आईआईटी भिलाई के वैज्ञानिकों का कारनामा; अब शरीर में खुद घुल जाएंगे हड्डियों के प्लेट-स्क्रू
NEWS IN SHORT
- आईआईटी भिलाई ने मेडिकल इम्प्लांट्स में किया बड़ा breakthrough
- नई तकनीक से अब हड्डियों में लगाए इम्प्लांट्स होंगे शरीर में घुलने योग्य
- मैग्नीशियम और टाइटेनियम की परत से इम्प्लांट्स की ताकत बढ़ी
- बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए राहत, अब सर्जरी की जरूरत नहीं
- आईआईटी भिलाई का शोध अब अंतरराष्ट्रीय जर्नल में हुआ प्रकाशित
NEWS IN DETAIL
Bhilai। आईआईटी भिलाई छत्तीसगढ़के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने एक नई तकनीक विकसित की है, जिसके तहत हड्डियों में लगाए जाने वाले प्लेट, स्क्रू और इम्प्लांट अब इलाज के बाद धीरे-धीरे शरीर में घुल जाएंगे। इससे मरीजों को दोबारा ऑपरेशन से इन इम्प्लांट्स को निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मैग्नीशियम और टाइटेनियम का अनोखा संयोजन
शोधकर्ताओं ने मैग्नीशियम मिश्र धातु पर टाइटेनियम की पतली और मजबूत परत चढ़ाने की तकनीक तैयार की है। इससे इम्प्लांट शरीर में लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं और बाद इलाज के बाद ये अपने आप शरीर में घुलकर खत्म हो जाएंगे, जिससे मरीज का दर्द कम होगा और दूसरी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए राहत
यह नई तकनीक खासतौर पर बुजुर्गों और गंभीर चोट वाले मरीजों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है, जिन्हें बार-बार सर्जरी से गुजरने की आवश्यकता होती है। इसके जरिए मरीजों को अतिरिक्त खर्च और संक्रमण से बचाया जा सकेगा।
नई तकनीक से इम्प्लांट्स की ताकत बनी रहेगी ज्यादा समय तक
वैज्ञानिकों ने बताया कि मैग्नीशियम एक सुरक्षित धातु है, लेकिन इसका सबसे बड़ा नुकसान यह था कि यह जल्दी खराब हो जाता था। इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने टाइटेनियम की कोटिंग तैयार की, जिससे इम्प्लांट्स का क्षरण रुकता है और इम्प्लांट्स ज्यादा समय तक मजबूत रहते हैं।
अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ शोध
यह शोध हाल ही में डिस्कवर मटेरियल्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अगले चरण में वैज्ञानिक कोशिकाओं की वृद्धि पर इस तकनीक के प्रभाव का अध्ययन करेंगे, जिसके बाद इसका परीक्षण पशुओं पर किया जाएगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
नई तकनीक: हड्डी में लगाए जाने वाले इम्प्लांट्स अब इलाज के बाद धीरे-धीरे शरीर में घुल जाएंगे।
सुरक्षित धातु: मैग्नीशियम पर टाइटेनियम की परत चढ़ाने से इम्प्लांट्स अधिक मजबूत और लंबे समय तक सुरक्षित रहते हैं।
किफायती और सुरक्षित: यह तकनीक बुजुर्गों और गंभीर चोट वाले मरीजों के लिए फायदेमंद है।
मेडिकल क्षेत्र में बड़ी सफलता: अब मरीजों को दूसरी सर्जरी से बचाया जा सकेगा।
अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन: शोध हाल ही में डिस्कवर मटेरियल्स जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
आगे क्या
शोधकर्ता मानते हैं कि यह तकनीक ऑर्थोपेडिक उपचार को और अधिक सुरक्षित और किफायती बना सकती है। खासकर उन मरीजों के लिए, जिन्हें बार-बार सर्जरी से बचने की जरूरत होती है, यह तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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