शिक्षक नहीं बन सकते बीईओ... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पलटा सरकार का आदेश

Harrison Masih | Jun 27, 2026, 19:48 IST
शिक्षक नहीं बन सकते ब्लॉक शिक्षा अधिकारी 2026
हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों को प्रशासनिक पदों की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने एक व्याख्याता को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार देने वाले शिक्षा विभाग के आदेश को रद्द कर दिया।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ लफ्जों में कह दिया है कि पढ़ाने वाले शिक्षकों को दफ्तर संभालने वाले प्रशासनिक पदों (जैसे BEO) की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती।



हाईकोर्ट ने नियमों के खिलाफ जाकर एक व्याख्याता (Lecturer) को ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) का प्रभार देने वाले राज्य सरकार के आदेश को तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिया है।



इस पूरे कानूनी मामले और कोर्ट के फैसले को सरल भाषा में नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:



क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला रवि कुमार गौतम नाम के एक अधिकारी से जुड़ा है, जिनकी नियुक्ति साल 2015 में प्रशासनिक संवर्ग (Administrative Cadre) के पद पर हुई थी।



वह जुलाई 2025 से प्रभारी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे।



लेकिन 10 जून 2026 को सरकार के शिक्षा विभाग ने एक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत रवि कुमार गौतम को पद से हटा दिया गया और उनकी जगह एक व्याख्याता (टीचर) अनिल कुमार शर्मा को BEO का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।



सरकार के इसी फैसले के खिलाफ रवि कुमार गौतम ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।



कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें

सरकार का यह फैसला 'छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा नियम 2026' और 'शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून 2009' का सीधा उल्लंघन है। कानूनन, शिक्षकों को प्रशासनिक कामों में नहीं लगाया जा सकता।



रकार ने कोर्ट में कहा कि रवि कुमार गौतम का काम ठीक नहीं था, इसलिए उन्हें हटाया गया। लेकिन जब कोर्ट ने इस बात का सबूत या रिकॉर्ड मांगा, तो सरकार कोई भी ठोस दस्तावेज पेश नहीं कर पाई।



हाईकोर्ट का फैसला और तल्ख टिप्पणी

जस्टिस बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ (Single Bench) ने इस मामले की सुनवाई की और सरकार के आदेश को खारिज करते हुए ये मुख्य बातें कहीं नियम अलग हैं, तो घालमेल क्यों?



अदालत ने कहा कि शिक्षा विभाग के नियमों में पढ़ाने वाले स्टाफ (शैक्षणिक) और दफ्तर संभालने वाले स्टाफ (प्रशासनिक) को बिल्कुल अलग-अलग रखा गया है। दोनों के काम और पद तय हैं, इसलिए इनके बीच नियमों को ताक पर रखकर अदला-बदली नहीं की जा सकती।



BEO पद के लिए क्या हैं नियम?

हाईकोर्ट (CG High Court) ने याद दिलाया कि नियमों के मुताबिक BEO (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) का पद कैसे भरा जाना चाहिए:



  • 75% पद: सहायक ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (ABEO) को प्रमोट करके।
  • 25% पद: स्कूलों के नियमित प्राचार्यों (Principals) के जरिए।

चूंकि व्याख्याता अनिल कुमार शर्मा इन दोनों ही शर्तों में फिट नहीं बैठते थे, इसलिए उन्हें प्रभार देना पूरी तरह से गैर-कानूनी माना गया।



RTE कानून का हवाला

कोर्ट ने साल 2009 के RTE (शिक्षा का अधिकार) कानून की धारा 27 का जिक्र करते हुए कहा कि शिक्षकों का मुख्य काम बच्चों को पढ़ाना है। चुनाव ड्यूटी, जनगणना या किसी बड़ी आपदा जैसी विशेष परिस्थितियों को छोड़कर शिक्षकों से दफ्तर का काम (गैर-शैक्षणिक काम) नहीं कराया जा सकता, क्योंकि इससे बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होता है।



FAQ

  1. BEO पद पर नियुक्ति का नियम क्या है?
    कोर्ट के अनुसार BEO पद के 75% पद ABEO की पदोन्नति से और 25% प्राचार्यों से भरे जाते हैं। व्याख्याता को यह प्रभार देना नियमों के खिलाफ है।
  2. क्या शिक्षक BEO बन सकते हैं?
    सामान्य परिस्थितियों में शिक्षक (व्याख्याता) सीधे BEO नहीं बन सकते। हाईकोर्ट के अनुसार BEO पद पर नियुक्ति छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा नियम के तहत तय प्रक्रिया से होती है, जिसमें अधिकतर पद ABEO की पदोन्नति (75%) और प्राचार्यों (25%) से भरे जाते हैं। इसलिए केवल शिक्षक होने के आधार पर BEO का प्रभार देना नियमों के खिलाफ माना जाता है।


ये खबरें भी पढ़ें...

पेंशनरों को मिलेगा 59 माह का एरियर, हाईकोर्ट ने खारिज की सरकार की अपील



बिना सहमति कर्मचारी को नहीं भेज सकते प्रतिनियुक्ति पर, हाईकोर्ट ने रोका आदेश



संविलियन आदेश से क्यों मचा शिक्षकों में हड़कंप? ट्रांसफर को लेकर बढ़ी हलचल



छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, कलेक्टर नहीं कर सकते BEO को सस्पेंड, निलंबन आदेश रद्द



Tags:
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • CG High Court
  • स्कूल शिक्षा विभाग
  • शिक्षा का अधिकार
  • beo