9 जिलों में कप्तानी, चार रेंज की कमान संभालने वाले आईपीएस बीएन मीणा की कहानी
2004 बैच के इस तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी आईपीएस बद्रीनारायण मीणा को रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर रेंज के बाद अब बस्तर रेंज का आईजी बनाया गया है। सबसे ज्यादा जिलों में पुलिस कप्तान रहने का रिकॉर्ड बनाने वाले मीणा अब प्रदेश की चौथी रेंज के आईजी होंगे। आइए जानते हैं आईपीएस बद्रीनारायण मीणा के बारे में ....
31 मई 1980 को जयपुर में जन्मे बद्री मीणा का बचपन एक सामान्य परिवार में बीता। पिता जनगणना विभाग में कार्यरत थे, घर में अनुशासन और पढ़ाई का माहौल था। शुरुआती पढ़ाई जयपुर के स्कूलों में हुई और फिर राजस्थान कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। लेकिन असली मोड़ तब आया, जब उन्होंने अपने बड़े भाई के साथ यूपीएससी की तैयारी शुरू की। पहली कोशिश में असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2003 में यूपीएससी क्रैक कर उन्होंने 2004 बैच में आईपीएस बनकर दिखा दिया कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता।
करियर की शुरुआत और पहली पहचान
27 दिसंबर 2004 को सेवा जॉइन करने के बाद उनकी पहली अहम पोस्टिंग बिलासपुर में एडिशनल एसपी के रूप में हुई। यहीं से उनकी कार्यशैली की झलक दिखने लगी। चर्चित “रवि-स्वीटी हत्याकांड” के खुलासे में उनकी अहम भूमिका रही। इसके अलावा वाहन चोरी के गिरोह का पर्दाफाश और देह व्यापार जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई ने उन्हें एक सख्त लेकिन ईमानदार अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई।
9 जिलों के कप्तान-एक रिकॉर्ड जो अलग पहचान बनाता है
छत्तीसगढ़ में लगातार 9 जिलों में एसपी/एसएसपी रहने का रिकॉर्ड बद्री नारायण मीणा के नाम दर्ज है-जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। बलरामपुर-रामानुजगंज से शुरू हुआ उनका सफर कवर्धा, राजनांदगांव, जगदलपुर, कोरबा, बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़ और दुर्ग तक पहुंचा।
बलरामपुर में उनकी पहली पोस्टिंग के दौरान नक्सलियों ने उनके और तत्कालीन आईजी के काफिले पर हमला कर दिया। उस खतरनाक एंबुश से अपने सीनियर को सुरक्षित निकालना, उनकी बहादुरी और नेतृत्व क्षमता का बड़ा उदाहरण बन गया।
नक्सल मोर्चे से शहर की कानून व्यवस्था तक
बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में उन्होंने ऑपरेशन चलाकर नक्सलियों को पीछे धकेलने में अहम भूमिका निभाई। वहीं राजधानी रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे संवेदनशील जिलों में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना, चुनावों को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना ये सब उनकी प्रशासनिक क्षमता को दर्शाते हैं।
आईजी तक का सफर और नेतृत्व की नई ऊंचाई
डीआईजी पदोन्नति के बाद 2018 में वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) गए। वापस लौटने के बाद दुर्ग के एसएसपी और फिर दुर्ग रेंज के आईजी बने। खास बात ये रही कि उन्होंने दुर्ग रेंज के आईजी के साथ-साथ रायपुर रेंज का भी अतिरिक्त प्रभार संभाला। बाद में बिलासपुर रेंज के आईजी बने और फिर दोबारा दुर्ग रेंज की जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में वे पुलिस मुख्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कम्युनिटी पुलिसिंग और मानवीय चेहरा
बद्री मीणा सिर्फ सख्त अफसर ही नहीं, बल्कि कम्युनिटी पुलिसिंग में विश्वास रखने वाले अधिकारी भी हैं। जनता से संवाद, विश्वास और सहयोग के जरिए उन्होंने कई जिलों में पुलिस की छवि को बदला।
सम्मान और व्यक्तित्व
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जा चुका है। सख्त ड्यूटी के साथ-साथ वे खेलों, खासकर क्रिकेट के अच्छे खिलाड़ी भी हैं- जो उनके संतुलित व्यक्तित्व को दर्शाता है।
बद्री नारायण मीणा की कहानी बताती है कि एक अफसर सिर्फ कुर्सी से नहीं, बल्कि अपने फैसलों, साहस और जनता के भरोसे से बड़ा बनता है। रेगिस्तान की मिट्टी से निकला यह अधिकारी, छत्तीसगढ़ के जंगलों और शहरों में कानून का मजबूत चेहरा बनकर उभरा और यही उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करता है।
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