इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी में पेपर लीक से हड़कंप, छात्रों ने किया जमकर विरोध
छत्तीसगढ़ में एक बार फिर पेपर लीक का मामला सामने आया है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष एंटोमोलॉजी का प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया पर पहुंच गया।
20 अगस्त को होने वाली परीक्षा के कुछ हिस्से और हस्तलिखित सवाल सुबह करीब 8 से 9 बजे के बीच WhatsApp समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए। इससे विश्वविद्यालय की पूरी परीक्षा प्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
परीक्षा खत्म होते ही हंगामा
परीक्षा समाप्त होने के बाद छात्रों ने वायरल प्रश्नपत्र और परीक्षा में पूछे गए सवालों का मिलान किया। छात्रों का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए प्रश्नपत्र के हू बहू सवाल मैच कर गए।
इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर में जमकर विरोध हुआ। छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक और विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
चार सदस्यीय कमेटी जांच में जुटी
मामला बढ़ते ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचने से पहले बाहर कैसे आया। विश्वविद्यालय ने चार सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाई है। कमेटी पेपर की छपाई, वितरण और कॉलेजों तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी।
साइबर थाने तक पहुंचेगा मामला
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए प्रश्नपत्र को गंभीर मामला माना है। अब इसकी शिकायत साइबर थाने में करने की तैयारी है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सबसे पहले पेपर किसने सोशल मीडिया पर डाला और उसे आगे किस-किस ने प्रसारित किया। दोषियों की पहचान होने के बाद कार्रवाई की बात कही जा रही है।
39 कॉलेजों पर जांच की नजर
प्रारंभिक तौर पर आशंका किसी संबद्ध कॉलेज से प्रश्नपत्र बाहर आने की जताई जा रही है। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से 39 कॉलेज संबद्ध हैं। इनमें 34 कृषि कॉलेज शामिल हैं। सभी कॉलेजों में परीक्षाएं चल रही हैं। बताया जा रहा है कि परीक्षा से एक रात पहले संबंधित कॉलेजों तक प्रश्नपत्र पहुंचते हैं। ऐसे में जांच का दायरा सभी संभावित केंद्रों तक बढ़ सकता है।
परीक्षा रद्द होने के संकेत
पेपर लीक की पुष्टि और वायरल प्रश्नों के मिलान के बाद परीक्षा रद्द करने की तैयारी की जा रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शाम तक इस संबंध में आधिकारिक घोषणा किए जाने की बात कही गई है। अगर परीक्षा रद्द होती है तो छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी होगी। इससे पहले ही परीक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो चुके हैं।
पिछले साल भी उठे थे सवाल
खास बात यह है कि कृषि विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर पिछले साल भी पेपर लीक को लेकर सवाल उठ चुके हैं। बीएससी एग्रीकल्चर प्रथम और तृतीय वर्ष की परीक्षाओं के दौरान भी प्रश्नपत्र वायरल होने की जानकारी सामने आई थी। तब विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई की थी और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए नई व्यवस्था लागू करने का दावा किया था।
दावे धरे रह गए
एक साल बाद फिर वही स्थिति सामने आने से सवाल है कि आखिर पिछली गड़बड़ी से क्या सबक लिया गया? अगर प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले ही सोशल मीडिया तक पहुंच रहा है तो निगरानी और गोपनीयता की व्यवस्था कितनी मजबूत है, यह जांच का बड़ा मुद्दा है। अब चार सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट पर निगाह रहेगी कि पेपर लीक की असली कड़ी कहां से जुड़ती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
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