IAS सुब्रत साहू पर ठेकेदार से सांठगांठ का आरोप, ACS बोले शिकायत में झूठी बातें
समझें क्या है पूरा मामला
- सीनियर आईएएस पर पद के दुरुपयोग के आरोप
- पीएमओ से की गई शिकायत
- शिकायत में भ्रष्टाचार के आरोप
- पीएमओ ने जांच के लिखा
छत्तीसगढ़ के सीनियर IAS सुब्रत साहू के खिलाफ भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और शासकीय कार्यों में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजी गई है। यह शिकायत एक बीजेपी नेता ने ही की है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जल संसाधन विभाग के एक बड़े प्रोजेक्ट में अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई जिससे सरकार को आर्थिक नुकसान पहुंचा। यह मामला भूपेश सरकार का है। पीएमओ से इस संबंध में जांच करने का पत्र भी राज्य सरकार को मिला।
बीजेपी नेता का कहना है कि भूपेश सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने द सूत्र से कहा कि इस शिकायत में जो आरोप लगाए गए हैं वे पूरी तरह निराधार हैं।
शिकायत में यह आरोप :
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि साल 2020-21 में जल संसाधन संभाग गरियाबंद में लगभग 44 करोड़ रुपये की लागत की पैरी नहर योजना में काम होना था। इसके लिए टेंडर जारी किए गए। मुख्य नहर लाइनिंग और अन्य निर्माण कार्यों के लिए 26 मई 2020 को कांट्रेक्टर अशोक कुमार मित्तल के साथ अनुबंध स्वीकृत हुआ था।
इसके बाद विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर फर्जी मुख्तारनामा तैयार कर अनिल कुमार चंदेल को काम सौंप दिया गया। चंदेल ने गुणवत्ताहीन काम किया। इसके अलावा आर्थिक भ्रष्टाचार और फर्जी कागज तैयार किए। ठेकेदार ने टैक्स चोरी कर सरकार को आर्थिक हानि पहुंचाई।
शिकायत में आरोप लगाया गया है चंदेल के सुब्रत साहू से करीबी संबंध थे और उस समय आईएएस साहू जल संसाधन विभाग में एसीएस थे।उन्होंने आरोप लगाया कि अपर मुख्य सचिव के पद पर रहते हुए सुब्रत साहू ने अपने प्रभाव का उपयोग कर संबंधित व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया और वित्तीय गड़बड़ियों पर कार्रवाई नहीं होने दी।
पीएमओ से जांच की मांग :
शिकायत में यह भी कहा गया है कि निर्माण कार्यों में गंभीर तकनीकी खामियां और गुणवत्ता संबंधी कमियां हैं। इसके लिए कार्यस्थल की तस्वीरें, अनुबंध की प्रतियां, विशेष मुख्त्यारनामा, बिल-वाउचर और अन्य दस्तावेज संलग्न किए हैं। पत्र में दावा किया गया है कि इन दस्तावेजों से फर्जी भुगतान और घटिया निर्माण कार्यों के आरोपों की पुष्टि होती है।
उन्होंने अपने पत्र में दावा किया है कि संबंधित ठेकेदार और कुछ अधिकारियों के बीच व्यक्तिगत संबंधों के चलते पूरे मामले में संरक्षण दिया गया। प्रधानमंत्री को भेजे गए आवेदन में मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ विधि सम्मत उच्च स्तरीय जांच कराकर कार्रवाई की जाए।
पीएमओ के निर्देश पर भी जांच नहीं :
पीएमओ ने इस शिकायत पर तत्कालीन मुख्य सचिव को पत्र भेजकर जांच करने के लिए कहा। बीजेपी नेता ने फिर से मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले में जानकारी मांगने की बात कही है। उनका कहना है कि भूपेश सरकार में इस मामले की जांच नहीं हुई। अब दूसरी सरकार है तो फिर से इस संबंध में उच्चस्तरीय जांच की मांग की जा रही है।
आरोप तथ्यहीन और निराधार :
इस संबध में द सूत्र ने एसीएस सुब्रत साहू से बात की। उन्होंने कहा कि इस शिकायत में जो बातें लिखी गई हैं वे तथ्यहीन और निराधार हैं। उनके समय में इस तरह का कोई काम नहीं हुआ। यह काम तो जिला स्तर पर होते हैं इसलिए उनका कोई लेना देना नहीं है। साहू ने कहा कि वे किसी चंदेल को नहीं जानते।
निष्कर्ष :
सियासत में इस तरह के आरोप लगते हैं। लेकिन उन आरोपों को तब तक सत्य नहीं माना जा सकता जब तक कि जांच में यह साबित न हो। लेकिन इस बात पर भी गंभीरता बरतनी चाहिए कि यदि कोई आरोप लगते हैं तो उसकी जांच जरुर होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल ही में कुछ नियमों में बदलाव किया है। अब यदि किसी की शिकायत आती है तो संबंधित अधिकारी को भी अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
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