आय से अधिक संपत्ति : पूर्व फूड अफसर की बढ़ीं मुश्किलें, चलेगा केस
NEWS IN SHORT
- रिटायर्ड फूड अफसर पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप तय
- हाई कोर्ट ने 83 वर्षीय अफसर की याचिका खारिज की
- 30 साल पुराने मामले में आरोप पत्र पेश
- परिवार के नाम खरीदी संपत्ति में भी आरोप
- स्पेशल कोर्ट ने लंबित मामले में कार्रवाई की
NEWS IN DETAIL
Bilaspur। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप का मामला 30 साल बाद भी कानूनी प्रक्रियाओं में सुर्खियों में है। रिटायर्ड फूड अफसर द्वारिका दास भूतड़ा के खिलाफ 1995 में दर्ज मामला अब स्पेशल कोर्ट में 2025 में आरोप पत्र पेश होने के बाद बिलासपुर हाई कोर्ट तक पहुंचा।
83 वर्षीय भूतड़ा ने आरोप तय करने और 30 साल विलंब से मामले को आगे बढ़ाने को चुनौती दी थी, लेकिन हाई कोर्ट की अवकाशकालीन डिवीजन बेंच ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
प्रारंभिक विवरण और आरोप
द्वारिका दास भूतड़ा पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी सेवा के दौरान अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की। यह मामला 13 सितंबर 1995 को ईओडब्ल्यू (Enforcement Wing) द्वारा दर्ज किया गया था। आरोप पत्र तैयार होने और स्पेशल कोर्ट में पेश किए जाने में तीन दशक का समय लग गया।
भूतड़ा ने हाई कोर्ट में दावा किया कि इतनी लंबी देरी न्यायिक प्रक्रिया और उनके अधिकारों का उल्लंघन करती है। उन्होंने यह भी बताया कि वे अब 83 वर्ष के हो चुके हैं और उनके खिलाफ केवल एक ही आरोप है।
जांच और आरोप पत्र की प्रक्रिया
जांच एजेंसी ने मामले की समीक्षा के बाद 13 अक्टूबर 2020 को मुकदमा चलाने की मंजूरी दी। आरोप पत्र चार साल बाद, 17 दिसंबर 2024 को तैयार किया गया और 3 मई 2025 को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया।
भूतड़ा ने यह तर्क दिया कि 30 साल का विलंब उनकी उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए अनुचित है। हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की यह अपील अस्वीकार करते हुए कहा कि लंबित समय एजेंसी की जिम्मेदारी थी और यह आरोप तय करने की कानूनी प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा नहीं डालता।
आरोपों का विवरण
राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि जांच पूरी हो चुकी है और भूतड़ा ने अपनी घोषित आय से 303.45% अधिक संपत्ति अर्जित की थी।
आरोप पत्र में कुल 43,38,887 रुपए की अतिरिक्त संपत्ति का जिक्र किया गया, जिसमें अचल संपत्ति, शेयर और डिबेंचर शामिल हैं। विशेष रूप से भूतड़ा ने अपनी पत्नी और बेटे के नाम पर भी संपत्ति खरीदी और उनके नाम पर शेयर एवं डिबेंचर खरीदे गए।
सरकारी पक्ष ने यह भी बताया कि भूतड़ा द्वारा अर्जित संपत्ति स्पष्ट रूप से उनके आय से अधिक है और इस पर कानूनी कार्रवाई आवश्यक थी। कोर्ट ने इसे उचित मानते हुए याचिका खारिज कर दी।
अदालत की प्रतिक्रिया
बिलासपुर हाई कोर्ट की अवकाशकालीन डिवीजन बेंच ने जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु के नेतृत्व में याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उम्र और समयावधि मामला की निष्पक्षता को प्रभावित नहीं करती। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्पेशल कोर्ट द्वारा आरोप तय करना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई।
परिवार और संपत्ति
भूतड़ा ने अपने अलावा परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति अर्जित की। उनके परिवार के सदस्य, विशेषकर पत्नी और बेटे, के नाम पर शेयर, डिबेंचर और अचल संपत्ति खरीदी गई। यह संपत्ति पूरी तरह से दस्तावेजीकृत है और जांच एजेंसी के रिकॉर्ड में दर्ज है। जांच एजेंसी ने पाया कि भूतड़ा की संपत्ति उनकी आय से अधिक है।
इस मामले में परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति रखने का आरोप मुख्य आरोपी के खिलाफ जारी सरकारी जांच और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट ने इस तथ्य को देखते हुए आरोप तय करने की प्रक्रिया को वैध माना।
टाइमलाइन
13 सितंबर 1995: ईओडब्ल्यू ने आय से अधिक संपत्ति के आरोप में केस दर्ज किया।
13 अक्टूबर 2020: राज्य सरकार ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दी।
17 दिसंबर 2024: चार्जशीट तैयार हुई।
03 मई 2025: चार्जशीट स्पेशल कोर्ट में दाखिल की गई।
2025: स्पेशल कोर्ट ने आरोप तय किए।
हाल ही में : बिलासपुर हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की।
निष्कर्ष
बिलासपुर हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि उम्र और समयावधि का मामला कानूनी प्रक्रिया पर असर नहीं डालता। 30 साल विलंब से आरोप तय किए जाने पर भी याचिका खारिज की गई। यह मामला सरकारी अधिकारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं में न्याय की अहमियत को दर्शाता है।
FAQ
- रिटायर्ड फूड अफसर द्वारिका दास भूतड़ा के खिलाफ आरोप क्या है?
उन पर 1995 में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप दर्ज किया गया था। - चार्जशीट कब दाखिल की गई थी?
चार्जशीट 17 दिसंबर 2024 को तैयार हुई और 03 मई 2025 को स्पेशल कोर्ट में दाखिल की गई। - हाई कोर्ट ने याचिका पर क्या फैसला किया?
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और स्पेशल कोर्ट में मामला जारी रखने का आदेश दिया।
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