हेमचंद यूनिवर्सिटी में हंगामा: हिंदी में जवाब लिखे तो कर दिया फेल, अब छात्रों ने की ये डिमांड
Durg. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय से संबद्ध एलएलबी प्रथम सेमेस्टर 2025-26 के परिणाम जारी होने के बाद छात्रों में आक्रोश पैदा हो गया है। विवाद का मुख्य कारण इंग्लिश लीगल लैंग्वेज विषय है, जिसमें छात्रों ने आरोप लगाया है कि हिंदी माध्यम में उत्तर लिखने के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को फेल कर दिया गया।
छात्रों ने की शिकायत
छात्रों ने कुलसचिव को शिकायत पत्र सौंपते हुए हिंदी में लिखे गए उत्तर स्वीकार कर उचित अंक देने की मांग की। इस मामले में एनएसयूआई के नेतृत्व में छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय तिवारी से भी मुलाकात कर अपनी समस्या और वस्तुस्थिति स्पष्ट की। कई छात्र हिंदी माध्यम के हैं और उनकी शिक्षा भी हिंदी में हुई है। ऐसे में हिंदी में उत्तर लिखना उनके लिए सरल और सहज था। परीक्षा केंद्रों पर कुछ प्राध्यापकों ने छात्रों को मौखिक रूप से भी हिंदी में उत्तर लिखने की अनुमति दी थी।
417 में केवल 101 छात्र पास
विश्वविद्यालय द्वारा जारी रिजल्ट में 417 छात्रों में केवल 101 छात्र पास हुए हैं। इसके अलावा, 230 छात्रों को पूरक परीक्षा के लिए रखा गया है जबकि 77 छात्र पूरी तरह अनुत्तीर्ण हो गए हैं। छात्रों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में असफल होने का मुख्य कारण सिर्फ लीगल लैंग्वेज का पेपर है। छात्रों ने कहा कि पिछले वर्षों में भी हिंदी में उत्तर लिखने पर अंक मिलते रहे हैं, लेकिन इस बार अचानक नियम बदलकर केवल अंग्रेजी में लिखे उत्तरों को ही मान्य किया गया। इससे हिंदी माध्यम के अधिकांश छात्र प्रभावित हुए।
विश्वविद्यालय ने क्या कहा?
कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने कहा कि बार काउंसिल के नियमों के अनुसार लीगल लैंग्वेज विषय में अंग्रेजी में उत्तर लिखना अनिवार्य था और उसी आधार पर परीक्षा का मूल्यांकन किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा से पहले कॉलेज स्तर पर हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के लिए कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिया गया था।
क्या है छात्रों की मांगें?
छात्रों ने विश्वविद्यालय (Hemchand Yadav University) से मांग की है कि लीगल लैंग्वेज विषय की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि विधि स्नातक में पुनर्मूल्यांकन की सुविधा फिर से लागू की जाए, ताकि प्रभावित छात्रों को न्याय मिल सके।
धनरसायन सिंह गुरुल महाविद्यालय के छात्रों ने भी रिजल्ट पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि 56 में से 50 छात्रों को अंग्रेजी विषय में पूरक परीक्षा का सामना करना पड़ा, जिससे लगभग पूरी कक्षा प्रभावित हुई। छात्रों ने यह तर्क दिया कि परीक्षा के दौरान केंद्रों पर तैनात प्राध्यापकों ने उन्हें हिंदी में उत्तर लिखने की मौखिक अनुमति दी थी।
कुलपति ने दिया आश्वासन
विश्वविद्यालय के कुलपति ने छात्रों की चिंता को गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त अंक (ग्रेस मार्क्स) देने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर यूथ कांग्रेस के प्रदेश महासचिव जुल्फी सिद्दीकी, उस्मान रजा सहित बालोद, सुराना, कल्याण और दिग्विजय कालेज के कई छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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