से कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है और उनके नियमित होने की उम्मीद फिर से मजबूत हुई है। साथ ही राज्य के अन्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में राहत की संभावना बढ़ सकती है।

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