खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने का दावा, टोल-फ्री नंबर जारी, लेकिन रात को नहीं कर सकेंगे शिकायत
छत्तीसगढ़ में अवैध खनन और खनिज परिवहन पर लगाम लगाने राज्य में टोल फ्री नंबर जारी किया गया है। सरकार इस टोल फ्री नंबर के जरिए अवैध खनन पर लगाम लगाने का दावा कर रही है। योजना के मुताबिक लोग टोल फ्री नंबर पर फोन करेंगे। फोन के जरिए जानकारी खनन सूचना केंद्र में आएगी। अधिकारी तुरंत कार्रवाई करेंगे। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यह टोल फ्री नंबर केवल सुबह 10 से शाम साढ़े 5 बजे तक ही काम करेंगे। जबकि छग में लगभग पूरा अवैध खनन रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ही होता है।
जनता कैसे करेगी सीधे शिकायत?
राज्य शासन के भूविज्ञान एवं खनिकर्म संचालनालय ने इसके लिए टोल फ्री नंबर ’’1800-233-2140’’ जारी किया है। इस नंबर पर कोई भी नागरिक अवैध खनन, अवैध परिवहन, खनिज चोरी, ओवरलोडिंग या अन्य अनियमितताओं की शिकायत सीधे दर्ज करा सकेगा। सरकार का कहना है कि अब शिकायतें केवल फाइलों में दबकर नहीं रहेंगी। लेकिन रात को यह फोन नहीं उठता।
रात में होते हैं अवैध खनन
इन दावों के बीच में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि छग में सबसे अधिक अवैध खनन रात को होते हैं। उस दौरान शिकायत नंबर बंद रहेंगे। ऐसे में किस तरह से खनन माफियाओं पर लगाम लगाया जा सकेगा। क्या अगले दिन शिकायत के आधार पर कार्रवाई या निगरानी का प्रावधान किया जा रहा है?
सालाना हजारों करोड़ का अवैध टर्न ओवर
अवैध खनन का आंकड़ा लगाया जाए तो यह सालाना हजारों करोड़ का होगा। जो माफियाओं के अलावा सरकारी तंत्र में भी बंटता है। कई बार इस बात के खुलासे भी हो चुके हैं। मामले में छत्तीसगढ़ के पामगढ़ विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक शेषराज हरबंश का एक ऑडियो वायरल हुआ था। यह ऑडियो सितंबर 2025 में वायरल हुआ था। जिसमें कथित तौर पर अवैध रेत खनन को लेकर 10 लाख रुपये की डील की बात थी। खनिज विभाग के जिला और राज्य स्तर के कई अधिकारियों पर जांच भी चल रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या वाकई में इस पर सरकार लगाम लगाना चाह रही है?
रात को ही हत्या भी
रात के अंधेरे में ही अवैध खनन का पूरा खेल चलता है। छत्तीसगढ़ समेत देशभर में करीब 99 प्रतिशत अवैध खनन रात के समय होने का दावा किया जाता है। शाम 7 बजे के बाद ट्रक और हाइवा घाटों पर पहुंचने लगते हैं। रात करीब 10 बजे से मशीनें और वाहन सक्रिय हो जाते हैं। यह सिलसिला सुबह 6 बजे तक चलता है। इसके बाद सुबह 10 बजे तक रेत को या तो डंप कर दिया जाता है, या शहरों में पहुंचाकर अनलोड कर दिया जाता है।
सबसे ज्यादा विवाद और हिंसा की घटनाएं भी रात में ही होती हैं। ग्रामीणों के विरोध करने पर मारपीट, धमकी और गाड़ियों से कुचलने तक के मामले सामने आते हैं। कई जगहों पर अवैध खनन रोकने गए ग्रामीणों और अधिकारियों पर हमले भी हो चुके हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पूरा अवैध कारोबार रात में होता है, तो सिर्फ दिन के समय शिकायत व्यवस्था कितनी असरदार साबित होगी।
लापरवाही पर अंकुश का दावा
दावा है कि खनन सूचना केंद्र की स्थापना को केवल शिकायत केंद्र नहीं, बल्कि जवाबदेही का नया मॉडल माना जा रहा है। अब खनन गतिविधियों से जुड़ी सूचनाओं का केंद्रीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे यह भी पता लगाया जा सकेगा कि किस जिले में अवैध खनन सबसे ज्यादा है और किन अधिकारियों की कार्रवाई कमजोर है। माना जा रहा है कि इससे विभागीय लापरवाही पर भी अंकुश लगेगा। लेकिन जब शिकायत दर्ज नहीं होगी तो कैसे लगाम लगेगी?
जीरो टॉलरेंस’ नीति का दावा
सरकार लगातार अवैध खनन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की बात कर रही हैं। सरकार का दावा है कि नया सूचना केंद्र उसी नीति का विस्तार है। खनिज संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़ में लंबे समय से अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई जिलों में रेत, गिट्टी और कोयला माफियाओं की सक्रियता प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सरकार इस केंद्र को निगरानी और नियंत्रण का बड़ा हथियार मान रही है।
कार्यालयीन समय में चलेगा सूचना केंद्र
सरकार के मुताबिक खनन सूचना केंद्र का संचालन सुबह 10 बजे से शाम 5.30 बजे तक किया जाएगा। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए खनिज विभाग के संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है। यानी अब शिकायतों की मॉनिटरिंग सीधे वरिष्ठ स्तर से होगी। इससे कार्रवाई में देरी और जिम्मेदारी टालने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है।
तकनीक और जनता के भरोसे नई रणनीति
राज्य सरकार का मानना है कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई से अवैध खनन पर पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए तकनीकी निगरानी और जनभागीदारी दोनों जरूरी हैं। यही वजह है कि सूचना केंद्र को आम लोगों से जोड़कर इसे पब्लिक मॉनिटरिंग सिस्टम की तरह विकसित करने की तैयारी है। सरकार को उम्मीद है कि ग्रामीण इलाकों से मिलने वाली सूचनाएं खनन माफियाओं के नेटवर्क को उजागर करने में मदद करेंगी।
राजस्व बढ़ाने पर फोकस
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार खनिज संपदा का संरक्षण, पारदर्शी उपयोग और राजस्व संवर्धन तभी संभव है जब जनता और शासन के बीच सीधा संवाद मजबूत हो। सरकार का दावा है कि खनन सूचना केंद्र केवल शिकायत तंत्र नहीं, बल्कि पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक बड़ा संस्थागत सुधार है।
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