इंद्रावती टाइगर रिजर्व में 3 बाघों का शिकार, स्टाफ ने ही लीक की थी लोकेशन
समझें क्या है पूरा मामला
इंद्रावती टाइगर रिजर्व यानी आईटीआर (ITR - Indravati Tiger Reserve) में 'ऑन डिमांड' टाइगर किलिंग के संगठित नेटवर्क का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि वन विभाग के भीतरी कर्मचारियों ने ही बाघों की सटीक लोकेशन शिकारियों को लीक की।
ट्रैप कैमरे में बाघ दिखते ही शिकारियों ने उनका किलिंग प्लान तैयार किया। नतीजा यह हुआ कि एक महीने के भीतर पासेवाड़ा क्षेत्र में तीन बाघ मार दिए गए और उनकी नीट-एंड-क्लीन खाल उतार ली गई।
कैमरे में बाघ दिखे, शिकारियों ने प्लान बनाया
मार्च 2026 तक की स्थिति में प्रबंधन के पास उपलब्ध 55 कैमरों में से सिर्फ 15 जोड़ी कैमरे ही चालू हालत में थे। इसके बाद प्रबंधन ने 50 नए कैमरे खरीदे।
अप्रैल-मई के दौरान फरसेगढ़ इलाके में जब बाघों की तस्वीरें कैमरों में आईं तो यह खबर पूरे महकमे में फैल गई।
जब बाघ ट्रैप कैमरे में कैद हुए तो विभाग के किसी अंदरूनी स्टाफ ने उनकी सटीक लोकेशन शिकारियों तक लीक कर दी। इनपुट मिलते ही शिकारियों के लिए बाघों की मूवमेंट पर नजर रखना बेहद आसान हो गया।
एक महीने में तीन बाघ मारे
नतीजा यह हुआ कि एक महीने के भीतर तीन बाघ मार दिए गए। उनकी नीट-एंड-क्लीन यानी करीने से खाल उतार ली गई।
यह चौंकाने वाली बात यह भी है कि विभाग के मैदानी स्टाफ को बाघों की पुख्ता मौजूदगी की खबर लीक होने से बहुत पहले लग चुकी थी, जिसे दबाए रखा गया।
आईटीआर में कैमरा ट्रैपिंग के दौरान 12 बाघों की मौजूदगी दर्ज की गई थी जो एक सुखद खबर था। अब आशंका है कि शिकार हुए बाघों की संख्या और अधिक हो सकती है।
बाघ शिकार का कोर एरिया पासेवाड़ा
शिकार का मुख्य क्षेत्र पेनगुड़ा बीट था। दरअसल जब नए कैमरे लगाने की बात हुई तब फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी ने विरोध किया था।
स्टाफ विरोध कर रहा था क्योंकि उसे पता था कि क्षेत्र में शिकारी सक्रिय हैं और बाघ कैमरों में कैद हो सकते हैं।
यह भी सामने आया कि बाघों के शिकार के दौरान क्षेत्र में 6 मवेशियों का शिकार भी किया था।
पैदल गार्ड गिरफ्तार, फॉरेस्ट गार्ड सस्पेंड
इस मामले में शिकारी गैंग के सीधे संपर्क में रहने के आरोप में पैदल गार्ड कुंदन मडावी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
फॉरेस्ट गार्ड विश्वनाथ मांझी को इसी क्षेत्र के निवासी व यूनियन लीडर होने के कारण सस्पेंड किया गया है। उनके निलंबन आदेश में स्पष्ट लिखा है कि 'लापरवाही, उदासीनता और निर्देशों की अवहेलना के कारण यह घटना हुई।'
खुंखार तस्कर अजीत राजगोंड की नजर
मध्य भारत में कुख्यात तस्कर अजीत राजगोंड उर्फ अजीत पारधी का खौफ है। वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो, इंटेलिजेंस और राज्यों के वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अजीत पर पिछले दो दशकों में 40 से अधिक बाघों के शिकार का आरोप है।
जनवरी 2025 में महाराष्ट्र के चंद्रपुर से उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे मध्य भारत के टाइगर लैंडस्केप में हाई अलर्ट जारी किया गया था।
आशंका जताई जा रही है कि छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में हाल ही में हुए 3 बाघों के शिकार के पीछे इसी पारधी गैंग का हाथ है। इस सिलसिले में मध्यप्रदेश की टाइगर स्ट्राइक फोर्स इसी महीने अजीत को जबलपुर कोर्ट में पेश करने वाली है।
इंद्रावती-अबूझमाड़-गढ़चिरौली-चंद्रपुर पर पारधी गैंग की नजर
अजीत जेल में बंद है लेकिन उसके भतीजों समेत परिवार के कई शातिर सदस्य अभी भी फरार हैं। इन शिकारियों के मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के जंगलों में सक्रिय होने की खुफिया रिपोर्ट है।
इंद्रावती-अबूझमाड़-गढ़चिरौली-चंद्रपुर का यह पूरा वन क्षेत्र इस गैंग के निशाने पर बताया जाता है।
कैमरा लगाने का क्यों हो रहा था विरोध
वन विभाग में सबसे छोटी इकाई ट्रैकर की होती है जिसके ऊपर 'बीट गार्ड' होता है। यही कैमरों को मैनेज करता है और डिप्टी रेंजर को रिपोर्ट करता है।
राज्य में स्टाफ की कमी के चलते एक-एक बीट गार्ड 3-4 बीट के भरोसे हैं। इसी का फायदा उठाने में शिकारी सफल रहे।
रेफ्रेंस: दैनिक भास्कर
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