आईजी रतन लाल डांगी सस्पेंड, विभाग बोला- ऐसे वाले फोटो से पुलिस की छवि खराब हुई
Raipur. छत्तीसगढ़ सरकार के गृह (पुलिस) विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी और आईजी स्तर के अफसर रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जारी आदेश के मुताबिक, डांगी पर पद के अनुरूप आचरण नहीं करने, नैतिकता के विपरीत व्यवहार और अपने पद के प्रभाव का दुरुपयोग करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
आदेश में क्या लिखा है?
26 मार्च 2026 को जारी आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि रतन लाल डांगी का आचरण अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों का उल्लंघन करता है। आदेश में यह भी उल्लेख है कि उनका कृत्य सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुआ, जिससे पुलिस विभाग की छवि को नुकसान पहुंचा।
सोशल मीडिया बना वजह?
इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी सोशल मीडिया को माना जा रहा है। आदेश के मुताबिक, डांगी द्वारा किया गया व्यवहार सार्वजनिक रूप से वायरल हुआ, जिससे न सिर्फ विभाग बल्कि आम जनता के बीच भी नकारात्मक संदेश गया। यही वजह है कि शासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए त्वरित कार्रवाई की।
क्या है पूरा मामला?
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आईपीएस अफसर और वर्तमान में आईजी रतनलाल डांगी पर एक SI की पत्नी ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़ित महिला ने आईपीएस अधिकारी डांगी के खिलाफ लिखित में शिकायत दर्ज कराई। जिस पर पुलिस प्रशासन ने विभागीय जांच भी शुरु की थी। दूसरी तरफ रतनलाल डांगी ने भी महिला पर ब्लैकमेलिंग के आरोप लगाए थे। उन्होंने इसकी शिकायत भी की थी। जिसके बाद सोशल मीडिया में रतनलाल डांगी के नाम से कुछ अश्लील फोटो भी सोशल मीडिया में वायरल हुई थी।
निलंबन के बाद क्या होंगे नियम?
सरकार ने आदेश में स्पष्ट किया है कि निलंबन अवधि के दौरान रतन लाल डांगी (ips ratanlal dangi) का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर रहेगा। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा, लेकिन बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। यह कार्रवाई अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1969 के तहत की गई है।
पुराने मामलों से क्या है कनेक्शन?
अगर पिछले कुछ वर्षों पर नजर डालें, तो यह पहला मामला नहीं है जब किसी वरिष्ठ अधिकारी पर इस तरह की कार्रवाई हुई हो। इससे पहले भी छत्तीसगढ़ में कई अफसरों पर सोशल मीडिया आचरण, भ्रष्टाचार या पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। कई मामलों में जांच तो शुरू हुई, लेकिन अंतिम परिणाम सामने आने में लंबा समय लगा।
क्या सिस्टम सख्त हो रहा है?
इस कार्रवाई को सिस्टम के सख्त रुख के तौर पर भी देखा जा रहा है। हाल के दिनों में सरकार और विभाग सोशल मीडिया पर अधिकारियों के व्यवहार को लेकर ज्यादा सतर्क नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि अब सार्वजनिक छवि और आचरण को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
जनता और विभाग में क्या चर्चा?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस महकमे और आम लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है। लोग इसे एक सख्त संदेश के रूप में देख रहे हैं कि अब वरिष्ठ अधिकारियों को भी नियमों के दायरे में रहना होगा। वहीं कुछ लोग इसे सिस्टम की देर से आई जागरूकता भी बता रहे हैं।
निलंबन के बाद अब विभागीय जांच
निलंबन के बाद अब विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जांच में आरोप सही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई भी संभव है। फिलहाल यह मामला एक उदाहरण बन गया है कि सोशल मीडिया के दौर में अधिकारियों की हर गतिविधि पर नजर है और जरा सी चूक भारी पड़ सकती है।
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