जगदलपुर में संतान सुख के नाम पर करोड़ों की ठगी, वनकर्मी पति-पत्नी पर FIR के निर्देश
समझें क्या है पूरा मामला
Jagdalpur। जगदलपुर में संतान सुख दिलाने के नाम पर एक दंपति से करीब डेढ़ करोड़ रुपए लेने का मामला सामने आया है। पीड़ित पक्ष ने वन विभाग में पदस्थ एक वनरक्षक और उसकी पत्नी पर पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र, जड़ी-बूटी, ताबीज और धार्मिक सामग्री के नाम पर वर्षों तक पैसे लेने का आरोप लगाया है।
मामला महिला आयोग की जनसुनवाई में पहुंचने के बाद बस्तर पुलिस को एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही आरोपी वनरक्षक की संपत्ति, वाहन खरीद और मकान निर्माण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल सभी आरोप शिकायत के आधार पर हैं। पुलिस और प्रशासन की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित लेन-देन कैसे हुआ और आरोपों में कितनी सच्चाई है।
इलाज के बाद तंत्र-मंत्र की ओर बढ़ा परिवार
शिकायत के मुताबिक, पीड़ित दंपति की शादी वर्ष 2008 में हुई थी। शादी के बाद लंबे समय तक संतान नहीं होने पर उन्होंने चिकित्सकीय इलाज कराया। जांच में महिला को पीसीओडी की समस्या बताई गई थी। इलाज के दौरान एक बार गर्भधारण भी हुआ, लेकिन छह महीने में गर्भपात हो गया। इस घटना से दंपति मानसिक रूप से टूट गया।
इसी दौरान उनकी पहचान वनरक्षक डूमर राम नायक और उसकी पत्नी शिखा नायक से हुई। आरोप है कि दोनों ने दावा किया कि विशेष पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों से दंपति को संतान सुख मिल सकता है। शुरुआत सामान्य पूजा-पाठ से हुई, लेकिन बाद में खर्च लगातार बढ़ता चला गया।
जड़ी-बूटी, ताबीज और रुद्राक्ष के नाम पर मांगे पैसे
आवेदिका ने आयोग के सामने आरोप लगाया कि कभी दुर्लभ जड़ी-बूटी, कभी ताबीज, कभी ताम्रपत्र और कभी रुद्राक्ष के नाम पर बड़ी रकम ली गई। कथित रूप से एक विशेष पूजा के लिए 15 लाख रुपए तक मांगे गए। एक रुद्राक्ष को भगवान शिव की जटाओं से गिरा हुआ बताकर एक लाख रुपए में दिए जाने का भी आरोप है।
शिकायत में कहा गया है कि हर बार दंपति को बताया जाता था कि अब केवल अंतिम अनुष्ठान बाकी है। यह भरोसा दिलाया जाता था कि पूजा पूरी होते ही उनकी समस्या समाप्त हो जाएगी। संतान की चाह और कथित अनिष्ट के डर के कारण दंपति पैसे देता रहा।
एफडी तुड़वाई, जमीन बेची, जमा पूंजी भी खत्म
पीड़ित पक्ष का दावा है कि वर्ष 2015 से 2021 के बीच अलग-अलग मौकों पर करीब डेढ़ करोड़ रुपए दिए गए। इसके लिए उन्होंने अपनी बचत खर्च की, बैंक की एफडी तुड़वाई और कुछ जमीन-जायदाद भी बेच दी।
आरोप यह भी है कि दंपति को मानसिक दबाव में रखा गया। घर के आसपास जड़ी-बूटियां गाड़ने, अलग-अलग पदार्थ खिलाने और पूजा रोकने पर परिवार के साथ अनहोनी होने की बात कही जाती थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इसी डर के कारण वे लंबे समय तक सवाल नहीं उठा सके।
बेटे के जन्म के बाद और मजबूत हुआ भरोसा
वर्ष 2017 में दंपति के घर बेटे का जन्म हुआ। इसके बाद परिवार का विश्वास कथित पूजा-पाठ पर और बढ़ गया। उन्हें लगा कि अनुष्ठानों के कारण ही उन्हें संतान प्राप्त हुई है।
कुछ समय बाद पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि वनरक्षक दंपति ने इसे भी तंत्र-मंत्र का असर बताया और संकट दूर करने के नाम पर दोबारा पूजा कराने की बात कही। इसके बाद कथित रूप से फिर पैसे मांगे गए।
जब शिकायतकर्ता को ठगी की आशंका हुई तो उसने पूजा सामग्री वापस लेने और पैसे लौटाने को कहा। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने दावा किया कि ताबीज और जड़ी-बूटियां चमरू और विजय नाम के नक्सलियों से ली गई थीं, इसलिए सामान वापस नहीं किया जा सकता। इस बात की भी जांच बाकी है।
महिला आयोग की सुनवाई में संपत्ति पर उठे सवाल
मामला महिला आयोग की जनसुनवाई में पहुंचा, जिसकी अध्यक्षता किरणमयी नायक ने की। सुनवाई के दौरान वनरक्षक से उसकी आय, वाहन खरीद और मकान निर्माण से संबंधित सवाल पूछे गए।
आयोग ने जानना चाहा कि कार खरीदने और मकान बनाने से पहले विभागीय अनुमति ली गई थी या नहीं। बैंक से लिए गए किसी ऋण का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।
आवेदिका ने आरोप लगाया कि उससे लिए गए पैसों से मकान बनाया गया और वाहन खरीदे गए। पहले एक मारुति कार और बाद में दूसरी गाड़ी खरीदने का दावा भी शिकायत में किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि दस्तावेजी जांच के बाद ही हो सकेगी।
एक महीने में मांगी गई जांच रिपोर्ट
प्रारंभिक सुनवाई के बाद महिला आयोग ने मामले को गंभीर माना है। बस्तर एसपी को संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा भेजी गई है। कांगेर घाटी क्षेत्र में पदस्थ वनरक्षक की चल-अचल संपत्ति, वाहनों, मकान निर्माण और विभागीय अनुमतियों की जांच के लिए एडीएम को निर्देशित किया गया है।
पुलिस और प्रशासन से एक महीने के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। जांच में बैंक लेन-देन, संपत्ति खरीद, आय के स्रोत, विभागीय अनुमति और शिकायत में बताए गए भुगतान की पड़ताल की जा सकती है। आरोप सही हैं या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
मामला जगदलपुर का है और शिकायत महिला आयोग की जनसुनवाई में पहुंची।
वनरक्षक डूमर राम नायक और उसकी पत्नी शिखा नायक पर ठगी का आरोप है।
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2015 से 2021 के बीच करीब डेढ़ करोड़ रुपए लिए गए।
पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र, जड़ी-बूटी, ताबीज और रुद्राक्ष के नाम पर पैसे मांगने का आरोप है।
पीड़ित दंपति ने एफडी तुड़वाने और जमीन-जायदाद बेचने का दावा किया है।
महिला आयोग ने बस्तर एसपी को एफआईआर की अनुशंसा की है।
एडीएम को वनरक्षक की संपत्ति, वाहन और मकान निर्माण की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर मांगी गई है।
आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस और प्रशासनिक जांच के बाद होगी।
FAQ
- वनरक्षक दंपति पर क्या आरोप है?
उन पर संतान सुख दिलाने के नाम पर पूजा-पाठ, तंत्र-मंत्र, ताबीज और जड़ी-बूटी के जरिए करीब डेढ़ करोड़ रुपये लेने का आरोप है। - कथित ठगी कब तक चली?
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2015 से 2021 के बीच अलग-अलग बहानों से पैसे लिए गए। - मामले में क्या कार्रवाई हुई है?
महिला आयोग ने बस्तर एसपी को एफआईआर की अनुशंसा की है। एडीएम को वनरक्षक की संपत्ति, वाहन और मकान निर्माण की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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