छत्तीसगढ़ में पहली बार हाइड्रोपोनिक गांजा, बिना मिट्टी और सूरज की रोशनी के उगाया नशा

Aishwarya Dwivedi | Apr 05, 2026, 12:06 IST
Hydroponic Ganja Surfaces in Chhattisgarh for the First Time
भिलाई में पुलिस ने दो युवकों को 2 किलो गांजा और हाइड्रोपोनिक गांजे के साथ गिरफ्तार किया। यह प्रदेश की पहली ऐसी बरामदगी है। आरोपियों से कैश और नशे का सामान भी मिला, पुलिस नेटवर्क की जांच कर रही है।

NEWS IN SHORT

  • भिलाई में पहली बार हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त, 2 युवक गिरफ्तार
  • दुर्ग पुलिस की बड़ी कार्रवाई, हाई-टेक ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा
  • पानी में उगाया जा रहा था गांजा, महंगे नशे का कारोबार पकड़ा गया
  • 2 किलो गांजा और कैश बरामद, NDPS एक्ट में मामला दर्ज
  • महानगरों के बाद अब छत्तीसगढ़ में हाई-प्रोफाइल नशे की एंट्री

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो युवकों को गांजा और हाई-टेक तरीके से उगाए गए हाइड्रोपोनिक गांजा के साथ गिरफ्तार किया है। यह मामला भिलाई नगर थाना क्षेत्र का है, जहां पहली बार इस तरह के हाइड्रोपोनिक गांजे की बरामदगी ने पुलिस को भी चौंका दिया है।



नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री

भिलाई नगर पुलिस को सूचना मिली थी कि रुआबांधा क्षेत्र में बीज विकास निगम के पास कुछ युवक नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर दबिश दी और दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान विक्रम साहू (29) निवासी तालपुरी और यश विश्वकर्मा (27) निवासी हुडको के रूप में हुई है।



हाइड्रोपोनिक गांजा भी जब्त

तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 2 किलो सामान्य गांजा बरामद किया, जिसकी कीमत लगभग 1 लाख रुपए आंकी गई है। इसके अलावा 2.3 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा भी जब्त किया गया है, जो छोटे पैकेट्स में रखा हुआ था। पुलिस को मौके से 40 हजार रुपए नकद, एक महंगा मोबाइल फोन, चिलम, लाइटर, सिगरेट और रोलिंग पेपर (गोगो पेपर) भी मिला। जब्त किए गए कुल सामान की कीमत लगभग 1 लाख 75 हजार रुपए बताई जा रही है।



नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अधिक मुनाफा कमाने के लालच में इस अवैध कारोबार से जुड़े थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भिलाई में हाइड्रोपोनिक गांजा कहां से लाया जा रहा था और इस गिरोह में और कौन-कौन शामिल हैं। दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।



छत्तीसगढ़ में पहली बरामद

इस मामले की खास बात यह है कि हाइड्रोपोनिक गांजा आमतौर पर बड़े शहरों और हाई-प्रोफाइल पार्टियों में देखा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इसकी यह पहली बरामदगी बताई जा रही है।



क्या है हाइड्रोपोनिक गांजा

हाइड्रोपोनिक गांजा एक आधुनिक तकनीक से उगाया जाता है, जिसमें मिट्टी का उपयोग नहीं होता। इसे पानी और विशेष पोषक तत्वों की मदद से बंद कमरे या लैब जैसे वातावरण में तैयार किया जाता है। इसमें पौधों की जड़ों को सीधे खनिज युक्त पानी में रखा जाता है और कोको कॉयर, रॉकवूल या पेर्लाइट जैसे माध्यम केवल सहारा देने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।



इस प्रक्रिया में शक्तिशाली एलईडी या एचपीएस लाइट्स का उपयोग किया जाता है, जो सूर्य की रोशनी की कमी को पूरा करती हैं। साथ ही पानी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम का संतुलित मिश्रण दिया जाता है और एयर पंप के जरिए ऑक्सीजन पहुंचाई जाती है। कमरों में नियंत्रित माहौल होने से कीट और बीमारियों का खतरा भी कम रहता है।



हालांकि, महंगे उपकरण, ज्यादा बिजली खर्च और विशेष पोषक तत्वों के कारण इसकी लागत काफी अधिक होती है, लेकिन इसका नशा भी सामान्य गांजे की तुलना में अधिक तीव्र होता है।



निष्कर्ष

दुर्ग पुलिस की कार्रवाई में हाइड्रोपोनिक गांजे की पहली बरामदगी ने नशे के बदलते स्वरूप को उजागर किया है। हाई-टेक खेती और बढ़ते मुनाफे के लालच में युवा इस अवैध कारोबार में जुड़ रहे हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर इसे जड़ से खत्म करने में जुटी है।



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