छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार की गड़बड़ी, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से आरटीई मामले में मांगा जवाब
NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में आरटीई सीटों की कमी पर हाईकोर्ट का बड़ा सवाल
- निजी स्कूलों की मनमानी पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया
- छत्तीसगढ़ में आरटीई विवाद: अगली सुनवाई 8 अप्रैल को
- हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग से मांगा विस्तृत हलफनामा
- हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों की अनियमितताओं पर कसा शिकंजा
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ राज्य में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत आरक्षित सीटों की संख्या में कमी और निजी स्कूलों की अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार को हाईकोर्ट से कड़ी फटकार मिली है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत हलफनामे में कई विरोधाभास पाए और स्कूल शिक्षा विभाग को इन मुद्दों पर विस्तृत और स्पष्ट जवाब देने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार से यह भी पूछा गया कि जब पहले आरटीई के तहत 85,000 सीटें थीं तो अब उनमें 30,000 की कमी क्यों आई? इसके साथ ही, कोर्ट ने निजी स्कूलों के खिलाफ उठे आरोपों पर भी गंभीर चिंता जताई।
आरटीई सीटों की कमी पर हाईकोर्ट का सवाल
राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था, लेकिन इस बार सुनवाई में राज्य की ओर से हलफनामा संयुक्त सचिव ने प्रस्तुत किया, क्योंकि सचिव चुनाव आयोग की ड्यूटी के कारण असम में तैनात थे। हालांकि, कोर्ट ने इस हलफनामे को तो स्वीकार किया, लेकिन इसमें दी गई जानकारी पर असंतोष जताया और सरकार से अधिक स्पष्टता की उम्मीद जताई।
निजी स्कूलों की अनियमितताओं पर भी कोर्ट की सख्ती
सुनवाई के दौरान कोर्ट में निजी स्कूलों की अनियमितताओं का भी मुद्दा उठा। नारायणा टेक्नो स्कूल और ब्रिलियंट पब्लिक स्कूल पर आरोप लगाए गए कि ये स्कूल सीबीएसई संबद्धता का गलत दावा करते हुए अभिभावकों को भ्रमित करते हैं और सालभर होम एग्जाम लेने के बाद अचानक बोर्ड परीक्षा लेने की प्रक्रिया अपनाते हैं। इसके अलावा, इन स्कूलों पर फीस बढ़ाने के भी आरोप लगे हैं। कोर्ट में यह भी बताया गया कि जो अभिभावक इन अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उन्हें स्कूल प्रबंधन द्वारा आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य सरकार ने आरटीई सीटों की कमी के आरोप को गलत बताया और दावा किया कि आगामी सत्र 2026-27 में प्री-प्राइमरी स्तर पर प्रवेश नहीं दिया जाएगा क्योंकि आरटीई कानून केवल 6 से 14 वर्ष के बच्चों पर लागू होता है। सरकार के अनुसार, पिछले सत्र में 35,335 छात्र कक्षा 1 में जाएंगे और 19,540 नए छात्रों को प्रवेश मिलेगा, जिससे कुल 54,875 छात्रों को आरटीई के तहत लाभ मिलेगा। इस आधार पर सरकार ने आरोपों को गलत ठहराया।
अगली सुनवाई 8 अप्रैल को
हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी बिंदुओं पर विस्तृत हलफनामा अगली सुनवाई से पहले प्रस्तुत करें। इसके साथ ही, जिन मामलों में राज्य सरकार ने अब तक जवाब दाखिल नहीं किया है, उन्हें भी जल्द प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से आरटीई सीटों में कमी पर स्पष्ट जवाब मांगा। निजी स्कूलों पर मनमाने शुल्क वृद्धि और गलत सीबीएसई संबद्धता के आरोपों की सुनवाई भी हुई। राज्य सरकार ने आरटीई सीटों में कमी को गलत बताया, लेकिन कोर्ट ने इसके दावों पर सवाल उठाए। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2026 को होगी, जिसमें राज्य सरकार को विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करना होगा।
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