अफसरों से नहीं पटरी बैठी तो कर्मचारियों का करियर कर रहे खराब
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों चर्चा CR आतंक की हो रही है। नेशनल हेल्थ मिशन यानी NHM के भीतर अफसरों ने गोपनीय चरित्रावली सीआर को ऐसा हथियार बना दिया है, जिससे न सिर्फ कर्मचारियों का इंक्रीमेंट रोका जा रहा है, बल्कि नौकरी तक खतरे में डाल दी गई है। जिन कर्मचारियों ने अफसरों की मनमानी के सामने झुकने से इनकार किया, उनकी सीआर में नंबर काट दिए गए। हालत यह है कि 140 स्वास्थ्यकर्मियों की फाइलें पिछले 6 महीने से अटकाकर रखी गई हैं और मिशन संचालक स्तर पर कोई फैसला ही नहीं लिया जा रहा।
कांकेर में मामले ज्यादा
सबसे ज्यादा बवाल कांकेर जिले में है। यहां CHO, RMA, ANM, टेक्नीशियन समेत 34 कर्मचारियों की CR रोक दी गई। जबकि कर्मचारियों को उनके रिपोर्टिंग अधिकारी ने योग्यता के मुताबिक नंबर दिए थे, लेकिन जैसे ही फाइल CMHO स्तर पर पहुंची, नंबर कम कर दिए गए। इनमें कई कर्मचारी नेता भी शामिल हैं, जिनकी CMHO से पहले भी तनातनी रही है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या सीआर का इस्तेमाल बदला लेने के लिए किया जा रहा है?
बलौदा बाजार में भी यही खेल
बलौदाबाजार में भी 11 स्वास्थ्यकर्मियों की फाइलें एक साल से धूल खा रही हैं। उनसे लगातार काम लिया जा रहा है, लेकिन वेतन वृद्धि रोक दी गई। कर्मचारी दर-दर भटक रहे हैं, मगर NHM मुख्यालय से सिर्फ एक जवाब मिलता है “फाइल जल्द क्लियर होगी।"
पसंद नहीं आए तो नंबर काट दिए!
NHM में सीआर की पूरी व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। कर्मचारियों का आरोप है कि जिन अफसरों से संबंध अच्छे हैं, उन्हें “बहुत अच्छा” और “उत्कृष्ट” जैसी ग्रेडिंग मिल जाती है। लेकिन जो कर्मचारी सवाल पूछते हैं या यूनियन गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं, उन्हें औसत बताकर नोटिस थमा दिया जाता है।
CR में नंबरों का पूरा खेल समझिए
1- 75 नंबर - उत्कृष्ट - सेवा जारी रखने की अनुशंसा
2- 70 नंबर - बहुत अच्छा - सेवा जारी रखने की अनुशंसा
3- 55 नंबर - अच्छा - सेवा जारी रखने की अनुशंसा
4- 40-54 नंबर - औसत, सुधार नोटिस - नौकरी जारी लेकिन इंक्रीमेंट नहीं
5- 40 से कम - सेवा बढ़ाने योग्य नहीं
यानी अफसर ने अगर नंबर घटा दिए तो कर्मचारी सीधे “सुधार नोटिस” या नौकरी संकट की श्रेणी में पहुंच जाता है। यही वजह है कि अब कर्मचारी इसे “सीआर वसूली मॉडल” कहने लगे हैं।
रायपुर में महिला कर्मचारी ने खोली पोल
रायपुर के रामनगर स्वास्थ्य केंद्र की एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ने मिशन संचालक को लिखित शिकायत देकर पूरे सिस्टम की परतें खोल दी हैं। शिकायत में कहा गया कि स्वास्थ्य अधिकारी कर्मचारियों को असमय ड्यूटी पर बुलाते हैं, विरोध करने पर अपशब्द बोलते हैं और मानसिक प्रताड़ना देते हैं। जब इसकी शिकायत की गई तो सीआर में नंबर कम कर दिए गए।
महिला कर्मचारी ने अपने आवेदन में साफ लिखा है कि पहले उसे 95 तक अंक मिलते रहे, लेकिन इस बार अचानक 42 नंबर दे दिए गए। यानी सीधे “सुधार योग्य” श्रेणी में डाल दिया गया। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि उसके कार्य, व्यवहार और एनक्यूएएस कार्यक्रम में प्रदर्शन संतोषजनक रहा, फिर भी नंबर काटे गए।
अब बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई कर्मचारी उत्कृष्ट प्रदर्शन के बावजूद अचानक “औसत” हो जाए, तो क्या यह प्रशासनिक मूल्यांकन है या व्यक्तिगत खुन्नस?
इंक्रीमेंट रोका, भविष्य अधर में
एनएचएम कर्मचारियों के लिए सीआर सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती। इसी के आधार पर हर साल 5 प्रतिशत तक इंक्रीमेंट मिलता है। लेकिन 2024-25 की सीआर लंबित होने से सैकड़ों कर्मचारियों का वेतन नहीं बढ़ पाया। अप्रैल से मिलने वाला एरियर भी अटका पड़ा है।
जून-जुलाई से होती है शुरुआत
जानकारी के मुताबिक जून-जुलाई में सीआर भरने की प्रक्रिया शुरू होती है और अधिकतम तीन महीने में उसका निपटारा होना चाहिए। लेकिन इस बार फाइलें जानबूझकर रोक दी गई। कई कर्मचारी छह महीने से मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं। अफसर सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, आदेश नहीं।
सचिव स्तर पर राहत, एमडी स्तर पर सन्नाटा
नियम के मुताबिक जिला और राज्य स्तर के कर्मचारी विभागीय सचिव के पास अपील कर सकते हैं, जबकि ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों को मिशन संचालक के पास जाना पड़ता है। दिलचस्प बात यह है कि सचिव स्तर पर जिन कर्मचारियों ने अपील की, उनकी ग्रेडिंग में सुधार कर दिया गया और इंक्रीमेंट भी जारी हो गया। लेकिन मिशन संचालक स्तर पर फाइलें अब भी दबाकर रखी गई हैं। यानी सचिव स्तर पर नियम काम कर रहे हैं, लेकिन एनएचएम मुख्यालय में फाइलें “ठंडे बस्ते” की राजनीति का शिकार हैं।
कर्मचारियों में गुस्सा, कार्रवाई की मांग
स्वास्थ्यकर्मियों () का कहना है कि अगर समय रहते फैसला नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनका आरोप है कि सीआर को अब “कंट्रोल टूल” बना दिया गया है। अफसरों से पटरी नहीं बैठी तो करियर खत्म करने की तैयारी कर ली जाती है।
संविदा कर्मचारियों की स्थिति पहले ही अस्थिर
एनएचएम में संविदा कर्मचारियों (cg health department) की स्थिति पहले ही अस्थिर है। ऐसे में खराब सीआर का मतलब सिर्फ इंक्रीमेंट रुकना नहीं, बल्कि नौकरी पर सीधा खतरा है। यही कारण है कि अब कर्मचारी खुलकर कह रहे हैं, “काम नहीं, अफसर की पसंद-नापसंद तय कर रही है कि कौन उत्कृष्ट है और कौन निकम्मा।”
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में यह मामला अब सिर्फ सीआर विवाद नहीं रह गया है। यह उस अफसरशाही की कहानी बन चुका है, जहां फाइलों में करियर कुचले जा रहे हैं और कर्मचारी न्याय के लिए दफ्तर-दफ्तर भटक रहे हैं।
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