आईआईटी से यूपीएससी तक का सफर... जानिए युवा आईएएस जयंत नाहटा की प्रेरक कहानी

Harrison Masih | Jul 08, 2026, 16:38 IST
आईएएस जयंत नाहटा
आईएएस जयंत नाहटा की प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग के बाद कॉर्पोरेट करियर छोड़कर यूपीएससी का रास्ता चुना। तीन प्रयासों में सफलता हासिल कर उन्होंने ऑल इंडिया 56वीं रैंक प्राप्त की और आईएएस अधिकारी बने।

जब कोई छात्र आईआईटी जैसी प्रतिष्ठित संस्था में प्रवेश लेता है, तो आमतौर पर उसका सपना किसी बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में करियर बनाना होता है, लेकिन कुछ लोग अपने लिए अलग रास्ता चुनते हैं। छत्तीसगढ़ कैडर के 2021 बैच के युवा आईएएस अधिकारी जयंत नाहटा उन्हीं चुनिंदा लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने शानदार इंजीनियरिंग करियर और आकर्षक नौकरी के अवसरों को छोड़कर प्रशासनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। तीन प्रयासों के बाद उन्होंने न केवल यूपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की, बल्कि ऑल इंडिया 56वीं रैंक के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थान भी प्राप्त किया। जयंत नाहटा नए प्रशासनिक फेरबदल में धमतरी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाए गए हैं।



कोलकाता से दिल्ली तक का सफर

जयंत नाहटा का जन्म 19 मई 1995 को कोलकाता में एक व्यवसायी परिवार में हुआ। परिवार का कारोबार वर्षों से वहीं स्थापित था, लेकिन बच्चों की बेहतर शिक्षा के उद्देश्य से उनके पिता ने बड़ा फैसला लेते हुए अपना व्यवसाय दिल्ली स्थानांतरित कर लिया। यही निर्णय आगे चलकर जयंत के जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। दिल्ली आने के बाद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा से लेकर बारहवीं तक की पढ़ाई जीडी सलवान पब्लिक स्कूल, राजेंद्र नगर से पूरी की। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे जयंत ने कठिन मानी जाने वाली आईआईटी प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की और देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली में दाखिला प्राप्त किया।



आईआईटी में बदली सोच

आईआईटी दिल्ली में उन्होंने बायोकेमिकल इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक और एमटेक की पढ़ाई की। इंजीनियरिंग के दौरान उनका शैक्षणिक प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा और उन्हें विदेश में इंटर्नशिप का अवसर भी मिला। दिलचस्प बात यह है कि कॉलेज के दूसरे वर्ष तक जयंत को भारतीय प्रशासनिक सेवा के बारे में विशेष जानकारी भी नहीं थी। धीरे-धीरे समाज, शासन और सार्वजनिक सेवा से जुड़े विषयों में रुचि बढ़ी और यहीं से उनके भीतर सिविल सेवा में जाने का सपना आकार लेने लगा।



आईएएस जयंत नाहटा


यूपीएससी का रास्ता चुना

एमटेक करने के बाद उन्हें एक प्रतिष्ठित मल्टीनेशनल कंपनी से नौकरी का प्रस्ताव मिला। परिवार की इच्छा थी कि वे पहले कुछ वर्षों तक कॉर्पोरेट क्षेत्र में अनुभव प्राप्त करें और उसके बाद यूपीएससी की तैयारी करें। लेकिन जयंत का लक्ष्य स्पष्ट था। उन्होंने अपने परिवार को समझाया कि वे पूरी ऊर्जा के साथ सिविल सेवा की तैयारी करना चाहते हैं। परिवार ने भी उनके निर्णय पर भरोसा जताया और हर कदम पर उनका साथ दिया। यूपीएससी की तैयारी के दौरान उन्होंने शुरुआत में वैकल्पिक विषय के रूप में केमिस्ट्री चुनी, लेकिन कुछ ही समय में उन्हें महसूस हुआ कि यह विषय उनकी रुचि के अनुरूप नहीं है। उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए मात्र एक महीने के भीतर अपना वैकल्पिक विषय बदलकर पॉलिटिकल साइंस एंड इंटरनेशनल रिलेशंस कर लिया। पहले ही प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा दोनों सफलतापूर्वक पास कर लीं तथा इंटरव्यू तक पहुंचे। हालांकि अंतिम चयन नहीं हो पाया, लेकिन इस असफलता ने उनके आत्मविश्वास को कमजोर नहीं किया।



संघर्ष के बीच जीवन का नया अनुभव

पहले प्रयास में सफलता न मिलने के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए मुंबई जाकर अपने एक सीनियर के स्टार्टअप में कार्य किया। इस दौरान उन्हें कॉर्पोरेट दुनिया का अनुभव मिला। इसके बावजूद उनका अंतिम लक्ष्य आईएएस बनना ही था, इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़कर दोबारा दिल्ली लौटने और पूरी गंभीरता से तैयारी करने का निर्णय लिया।



IAS Jayant Nahata


तीसरे प्रयास में 56वीं पोजीशन

दूसरे प्रयास में जयंत नाहटा ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया 298वीं रैंक प्राप्त की। इस रैंक के आधार पर उन्हें इंडियन सिविल अकाउंट्स सर्विस (ICAS) आवंटित हुई। अधिकांश उम्मीदवार यहां अपनी सफलता को अंतिम मान लेते हैं, लेकिन जयंत का सपना अभी अधूरा था। उन्होंने एक और प्रयास करने का निर्णय लिया। लगातार मेहनत, बेहतर रणनीति और आत्मविश्वास के दम पर तीसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 56वीं रैंक हासिल की और आखिरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हो गए।



छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक जिम्मेदारियां

5 दिसंबर 2021 को जयंत नाहटा ने भारतीय प्रशासनिक सेवा जॉइन की। उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ। प्रारंभिक प्रशिक्षण के दौरान रायपुर जिले में सहायक कलेक्टर के रूप में उनकी नियुक्ति हुई। प्रशिक्षण अवधि में उन्होंने बिरगांव, अभनपुर और तिल्दा जैसे क्षेत्रों में प्रशासनिक कार्यों का अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद उन्हें फील्ड प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। दंतेवाड़ा जिले में भी उन्होंने मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत के रूप में अपनी बेहतर सेवाएं दी है अब वे नए प्रशासनिक फेरबदल में धमतरी जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाएं गए हैं।



युवाओं के लिए प्रेरणा

जयंत नाहटा की कहानी यह साबित करती है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि सही निर्णय, निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति अटूट विश्वास से मिलती है। आईआईटी से निकलकर कॉर्पोरेट करियर चुनना आसान था, लेकिन उन्होंने देश सेवा का कठिन रास्ता चुना। पहले प्रयास की असफलता, दूसरे प्रयास में मनचाही सेवा न मिलना और फिर तीसरे प्रयास में आईएएस बनने तक का उनका सफर आज हजारों यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन संदेश देता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास ईमानदार हों, तो सफलता देर से मिल सकती है, लेकिन मिलती अवश्य है।



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